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‘बंग-जंग’ का आगाज: बंगाल में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान सुबह 5 बजे से लगी कतारें

KHULASA FIRST

संवाददाता

23 अप्रैल 2026, 4:03 pm
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‘बंग-जंग’ का आगाज

प. बंगाल में पहले चरण की वोटिंग शुरू, तमिलनाडु में आज ही पूर्ण मतदान

पश्चिम बंगाल में मात्र 3 घंटे में ही हो गया 22 फीसदी से ज्यादा मतदान, हुमायूं का विरोध

भाजपा को सत्ता में आने का भरपूर भरोसा, तृणमूल का आत्मविश्वास चरम पर

सुरक्षा के इंतजामों का असर, बंपर वोटिंग की तरफ बढ़ रहा बंगाल, मतदान केंद्रों पर भारी भीड़

तमिलनाडु में आज एक ही दिन में मुकम्मल हो जाएगा चुनाव, दिल्ली बनाम चैन्नई का शोर ज्यादा

डीएमके व एआईडीएमके के बीच फिल्म स्टार विजय ने बनाया त्रिकोणीय मुकाबला, भाजपा भी उम्मीद से

नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बंग की जंग, यानी पश्चिम बंगाल के सियासी युद्ध का आज आगाज हो गया। जंग का ये पहला चरण है। पहले दौर की ये चुनावी लड़ाई सूबे के 16 अहम जिलों में अलसुबह से छिड़ी हुई हैं। इनमें ज्यादातर जिले सियासत के लिहाज से मुस्लिम बहुल व संवेदनशील हैं। बावजूद इसके अलसुबह से मतदान केंद्रों पर मतदाताओं का एक तरह से सैलाब उमड़ पड़ा है। बंगाल की इस पहले दौर की चुनावी सियासत में कई दिग्गज नेताओं की राजनीति दांव पर लगी है।

घुसपैठ, धर्मांतरण, डेमोग्राफी में बदलाव, महिला आरक्षण, गुंडागर्दी जैसे तमाम गर्मागर्म मुद्दों को लेकर हो रहे पश्चिम बंगाल का ये चुनाव बंपर वोटिंग की तरफ बढ़ता नज़र आ रहा हैं। सुरक्षा के जबरदस्त बंदोबस्त व केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी संख्या में तैनाती भयमुक्त चुनाव की तस्वीर सामने ला रहे हैं।

महज 3 घंटे में बंगाल में 22 से 25 प्रतिशत तक मतदान होने की जानकारी आ रही है। अगर ये ही ट्रेंड रहा तो इस बार पश्चिम बंगाल में पहले दौर के मतदान का प्रतिशत 80 फीसदी तक पहुंच सकता है।

पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव हो रहा है। आज 16 जिलों की 152 सीटों पर चुनाव की शुरुआत हुई। खबर लिखे जाने तक किसी भी जिले से कोई बड़ी हिंसा की घटना की खबर सामने नहीं आई। अन्यथा अब तक पश्चिम बंगाल का चुनावी मिजाज रहा है कि वोटिंग की शुरुआत के साथ ही हिंसक झड़प की भी शुरुआत हो जाती थी। आज जिन दिग्गज नेताओं की चुनावी तकदीर दांव पर लगी है उनमें बाबरी मस्जिद को पुनः बनाने का दावा करने वाले हुमायूं कबीर से लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीररंजन चौधरी शामिल हैं।

दिल्ली की राजनीति करने वाले अधीररंजन दो दशक बाद राज्य का चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस की ही राज्यसभा सांसद मौसम नूर, भाजपा के दिग्गज नेता दिलीप घोष, निशीथ प्रमाणिक, शुभेंदु अधिकारी की प्रतिष्ठा भी पहले दौर के मतदान में दांव पर लगी हुई है।

इसके अलावा पवित्रा कर, उदयन गुहा जैसे नेता भी मैदान में हैं। सुबह से ही इन नेताओं के इलाकों में चुनावी हलचल ज्यादा है और राजनीति का पारा मौसम के लिहाज से सुबह से ही चढ़ा हुआ है।

पहले दौर में जिन 16 जिलों में चुनाव हो रहा है, उनमें मेदिनीपुर पश्चिम, मेदिनीपुर पूर्व, मालदा, झाड़ग्राम, पुरुलिया, अलीपुरद्वार, कालिम्पोंग, दार्जिलिंग, पुरुलिया, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर अहम जिले हैं।

इनमें से ज्यादातर जिले संवेदनशील हैं। मुस्लिम वोटर्स के लिहाज से तृणमूल कांग्रेस के लिए अहम इन जिलों में भाजपा सनातन बचाने के नाम से चुनावी मैदान में है।

पहले दौर की वोटिंग में 1478 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 3.6 करोड़ मतदाता इनकी किस्मत का फैसला करेंगे। इनमें 1 करोड़ 85 लाख पुरुष व 1 करोड़ 76 लाख महिला मतदाता शामिल हैं।

पहले दौर के मतदान में 565 थर्ड जेंडर भी वोट डालेंगे। सुबह 11 बजे तक हुए मतदान में हुमायूं कबीर व तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के समाचार हैं। हुमायूं कबीर को मुर्शिदाबाद में धक्कामुक्की का सामना करना पड़ा।

दक्षिण भारत में राजनीति के लिहाज से सबसे अहम राज्य तमिलनाडु में आज एक ही दौर में मुकम्मल चुनाव हो रहा है। यहां की सभी 234 सीटों पर मतदान शुरू हो गया है। सुबह 9 बजे तक 18 फीसदी के लगभग मतदान हो चुका था।

2021 की तुलना में ये 4 फीसदी ज्यादा है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चैन्नई में वोट डाला। अभिनेता रजनीकांत व अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने निकले तमिल सुपर स्टार विजय ने भी वोटिंग की।

इस सूबे में सीएम स्टालिन के साथ उनके बेटे उदयनिधि की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। इसके अलावा एआईडीएमके के पी. संथाना कृष्णन, अदिराजाराम, डीएमके के आरडी शेखर, टीवीके उम्मीदवार व तमिल सुपर स्टार विजय के अलावा के. पलनासामी व काशी सी. जैसे नेताओं की तकदीर का फैसला होने जा रहा है। फिल्म अभिनेता विजय की फैन फॉलोइंग पर सबकी नजरें हैं कि वह क्या वोटिंग में भी नजर आएगी? भाजपा भी उम्मीद से है कि उसका प्रदर्शन दो अंकों तक पहुंचे।

इस बार तमिलनाडु के चुनाव में दिल्ली बनाम चैन्नई का शोर आखिरी दौर में ज्यादा नजर आया। बताते हैं ये शोर सत्तारूढ़ दल के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होने जा रहा है। दिल्ली की राजनीति में उत्तर बनाम दक्षिण के कथित टकराव के मुद्दे ने इस चुनाव का रंग बदल दिया है।

संसद में काले कपड़े पहनकर आए सांसदों ने अपने राज्य में ये संदेश देने की कोशिश की कि केंद्र सरकार परिसीमन के जरिये तमिलनाडु का हक मारने जा रही है। अब यह तो परिणाम ही बताएंगे कि ये मुद्दा असरकारी रहा या नहीं? आमतौर पर यहां चुनाव शांतिपूर्ण ही रहता है और सुबह 11 बजे तक राज्य का ये ही सियासी मिजाज कायम है।

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