अपने ही मंत्रालय से मिली सब्सिडी: प्रोजेक्ट पर उठे हितों के टकराव के सवाल; मंत्री बोले- नियमों के तहत लिया लाभ
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जयपुर।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय के अधीन संचालित राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएसबी) की योजना के तहत 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हितों के टकराव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
99.03 लाख रुपये की कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी
डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव स्थित मंत्री के फार्महाउस पर हाईटेक खीरा उत्पादन परियोजना के लिए करीब 1.99 करोड़ रुपये की लागत का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ, जिस पर 99.03 लाख रुपये की कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी दी गई। यह सहायता राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएसबी) की मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) योजना के तहत प्रदान की गई।
मंत्री जिस बोर्ड के उपाध्यक्ष, उसी की योजना से मिला लाभ
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के निदेशक मंडल के पदेन अध्यक्ष केंद्रीय कृषि मंत्री होते हैं, जबकि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं। हालांकि, नियमों के अनुसार व्यक्तिगत परियोजनाओं की अंतिम स्वीकृति प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी देती है, जिसमें बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 11 मार्च 2026 को परियोजना को अंतिम मंजूरी मिली और 30 मार्च 2026 को सब्सिडी की राशि मंत्री के बैंक ऋण खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
चार पॉलीहाउस और आधुनिक खेती
पीह गांव स्थित मंत्री के फार्महाउस में चार बड़े पॉलीहाउस, जल संरक्षण के लिए फार्म पूल और आधुनिक बागवानी संरचनाएं विकसित की गई हैं। परिसर में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सहायता प्राप्त होने का बोर्ड भी लगाया गया है।
पहले भी किया था आवेदन
रिकॉर्ड बताते हैं कि भागीरथ चौधरी ने वर्ष 2018 में भी इसी योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन दस्तावेज समय पर जमा नहीं होने के कारण आवेदन निरस्त हो गया था। उसी वर्ष उनके बेटे का आवेदन भी तकनीकी कारणों से अस्वीकृत कर दिया गया था।
मंत्री ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि उन्होंने एक किसान के रूप में पूरी तरह नियमों का पालन करते हुए योजना का लाभ लिया है। उनका कहना है कि परियोजना बैंक ऋण और स्वयं के निवेश से विकसित की गई है तथा पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही। उन्होंने कहा कि फार्म पर सूचना बोर्ड भी लगाया गया है ताकि दूसरे किसान आधुनिक खेती के लिए प्रेरित हो सकें।
आईएएस नरेशपाल गंगवार के परिवार को भी मिला लाभ
इसी जांच में राजस्थान कैडर के 1994 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेशपाल गंगवार के परिवार को भी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में करीब 1.16 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिलने का मामला सामने आया है।
मां बिंदुमती को खीरे की खेती के लिए 46.03 लाख रुपये, बेटे कुमार ऋत्विक को 46.49 लाख रुपये, पत्नी डॉ. रंजीता सिंह को 24.36 लाख रुपये की सब्सिडी मिली।
गंगवार का पक्ष
नरेशपाल गंगवार ने कहा कि उनकी मां और बेटा उन पर आर्थिक रूप से आश्रित नहीं हैं, इसलिए अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के तहत उनकी संपत्ति या योजनाओं का उल्लेख वार्षिक संपत्ति विवरण में करना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाएं नियमों के अनुरूप स्वीकृत हुई हैं।
क्या है एनएचबी की योजना?
राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा संचालित एमआईडीएच योजना के तहत हाईटेक बागवानी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाता है। इसमें शिमला मिर्च, टमाटर, खीरा सहित कई फूलों की व्यावसायिक खेती के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम एक करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। योजना का लाभ किसान, एफपीओ, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियां, कंपनियां और अन्य पात्र संस्थाएं ले सकती हैं।
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