भाजपा को दिखाना होगा दस का दमखम: रोचक हुआ एमपी में राज्यसभा का चुनाव
KHULASA FIRST
संवाददाता

केवट के जरिये पूर्वी उत्तर प्रदेश की 150 सीट पर भाजपा की नजर, 5 प्रतिशत आबादी, 18 फीसदी वोट
तीसरी सीट के लिए मुख्यमंत्री ने दिखाया दमखम, कांग्रेस के विधायकों पर टिकाई नजरें
कांग्रेस भी हुई एकजुट, सभी विधायकों को लिया निगरानी में, बैंगलुरू शिफ्टिंग की तैयारी
महिला नेता के खिलाफ तीसरे उम्मीदवार पर कांग्रेस ने भाजपा को याद दिलाया ‘नारी वंदन’
भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का लगा आरोप, भूरिया बोले 5-5 करोड़ का ऑफर
मीनाक्षी के नामांकन के लिए साथ आए कांग्रेस के सभी गुट-क्षत्रप, पटवारी का दावा-500 प्रतिशत जीतेंगे
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा का चुनाव दिलचस्प व रोचक हो चला है। चुनाव का आगाज तो सुस्त ही हुआ था। सब कुछ तय-सा था। वही दो सीट भाजपा की और एक सीट कांग्रेस की। वोट का गणित भी इसी आंकड़े के अनुरूप था।
भाजपा-कांग्रेस के विधायकों की संख्या के अनुपात में ही सीटें तय थीं और चुनाव का मामला एक तरह से नीरस था, रसहीन था। अब ये चुनाव रसयुक्त हो गया। देशभर में चर्चा में आ गया। विधायकों की निगरानी शुरू हो गई।
हॉर्स ट्रेडिंग, यानी विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप शुरू हो गए। 5-5 करोड़ के शुरुआती ऑफर की गूंज हो गई। विमान के जरिये विधायकों के एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्टिंग के हालात बन गए।
एक-दूसरे के दल में सेंधमारी शुरू हो गई। सबकी नजरें एमपी पर टिक गईं कि क्या यहां भाजपा एक अतिरिक्त सीट जीत लेगी? जी हां, ये तमाम हालात इस एक अतिरिक्त सीट के कारण ही पैदा हुए हैं।
भाजपा के हिस्से में नहीं थी ये सीट। वोट का गणित 8-10 विधायक की कमी का है। अब भाजपा को ये ही ‘दस का दमखम’ दिखाना होगा। सूबे के ‘पहलवान’ ने मुट्ठी भींचकर, खम दिखाकर, हाथ उठाकर दमखम का मुजाहिरा कर भी दिया है।
नतीजे में कांग्रेस अब ‘भागी-भागी, मारी-मारी’ फिर रही है। बावजूद दावा कर रही है कि 500 फीसदी हम सीट जीतेंगे।
ये केवट कहां से आए, क्यों आए...? ये यक्ष प्रश्न महेश केवट को भाजपा ने जैसे ही राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए चुना, सबसे ज्यादा चर्चा में आया। भाजपा ही नहीं, कांग्रेस भी चौंकी कि आखिर केवट ही क्यों?
मध्य प्रदेश के राजनीतिक हालात व नक्शा ऐसा है भी नहीं कि भाजपा को अपनी चुनावी नाव केवट के हवाले करना पड़े। ये ही विचार कांग्रेस-भाजपा को एक समान मथ रहा था। तब खुलासा फर्स्ट ने सबसे पहले खुलासा किया कि केवट की उम्मीदवारी की पीछे 8 महीने बाद बगल के राज्य उत्तर प्रदेश के चुनावों का गणित है।
आलाकमान ने यूपी के बड़े चुनाव को ध्यान में रखकर इस छोटे चुनाव में केवट, मांझी, मछुआरा व निषाद समाज के लिए बड़ा दांव खेला है। अन्यथा तीसरी सीट के लिए भाजपा के पास ऐसे उम्मीदवार की कमी नहीं थी, जो कांग्रेस में सहजता से सेंध लगा सकता था।
उत्तर प्रदेश में निषाद, केवट, मांझी और मल्लाह सहित सभी मछुआरा उप-जातियों की कुल आबादी राज्य की जनसंख्या का लगभग 4.5 से 9 प्रतिशत तक है। राज्य की करीब 160 विधानसभा सीटों पर सीधा प्रभाव डालता है।
आधिकारिक तौर पर जातिवार जनगणना न होने के कारण अनुमान भिन्न-भिन्न हैं। केवल निषाद समुदाय की मूल आबादी लगभग 4.5% है, लेकिन केवट, मल्लाह, मांझी, बिंद, कश्यप और कहार जैसी सभी मछुआरा और अति-पिछड़ी उप-जातियों को मिलाने पर इनकी संयुक्त आबादी लगभग 9 से 13 प्रतिशत तक आंकी जाती है। इस समुदाय का वोट प्रतिशत कुल ओबीसी आबादी का लगभग 18 प्रतिशत तक है।
राज्य के पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों की लगभग 150-160 विधानसभा सीटों पर इनका दबदबा है। यह समुदाय गोरखपुर, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, मऊ और प्रयागराज जैसे जिलों में विशेष रूप से केंद्रित है।
अब ये समीकरण व ये ही केवट कांग्रेस के लिए मुसीबत बन गए हैं। हालांकि पार्टी अपनी प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में मुस्तैदी से डट गई हैं। पार्टी के सभी गुट व क्षत्रप नेता जीत के प्रति एकजुट हो गए हैं।
पार्टी सुप्रीमो राहुल गांधी के कारण ये एकता हुई है। कोई भी नेता अपने आलाकमान के खिलाफ जाता अब नजर नहीं आ रहा है। बावजूद इसके भाजपा को भरोसा है कि वह कांग्रेस विधायकों से क्रॉस वोटिंग करवा लेगी।
कमलदल की नजरें कम से कम 10 व ज्यादा में 15 विधायकों पर टिकी हुई हैं। इसी डर से कांग्रेस भी चौकन्ना हो गई है। पार्टी ने अपने विधायकों की न सिर्फ निगरानी बढ़ा दी, बल्कि उनकी पलाबंदी भी शुरू कर दी है।
भाजपा के प्रलोभन से बचाने के लिए कांग्रेस अपने विधायकों को एमपी से कर्नाटक शिफ्ट भी कर रही है। बताते हैं कि आज दोपहर विमान के जरिये विधायक बैंगलुरू पहुंचा दिए जाएंगे।
5-5 करोड़ का ऑफर, ये ही नारी शक्ति वंदन..?- कांग्रेस
कांग्रेस के बड़े नेता कांतिलाल भूरिया ने तो भाजपा पर खरीद-फरोख्त का आरोप भी जड़ दिया। भूरिया के मुताबिक भाजपा विधायकों को 5-5 करोड़ का ऑफर दे रही है, लेकिन कांग्रेस का सिपाही बिकाऊ नहीं है।
वहीं प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा को नारी शक्ति वंदन के नाम से घेरा है। उनका कहना है कि एक महिला नेता को नियम से परे जाकर राज्यसभा में जाने से रोकने की भाजपाई तैयारी बता रही है कि इस दल का नारी शक्ति के प्रति कितना सम्मान है।
गौरतलब है कि अगर भाजपा तीसरा उम्मीदवार सामने नहीं लाती तो मीनाक्षी की जीत सुनिश्चित थी। उनके पक्ष में तय 58 वोट से ज्यादा वोटर्स, यानी 63 विधायक थे, लेकिन कांग्रेस के इन्हीं 63 विधायको में से तोड़फोड़ के लिए भाजपाई खेमा प्राणपण से जुट गया है।
तीसरी सीट की जीत प्रदेश के मुख्यमंत्री के कद से जुड़ गई है। बावजूद इसके कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि 500 फीसदी मीनाक्षी नटराजन की जीत तय है।
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