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15 साल पुरानी बसों पर लगेगा ब्रेक: हाईकोर्ट ने खारिज की याचिकाएं; बंद होंगी इतनी बसें

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 अप्रैल 2026, 5:47 pm
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15 साल पुरानी बसों पर लगेगा ब्रेक

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
मध्यप्रदेश में 15 साल से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों को सड़कों से हटाने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए बस ऑपरेटर्स की सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

899 बसें होंगी बाहर
प्रदेश में फिलहाल 899 ऐसी कमर्शियल बसें संचालित हो रही हैं, जो 15 साल की निर्धारित उम्र पार कर चुकी हैं। ये बसें तकनीकी रूप से पुरानी और असुरक्षित मानी जा रही हैं, इसके बावजूद अब तक विभिन्न शहरों के बीच यात्रियों को ढो रही थी।

सरकार के आदेश को कोर्ट की मंजूरी
राज्य सरकार ने 14 नवंबर 2025 को इन बसों को हटाने का आदेश जारी किया था, जिसे बस ऑपरेटर्स ने कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने इन सभी 10 याचिकाओं को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने साफ कहा कि जब नियम और संशोधन पहले से वैध हैं, तो उनके आधार पर जारी आदेश को अवैध नहीं माना जा सकता।

परिवहन नीति पर सरकार का अधिकार
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को परिवहन नीति और स्टेज कैरिज परमिट से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है। इस फैसले के बाद अब 15 साल से अधिक पुराने कमर्शियल वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

जबलपुर में सबसे ज्यादा खटारा बसें
जानकारी के मुताबिक, जबलपुर में सबसे ज्यादा पुरानी बसें संचालित हो रही हैं, जबकि रीवा संभाग में इनकी संख्या सबसे कम है। परिवहन विभाग के सचिव मनीष सिंह ने आयुक्त विवेक शर्मा को इन बसों की सूची सौंप दी है, जिसके आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

बस ऑपरेटर्स की दलील
बस संचालकों का कहना है कि जब उन्हें परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट दिया गया था, तब उनकी बसों की उम्र 15 साल पूरी नहीं हुई थी, इसलिए अब उन्हें हटाना अनुचित है।हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।

रोजाना लाखों यात्रियों पर असर
मध्यप्रदेश में रोजाना करीब 11,000 वैध बसें सड़कों पर चलती हैं। एक बस में औसतन 40-50 यात्री सफर करते हैं, यानी रोजाना करीब 4.5 लाख लोग बसों से यात्रा करते हैं। ऐसे में इस फैसले का व्यापक असर पड़ने की संभावना है।

डबल बेंच में जा सकते हैं ऑपरेटर्स
याचिकाकर्ताओं ने संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले को हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती दे सकते हैं।

इन बस ऑपरेटर्स ने दायर की थी याचिका
इस मामले में भोपाल समेत कई जिलों के बस ऑपरेटर्स विकास भार्गव, आरजे फौजदार बस सर्विस, रुकमनी राय, ममता रघुवंशी, सुनीता जैन, प्रहलाद भक्त यादव, दमोह जिला बस ऑपरेटर यूनियन, हेमवती चौरासिया, शेख नावेद और मोहम्मद अमीर ने याचिका दायर की थी।

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