इंदौर का नाप नहीं ले पा रहे टेलर: बाज नहीं आ रही भाजपाई गुटबाजी
KHULASA FIRST
संवाददाता

बार-बार टल रहा भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर का शहर का दौरा
ऐसा पहली बार जब मोर्चा अध्यक्ष ताजपोशी के बाद चाहकर भी नहीं आ पा रहे इंदौर, हास्यास्पद स्थिति
शहर भाजपा में पसरी भारी गुटबाजी बार-बार थाम रही यूथ विंग अध्यक्ष के कदम, अब तक न हो पाया स्वागत-सत्कार
टेलर ने जब भी इंदौर आना चाहा, चुगलखोर नेताओं ने प्रदेश संगठन के कान भर रुकवा दिया आगमन
मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन व मोर्चा नगर अध्यक्ष की होने वाली ताजपोशी पर खिंची हैं तलवारें
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वे पेशे से ही नहीं, बिरादरी से भी टेलर ही हैं। अच्छे से जानते हैं कि देह पर फिट होने वाला परिधान कैसे तैयार होता है। फिर मामला लौकिक देह का हो या पार्टी-संगठन की आत्मा का। वे संगठन की आत्मा का परिवेश सलीके से तैयार करना चाहते हैं। इसके लिए सबसे पहली जरूरत उस ‘नाप’ की है, जिसके दम पर फिटिंग का ‘वागा’ तैयार हो सके।
इसके लिए टेलर के पारखी हाथ ही नहीं, नजर का भी कमाल होता है। जब तक उस देह को नजर में उतार लिया न जाए, जो संगठन की आत्मा से जुड़ने की जिद में है। उसका वेश-परिवेश संगठन की आत्मा के अनुरूप गढ़ने के लिए नाप तो जरूरी है न? लेकिन टेलर नाप ले ही नहीं पा रहे हैं। या यूं कहें कि उन्हें नाप लेने ही नहीं दिया जा रहा।
वे नाप लेना चाहते हैं कि संगठन की वर्दी में कौन फिट होगा? डीलडौल के हिसाब से भी और नापतौल के लिहाज से भी। इसी नापतौल के जरिये उन लोगों का वजन भी तो तौलना है, जो वर्दी सिलवाने को आतुर हैं, लालायित हैं।
लेकिन ‘घर के झगड़े’ हैं कि टेलर को नाप लेने ही नहीं दे रहे। न हाथों से, न आंखों से। बड़े नेताओं में झगड़े हैं, बड़े नेता ही अड़े हैं। नतीजतन नए परिधान के साथ टेलर के अगल-बगल में खड़े होने को लालायित तरुणाई फिलहाल मुरझाई हुई है।
भा जपा की यूथ विंग, यानी भाजयुमो के नए-नवेले प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर अब जूने होते जा रहे हैं, लेकिन इंदौरी नहीं आ पा रहे। उनकी ताजपोशी को महीनों बीत गए, लेकिन वे चाहकर भी इंदौर नहीं आ पा रहे। ऐसा पहली मर्तबा हो रहा है कि कमलदल की जोश-खरोश वाली विंग को लेकर अहिल्या नगरी में अब तक कहीं कोई स्वागत-सत्कार, रैली, जुलूस-जलसा नहीं हुआ।
अन्यथा हर बार रिकॉर्ड रहा है कि इधर भोपाल में भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष तय हुआ, उधर उसका इंदौर का दौरा तय हुआ। इस बार भी ये ही उम्मीदें थीं। मामला बगल के जिले शाजापुर से ही होने से उम्मीदें परवान पर थीं।
टेलर शाजापुर जिले के ही बाशिंदे हैं और इंदौर से आवाजाही का नाता वैसे ही रूटीन का था, जैसा मालवा के इस कस्बे के लोगों का बना रहता है, लेकिन टेलर ने राजनीतिक कद क्या पाया, इंदौर आगमन को ही तरस गए। या यूं कहें कि तरसा दिए गए।
जब भी उनके इंदौर आने की खबर चलती, पार्टी के खबरनवीस यानी ‘हरिराम' सक्रिय हो जाते। पार्टी प्रदेश संगठन के समक्ष इंदौर दौरे के गुणदोष गिनाए-जंचाए जाते। कभी भागीरथपुरा जलकांड को लेकर कान फूंक दिए जाते कि अभी समय ठीक नहीं तो कभी कोई संगठन बैठक का हवाला देकर श्याम टेलर के कदम थाम दिए जाते।
टेलर का ताजा दौरा शहीद दिवस के दिन मुकर्रर हुआ था। शहर के पश्चिमी हिस्से से निकलने वाली मशाल रैली में वे शिरकत करने वाले थे। दौरा लगभग तय था। आयोजन की कमान महापौर के हाथों में थी।
सब कुछ अपडेट भी था, लेकिन ऐनवक्त पर टेलर का दौरा निरस्त हो गया। अब टेलर पहली बार इंदौर आएं और उन्हें मेयर ले आएं..! कैसे हजम होना है? लिहाजा फिर ‘हरिराम’ सक्रिय हुए और दौरा टल गया।
कड़क अनुशासन व दूसरे दलों से हटकर होने व रहने का दावा करने वाली भाजपा में ये सब हो रहा है कि यूथ विंग का प्रदेश अध्यक्ष केवल इसलिए एक शहर का दौरा नहीं कर पा रहा है कि उस शहर के बड़े नेताओं में इसे लेकर श्रेय-पेय का संघर्ष छिड़ा हुआ है। टेलर किसकी सदारत में प्रदेश की राजनीतिक राजधानी इंदौर आते हैं, लड़ाई इस बात पर ही छिड़ी हुई है।
इस लड़ाई को खत्म करने की जगह इंदौर की राजनीति से प्रदेश की सियासत में पहुंचे नेताओं ने इसमें आग में घी डालने का काम किया और टेलर की राह में सुनहरे धागे बिछाने की जगह तीखी-नुकीली सूइयां बिछाने का ही काम किया है।
जिन पर अपने कृतित्व व व्यक्तित्व से संगठन के अनुशासन व गरिमा को कायम रखने की बड़ी जवाबदेही हैं, वे नेता ही महज एक शहर तक अपनी राजनीतिक उड़ान व सोच को अब तक सीमित किए हुए हैं।
भले ही इसका खामियाजा पार्टी के युवा जोश को ठंडा करने से जुड़ा हो, लेकिन गुटबाजी खत्म न हो रही।
छोटा बच्चा जानकर हमको ना समझाना...!
श्याम टेलर प्रदेश के सबसे युवा मोर्चा अध्यक्ष हैं। वे अभी महज 28 बरस के हैं, लेकिन संगठन की रीति-नीति में गहरे से रचे-बसे हैं। यूं ही नहीं पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा किया, जबकि इस पद की दौड़ में कई नामचीन नेता आगे थे। हालांकि भाजपा नेतृत्व ने एक लो-प्रोफाइल, लेकिन हार्ड-लाइनर युवा नेता को कमान दी।
टेलर का नाता एक ऐसे परिवार से है, जहां संगठन के कामकाज की घुट्टी घर से ही पिलाई गई है। पिता मातृसंस्था से जुड़ी भगवा वाहिनी का कामकाज देखते रहे हैं। वह भी उस दौर में, जब इसी दौर में मौजूदा मुख्यमंत्री उज्जैन में इसी स्तर पर समकक्ष दायित्व पर भगवा वाहिनी को संभाल रहे थे।
श्याम तरुण अवस्था से न सिर्फ मातृसंस्था, बल्कि पार्टी संगठन के नियम-कायदों के बीच रहे हैं। ऐसे में जो बड़े नेता ये सोच रहे हैं कि हम मोर्चा अध्यक्ष को अपने अनुरूप ढाल लेंगे और अपने हिसाब से दावेदारों के नाप नपवा लेंगे, वे भूल कर रहे हैं। मोर्चा अध्यक्ष भी इंदौर को लेकर बार-बार रोकी जा रही राह के पीछे के मंतव्य से अनभिज्ञ नहीं।
इंदौर में उनके भी ‘आंख-कान-नाक’ आज से नहीं, पुराने समय से मौजूद हैं। लड़ाई प्रदेश में मोर्चा की बनने वाली कार्यकारणी से जुड़ी हुई है और उसके बाद मोर्चा नगर अध्यक्ष का झगड़ा है। गुटबाजी में उलझी इंदौर भाजपा में नगर अध्यक्ष बनना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
लिहाजा अभी लड़ाई मोर्चा की प्रदेश कार्यकारणी से जुड़ी है, जिसमें जमीन के धंधों से जुड़े नेता से लेकर ताजा-ताजा ‘संघी’ हुए कुछ युवा नेताओं के साथ एक-दो ‘भगिनियों' की भी नियुक्ति की चौसर बिछी हुई है।
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