प्रशासनिक आदेश ने बढ़ाई सियासी हलचल: सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष को हटाने के आदेश पर विवाद; मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रशासनिक आदेश ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। मध्यप्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया को पद से हटाने और सुविधाएं समाप्त करने के आदेश के बाद विवाद खड़ा हो गया है। खास बात यह है कि यह आदेश उसी विभाग से जारी हुआ है, जिसके मंत्री कैलाश विजयवर्गीय हैं।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से जुड़ा मामला
मामला नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से जुड़ा है, जहां से 13 अप्रैल 2026 को एक आदेश जारी कर प्रताप करोसिया का कार्यकाल समाप्त बताया गया। आदेश में उल्लेख किया गया कि उनकी नियुक्ति 15 अप्रैल 2023 से तीन वर्ष के लिए थी और 14 अप्रैल 2026 को यह अवधि पूरी हो गई, जिसके बाद उन्हें दी जा रही सभी शासकीय सुविधाएं स्वतः समाप्त मानी जाएं।
करोसिया ने बताया गलत
हालांकि, करोसिया इस आदेश को पूरी तरह गलत और अवैध बता रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति आदेश में स्पष्ट रूप से “अगले आदेश तक” लिखी गई थी, न कि किसी निश्चित तीन वर्षीय अवधि के लिए। ऐसे में विभाग द्वारा एकतरफा कार्यकाल समाप्त घोषित करना नियमों के विपरीत है।
कांग्रेस नहीं, भाजपा के भीतर ही विवाद
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि करोसिया खुद भाजपा से जुड़े नेता हैं। ऐसे में भाजपा के ही एक नेता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर दिए हैं।
सचिव के अधिकार पर भी सवाल
करोसिया ने आदेश जारी करने वाली आयोग की सचिव बबीता मरकाम की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सचिव को इस प्रकार का आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। साथ ही जिस 2008 के नियम का हवाला दिया गया है, वह बाद में 2017 में संशोधित हो चुका है, इसलिए उस आधार पर कार्रवाई करना गलत है।
मुख्यमंत्री को पत्र, कोर्ट पहुंचे करोसिया
प्रताप करोसिया ने पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजी है। उन्होंने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि बिना शासन स्तर की मंजूरी के यह आदेश जारी किया गया, जो न सिर्फ नियमों के खिलाफ है बल्कि सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने आदेश को कोर्ट में चुनौती देते हुए स्टे भी प्राप्त कर लिया है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
राजनीतिक अटकलें तेज
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह सवाल उठ रहा है कि जब विभाग के मंत्री खुद इंदौर से हैं, तो उनके ही क्षेत्र के एक भाजपा नेता के साथ ऐसा निर्णय कैसे हो गया। कुछ नेताओं का मानना है कि इसके पीछे राजनीतिक या संगठनात्मक कारण हो सकते हैं, हालांकि आधिकारिक रूप से इस पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। फिलहाल मामला प्रशासन और राजनीति दोनों स्तर पर उलझता नजर आ रहा है। अब सभी की नजर इस पर है कि मुख्यमंत्री स्तर पर इस विवाद का क्या समाधान निकलता है।
संबंधित समाचार

पीठासीन अधिकारी की जान बचाने वाले जवान सम्मानित:चुनाव ड्यूटी के दौरान आया था हार्ट अटैक

भारतीय किसान संघ ने बिजली की आपूर्ति को लेकर की चर्चा:विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक से की भेंट

व्यापारियों का विवाद बना जानलेवा:मारपीट के बाद बुजुर्ग व्यापारी की मौत; मारे थे लात-घूंसे

लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन करके कर्मचारियों को बिंदी-टीका लगाया:हिंदू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!