इंदौर में फ्लाय डाइनिंग रेस्टोरेंट का मामला: निगम से कलेक्टोरेट तक फाइल की अनदेखी; मामला हाईकोर्ट तक गया
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर और मध्य प्रदेश का पहला फ्लाय डाइनिंग रेस्टोरेंट उबुद अब कानूनी विवादों में फंस गया है। 150 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस रेस्टोरेंट की मंजूरी कैसे मिली, इसे लेकर मामला हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पहुंच गया है। वहीं नगर निगम का कहना है कि उन्होंने इस मंजूरी में कोई भूमिका नहीं निभाई।
निगम की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट में निगम के अधिवक्ता ने कहा कि रेस्टोरेंट संचालकों को नवंबर में ही नोटिस भेज दिया गया था। सवाल यह उठता है कि इतने समय तक यह रेस्टोरेंट कैसे चल रहा था और क्या इसके पास कोई वैध मंजूरी है।
फाइल की कहानी
कंपनी एक्सपेरियम एडवेंचर्स एलएलपी ने नवंबर 2025 के पहले सप्ताह में नगर निगम से मंजूरी के लिए आवेदन किया। नगर निगम के अधिकारी पहली बार ऐसी फाइल देखकर चौंक गए। तय किया गया कि जिला प्रशासन से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लिया जाए, लेकिन इस मामले में कलेक्टोरेट से एनओसी का कोई वास्तविक रिकॉर्ड नहीं बन पाया। इसके बावजूद कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने प्रशासन और निगम के अधिकारियों से रसूखदारों के माध्यम से संपर्क करवाया। इसके बाद निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच चर्चा हुई और बीच का रास्ता निकाला गया।
अनापत्ति जारी और ट्रेड लाइसेंस
कलेक्टोरेट ने 11 नवंबर 2025 को 17 बिंदुओं वाली अनापत्ति जारी की। इसके आधार पर कंपनी ने पुनः निगम से संपर्क किया और ट्रेड लाइसेंस जारी हो गया। इसी आधार पर रेस्टोरेंट संचालन शुरू हुआ।
अनापत्ति सिर्फ खानापूर्ति
कलेक्टोरेट की अनापत्ति केवल खानापूर्ति थी। इसमें साफ लिखा था कि किसी भी मंजूरी या अनापत्ति की जिम्मेदारी आयोजक की होगी। इसके अलावा इसमें कहा गया कि फायर, पुलिस, नगर निगम, एसडीएम, आबकारी और वाणिज्यिक कर विभाग से आवश्यक अनुमति लेना आयोजक की जिम्मेदारी है।
निगम का रवैया विवादास्पद
नवंबर में नोटिस देने के बावजूद निगम ने इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और सवाल किया कि क्या निगम जनहित याचिका (PIL) लगने का इंतजार कर रहा था।
रेस्टोरेंट संचालकों का बयान
संचालक राहुल शर्मा का कहना है कि वे पूरे सुरक्षा मानकों का पालन कर रेस्टोरेंट चला रहे हैं। उनके पास निगम से ट्रेड लाइसेंस और कलेक्टोरेट से अनापत्ति दोनों हैं। उन्होंने बताया कि सभी विभागों को अनापत्ति की कॉपी भेज दी गई थी और किसी विभाग ने कभी कोई आपत्ति नहीं जताई।
जनहित याचिका और अगली सुनवाई
हाईकोर्ट में अधिवक्ता चर्चिल शास्त्री की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता मनीष यादव ने तर्क दिया कि रेस्टोरेंट 150 फीट की ऊंचाई पर संचालित हो रहा है और इसके पास कानूनी मंजूरी नहीं है। सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किए गए हैं। अगली सुनवाई 10 मार्च को होने की संभावना है।
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