सड़कों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त: 129 में से सिर्फ 62 सड़कें चलने लायक; 24 पूरी तरह खराब, निर्माण खर्च का मांगा हिसाब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, ग्वालियर।
शहर की खस्ताहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगल पीठ ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट में पेश रिपोर्ट में सामने आया कि शहर की 129 प्रमुख सड़कों में से सिर्फ 62 सड़कें ही चलने लायक हैं, जबकि 24 सड़कें पूरी तरह खराब स्थिति में हैं। सड़कों की गुणवत्ता और निर्माण कार्य में संभावित अनियमितताओं को लेकर कोर्ट ने नगर निगम से विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।
जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगल पीठ ने नगर निगम प्रशासन को पांच अहम बिंदुओं पर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सड़क निर्माण में गड़बड़ी और न्यायालय को गुमराह करने की कोशिश के आरोपों को गंभीरता से लिया है।
पांच साल में सड़क निर्माण पर कितना खर्च, मांगा पूरा ब्यौरा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता से पूछा कि पिछले पांच वर्षों में सड़क निर्माण पर नगर निगम ने कितना पैसा खर्च किया। कोर्ट ने इस खर्च का पूरा विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही सड़क निर्माण के दौरान तैयार की गई मेजरमेंट बुक और अन्य मूल दस्तावेज भी न्यायालय में पेश करने को कहा गया है। इन दस्तावेजों के जरिए निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज काम का मिलान किया जाएगा।
सड़कों की खुदाई कर जांच करेगी स्वतंत्र तकनीकी टीम
सड़कों की वास्तविक गुणवत्ता की जांच के लिए हाईकोर्ट एडवोकेट कमिश्नर की अध्यक्षता में स्वतंत्र कमीशन गठित करेगा। इसके साथ तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी रहेगी।
यह टीम शहर की चिन्हित सड़कों की खुदाई कर यह जांच करेगी कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों के मुताबिक सामग्री और तय मोटाई का इस्तेमाल हुआ है या नहीं। इससे यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं सड़क निर्माण में कागजी खानापूर्ति तो नहीं की गई।
129 सड़कों की रिपोर्ट ने खोली व्यवस्था की पोल
मामला याचिकाकर्ता कैलाश चंद्र अग्रवाल की ओर से चेतकपुरी की खराब सड़क को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने कोर्ट को बताया कि शहर की बड़ी संख्या में सड़कें बदहाल हैं और आम लोगों को धूल, गड्ढों और खराब मार्गों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम ने जब शहर की 129 प्रमुख सड़कों की स्थिति रिपोर्ट पेश की, तो स्थिति चिंताजनक सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार केवल 62 सड़कें ही आवागमन के लिहाज से ठीक स्थिति में हैं, जबकि कई सड़कें खराब हैं और 24 सड़कें पूरी तरह अनुपयोगी बताई गई हैं।
अधिकारियों को तत्काल कोर्ट में किया गया तलब
सड़कों की स्थिति से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया। सुनवाई के दौरान नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।
अब कोर्ट की ओर से स्वतंत्र तकनीकी जांच और सड़क निर्माण पर हुए खर्च का रिकॉर्ड तलब किए जाने के बाद नगर निगम के पुराने सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल और गहरा गए हैं। जांच के बाद यदि निर्माण में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।
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