मुफ्त योजनाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: कई राज्यों की बढ़ी टेंशन; लाड़ली बहना जैसी स्कीम पर उठे सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मुफ्तखोरी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों ने देशभर की राजनीतिक पार्टियों और राज्य सरकारों की चिंता बढ़ा दी है।
बड़े पैमाने पर चल रही योजनाएं
खासकर उन राज्यों में हलचल तेज है, जहां नकद हस्तांतरण और मुफ्त सुविधाओं वाली योजनाएं बड़े पैमाने पर चल रही हैं। मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना भी इसी बहस के केंद्र में आ गई है।
कोर्ट ने की ये टिप्पणी
तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मुफ्त उपहारों और नकद लाभ योजनाओं पर तीखे सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं आर्थिक विकास और कार्य-संस्कृति के लिए दीर्घकाल में नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।
राजस्व घाटे वाले राज्य खर्च कैसे उठाएंगे?
पीठ ने सीधा सवाल किया कि जो राज्य पहले से राजस्व घाटे से जूझ रहे हैं, वे मुफ्त बिजली, नकद ट्रांसफर और रियायती योजनाओं का बोझ कैसे संभालेंगे? उदाहरण देते हुए बताया गया कि कर्नाटक में नकद हस्तांतरण योजनाओं पर करीब 28 हजार करोड़ रुपए, जबकि महाराष्ट्र में लगभग 46 हजार करोड़ रुपए सालाना खर्च हो रहे हैं। मध्य प्रदेश भी इस सूची में पीछे नहीं है।
मध्य प्रदेश पर बढ़ता वित्तीय दबाव
वित्तीय वर्ष 2026-27 में मध्य प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया है, जो राज्य के कुल बजट का करीब 7% है। इसके अलावा किसानों की सब्सिडी, लगभग 2 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, रियायती बिजली और गैस सिलेंडर जैसी योजनाओं पर भी भारी रकम खर्च हो रही है।
कई योजनाएं, एक ही खजाना
लाड़ली बहना के अलावा राज्य में साइकिल, स्कूटी, लैपटॉप, कन्यादान, साड़ी-जूते, और रसोई गैस सब्सिडी जैसी योजनाएं चल रही हैं। अकेले रियायती गैस सिलेंडर पर ही करीब 800 करोड़ रुपए का सालाना बोझ बताया जा रहा है। बिजली कंपनियों को मुफ्त और रियायती बिजली के बदले दिए जा रहे अनुदान से भी करीब 25 हजार करोड़ रुपए का दबाव है।
सालाना 52 हजार करोड़ का खर्च
कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में ऐसी योजनाओं पर करीब 52 हजार करोड़ रुपए सालाना खर्च हो रहे हैं, जबकि राज्य का कुल बजट 4.38 लाख करोड़ रुपये है। विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुई लाड़ली बहना योजना में राशि पहले 1000 रुपए, फिर 1250 रुपए और अब 1500 रुपए प्रतिमाह तक बढ़ाई जा चुकी है।
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