चार्ज से पहले टैक्स चोर ने फिर चला दांव, सुनवाई टली: किशोर, नितेश व पंकज की कोशिशें जारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

कोर्ट में दोबारा बहस होगी, कानूनी खेल करके अपने गुनाहों को छिपा रहा वाधवानी
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
टैक्स चोर किशोर वाधवानी के गुटखा कारोबार, फर्जी अखबारी सर्कुलेशन और करोड़ों रुपए की कथित मनी लांड्रिंग से जुड़े मामले में अब कानूनी लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। विशेष अदालत में आरोप तय होने से पहले एक बार फिर बहस होगी।
गुटखा माफिया किशोर, उसके भतीजा नितेश वाधवानी और गुर्गे पंकज मजेपुरिया की ओर से आरोपों को खारिज करने के लिए दिए गए आवेदन पर अदालत ने दोबारा सुनवाई का मौका दिया है।
सोमवार को हुई सुनवाई में आरोपी पक्ष के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि मामले में आरोप तय करने से पहले उन्हें अपने पक्ष में विस्तृत बहस का एक और अवसर दिया जाए। वकील ने दलील दी कि केस के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर पूरी तरह से बहस नहीं हो पाई।
अदालत ने इस आग्रह पर विचार करते हुए मामले में पुनः बहस की अनुमति दे दी है। अब अगली सुनवाई में इस आवेदन और आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तार से कानूनी तर्क रखे जाएंगे। यह सुनवाई तय करेगी कि तीनों आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप कायम रहेंगे या उनमें कोई राहत मिलती है।
2002 करोड़ का टैक्स नोटिस: इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब सेंट्रल जीएसटी और एक्साइज कमिश्नरेट ने करीब 2002 करोड़ रुपए की टैक्स डिमांड का नोटिस जारी किया। यह कार्रवाई प्रदेश की सबसे बड़ी टैक्स कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
अदालत में क्या होगा अब?
अगली सुनवाई में मुख्य रूप से दो मुद्दों पर फोकस रहेगा। क्या आरोपी पक्ष द्वारा लगाए गए तर्क इतने मजबूत हैं कि आरोपों को खारिज किया जा सके? या फिर जांच एजेंसियों के पास मौजूद साक्ष्य आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं? दोनों पक्षों के बीच होने वाली यह बहस इस केस के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
चार्ज तय होने से पहले ही आरोप कमजोर करने की कोशिश
मामला फिलहाल उस अहम चरण में है, जहां अदालत यह तय करने की प्रक्रिया में है कि आरोपों को औपचारिक रूप से फ्रेम किया जाए या नहीं। ऐसे में आरोपियों की ओर से बार-बार आवेदन देना इस बात की ओर इशारा करता है कि वे चार्ज तय होने से पहले ही अपने खिलाफ लगे आरोपों को कमजोर करने की कोशिश में हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस स्तर पर दोबारा बहस की मांग करना एक अहम रणनीतिक कदम हो सकता है। इससे न केवल बचाव पक्ष को अपने तर्कों को और मजबूत तरीके से रखने का मौका मिलता है, बल्कि केस की दिशा पर भी असर पड़ सकता है।
यह है पूरा मामला
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह मामला एक बड़े आर्थिक नेटवर्क से जुड़ा है, जिसमें गुटखा कारोबार से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए अखबार के सर्कुलेशन और विज्ञापन के आंकड़ों का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया। आरोप है कि दबंग दुनिया अखबार के जरिये कागजों में सर्कुलेशन को कई गुना बढ़ाकर दिखाया गया। जहां वास्तविक बिक्री 5 से 8 हजार प्रतियां प्रतिदिन बताई जाती हैं, वहीं दस्तावेजों में इसे 60 हजार से 1 लाख प्रति तक दर्शाया गया।
फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपए की आय कागजों में दर्शाई गई
जांच में यह भी सामने आया कि कई ऐसे विज्ञापन दिखाए गए, जो वास्तविकता में प्रकाशित ही नहीं हुए थे। इन विज्ञापनों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपए की आय कागजों में दर्शाई गई। एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा सिस्टम कथित रूप से कालेधन को वैध बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के अनुसार 2017-18 से 2019-20 के बीच करीब 11.66 करोड़ रुपए की मनी लांड्रिंग का मामला सामने आया है। इस दौरान अखबार की करीब 2.80 करोड़ प्रतियों की बिक्री दिखाकर आय को वैध दर्शाया गया।
अब अदालत में आगे क्या?
अदालत द्वारा दोबारा बहस की अनुमति दिए जाने के बाद अब यह मामला और दिलचस्प हो गया है। अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने तर्कों को मजबूती से रखेंगे। अगर अदालत आरोपों को खारिज नहीं करती है, तो इसके बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से चार्ज तय किए जा सकते हैं और मामला ट्रायल की ओर बढ़ जाएगा।
सोमवार की सुनवाई के बाद यह साफ है कि आरोपी पक्ष अभी भी आरोप तय होने से पहले हरसंभव कानूनी विकल्प आजमा रहा है। अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि तीनों आरोपियों को राहत मिलती है या मामला और सख्त कानूनी दौर में प्रवेश करता है।
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