ई-अटेंडेंस ऐप पर हाजिरी लगाना बना चुनौती: सिग्नल की तलाश में छत और पेड़ों पर चढ़ने को मजबूर शिक्षक
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लागू ई-अटेंडेंस व्यवस्था अब उन इलाकों में शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बनती दिखाई दे रही है, जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है।
छतों और पेड़ों तक का सहारा लेना पड़ रहा
ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करने के लिए शिक्षकों को स्कूल की छतों और पेड़ों तक का सहारा लेना पड़ रहा है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इस वजह से लिया गया फैसला
ई-अटेंडेंस को सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी कमजोर होने के कारण इसका व्यावहारिक इस्तेमाल चुनौती बन गया है।
कहीं छत तो कहीं पेड़ बना 'सिग्नल टावर'
नेटवर्क पकड़ने के लिए शिक्षक स्कूल की छत पर मोबाइल लेकर खड़े या बैठे दिखाई दे रहे हैं। कुछ जगहों पर बेहतर सिग्नल की तलाश में उन्हें पेड़ों की शाखाओं तक पहुंचना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में शिक्षक मोबाइल को हाथ में लेकर ऊंचाई पर सिग्नल तलाशते नजर आ रहे हैं।
उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करते दुखे शिक्षक
आगर मालवा जिले के बड़ौद क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल का ऐसा ही वीडियो सामने आया है। इसमें एक गणित शिक्षक ऊंचाई पर जाकर मोबाइल से अपनी उपस्थिति दर्ज करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। किसी ने इसे डिजिटल व्यवस्था की विडंबना बताया तो किसी ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि सिग्नल जाने से पहले शिक्षक शायद 'X' का मान निकाल रहे हैं।
शिक्षक संघों ने उठाए व्यवस्था पर सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद शिक्षक संगठनों ने भी नेटवर्क समस्या को गंभीरता से लेने की मांग की है। उनका कहना है कि ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है, जब स्कूलों में पर्याप्त इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध हो।
नेटवर्क नहीं होने की स्थिति में शिक्षकों को वैकल्पिक व्यवस्था या ऑफलाइन अटेंडेंस की सुविधा मिलनी चाहिए।
डिजिटल हाजिरी बनाम जमीनी हकीकत
ई-अटेंडेंस का उद्देश्य स्कूलों में जवाबदेही बढ़ाना है, लेकिन नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में यही व्यवस्था शिक्षकों के लिए जोखिम और परेशानी का कारण बन रही है। ऐसे में सवाल यह है कि डिजिटल उपस्थिति लागू करने से पहले क्या सभी सरकारी स्कूलों में जरूरी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सुनिश्चित किया गया है?
शिक्षकों का कहना है कि हाजिरी के लिए उन्हें छत या पेड़ पर चढ़ने के बजाय ऐसी तकनीकी व्यवस्था मिलनी चाहिए, जो स्कूल परिसर में ही आसानी से काम करे।
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