पॉक्सो पीड़ित बच्चों के पुनर्वास पर सिस्टम अलर्ट: अब लापरवाही नहीं चलेगी; पुलिस डीएलएसए-सीडब्ल्यूसी आए एक मंच पर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पॉक्सो पीडि़त बच्चों के पुनर्वास को लेकर सिस्टम अब सख्त मोड में दिख रहा है। इंदौर में आयोजित एक अहम कार्यशाला में साफ संकेत दे दिए गए कि अब किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने संयुक्त रूप से यह तय किया कि पीडि़त बच्चों के साथ संवेदनशीलता और जवाबदेही दोनों अनिवार्य होंगी।
16 अप्रैल 2026 को बाल कल्याण समिति इंदौर और ग्रामीण पुलिस इंदौर के मार्गदर्शन में, आरंभ संस्था के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में सिस्टम की कमजोर कड़ियों पर खुलकर चर्चा हुई और उन्हें मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया गया।
कार्यशाला में ग्रामीण एसपी यांगचेन भूटिया, डएलएसए सचिव शिवराज सिंह गवली, सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष धर्मेंद्र पंड्या, एडीपीओ अजय प्रताप सिंह और शिवभान सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
कायक्रम की शुरुआत में आरंभ संस्था की डायरेक्टर अर्चना सहाय ने विक्टिम सपोर्ट इनिशिएटिव प्रोजेक्ट का खाका रखते हुए साफ किया कि अब हर केस में समन्वय ही सबसे बड़ा हथियार होगा।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष धर्मेंद्र पंड्या ने दो टूक कहा कि हर पॉक्सो केस में सपोर्ट पर्सन की नियुक्ति अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने पुलिस को सीधे तौर पर यह जिम्मेदारी लेने के लिए कहा कि बिना देरी के सपोर्ट पर्सन की मांग की जाए, ताकि बच्चे अकेले सिस्टम का सामना न करें।
पुलिस अधीक्षक यांगचेन भूटिया ने भी सख्त संदेश दिया कि पॉक्सो मामलों में संवेदनशीलता सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि हर कार्रवाई में दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका सिर्फ जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पीडि़त के पुनर्वास तक उसकी जिम्मेदारी बनी रहती है।
डीएलएसए सचिव शिवराज सिंह गवली ने मुआवजा, नि:शुल्क कानूनी सहायता और दस्तावेजी सहयोग जैसी सुविधाओं पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में पीडि़त अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं जिसे अब खत्म करना होगा।
एडीपीओ ने कोर्ट में आने वाली व्यवहारिक दिक्कतों पर खुलकर चर्चा की और पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए, ताकि केस कमजोर न पड़ें। कार्यक्रम के अंत में आरंभ संस्था की टीम का परिचय अधिकारियों से कराया गया, ताकि जरूरत पडऩे पर तुरंत सपोर्ट पसज़्न की मदद ली जा सके।
सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में भरोसा दिलाया कि अब पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के साथ न केवल संवेदनशील व्यवहार होगा, बल्कि पुनर्वास की हर संभव व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कार्यशाला में ग्रामीण पुलिस के डीएसपी, टीआई, एसआई, एएसआई, हेड कांस्टेबल और बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी रही।
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