बज गया प्रतिष्ठित क्लब के चुनाव का बिगुल: सरगर्मी हुई तेज; मौजूदा पदाधिकारियों की पैनल तैयार, विरोधी खेमा असमंजस में, अब तीसरा गुट भी मैदान में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के प्रतिष्ठित यशवंत क्लब में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जून में होने वाले चुनाव को लेकर क्लब की राजनीति पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। एक ओर जहां मौजूदा नेतृत्व का पैनल पूरी तरह तैयार है, वहीं दूसरी ओर विरोधी खेमे अब तक अंतिम रूप नहीं ले पाए हैं। इसी बीच तीसरे गुट की संभावित एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
दो बार जीत के बाद मैदान से बाहर वर्तमान नेतृत्व
मौजूदा चेयरमैन टोनी सचदेवा और सचिव संजय गोरानी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे। दरअसल, क्लब के संविधान के अनुसार कोई भी पदाधिकारी लगातार तीन बार चुनाव नहीं लड़ सकता।
इस बार खुद मैदान से बाहर
दोनों ने पिछले दो कार्यकाल में जीत दर्ज की थी, इसलिए इस बार वे खुद मैदान से बाहर हैं, लेकिन उनका पैनल पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतर रहा है।
टीम गोरानी की पैनल पूरी तरह तैयार
गोरानी समर्थित पैनल ने अपने उम्मीदवार लगभग तय कर लिए हैं और प्रचार भी शुरू हो चुका है। इस पैनल से- चेयरमैन पद के लिए जितेंद्र उर्फ जीतू जैन, सचिव पद के लिए विजय कस्तूरी, सह सचिव के लिए तेजवीर जुनेजा और कोषाध्यक्ष के लिए रूपल पारिख का नाम है।
कार्यकारिणी के लिए ये नाम
इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के रूप में वैभव दुआ, गुनीत चड्ढा, राजेश तलवार और भारती बडोतिया के नाम सामने आ चुके हैं, जबकि एक नाम पर अंतिम सहमति बनना बाकी है।
पम्मी छाबड़ा का रुख अभी स्पष्ट नहीं
पूर्व चेयरमैन पम्मी छाबड़ा के पैनल को लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। उनके समर्थकों और उम्मीदवारों की सूची का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, छाबड़ा का कहना है कि वे किसी पैनल या गुट का हिस्सा नहीं हैं और केवल क्लब के हित और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से चेयरमैन पद के लिए मैदान में उतर रहे हैं। संभावना है कि उनके पैनल की घोषणा आने वाले कुछ दिनों में हो सकती है।
बागड़िया-सेठ की जोड़ी बढ़ा रही सस्पेंस
वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया पर इस समय सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पहले चर्चा थी कि वे गोरानी पैनल का हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन अब वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। उनके साथ अतुल सेठ भी सक्रिय हैं, जो लंबे समय से सचिव पद के दावेदार माने जा रहे हैं।
अलग पैनल बनाने की दिशा में काम
दोनों मिलकर एक अलग पैनल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो चुनाव त्रिकोणीय हो सकता है, जिससे बाकी पैनलों की रणनीति प्रभावित होना तय है।
तीसरे पैनल से बढ़ सकती हैं मुश्किलें
यशवंत क्लब के चुनाव में आमतौर पर दो ही पैनलों के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिलता है। लेकिन यदि इस बार तीसरा पैनल मैदान में उतरता है, तो वोटों का बंटवारा तय है और इससे परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं।
इस पर टिकी नजरें
फिलहाल सभी की नजरें पम्मी पैनल की घोषणा और बागड़िया गुट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि मुकाबला दो तरफा रहेगा या फिर इस बार क्लब का चुनाव नए समीकरणों के साथ इतिहास रचेगा।
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