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दर्दनाक हादसे के बाद सख्ती: इतने दिनों में इतने भवनों की हुई जांच; चौंकाने वाला खुलासा, इतनी इमारतों में फायर सेफ्टी नहीं

KHULASA FIRST

संवाददाता

06 अप्रैल 2026, 12:13 pm
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दर्दनाक हादसे के बाद सख्ती

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
ब्रजेश्वरी एनेक्स हादसे के बाद नगर निगम ने शहर की बहुमंजिला इमारतों में फायर सेफ्टी को लेकर सख्त अभियान शुरू कर दिया है। बीते 10 दिनों में निगम की टीम 330 इमारतों का निरीक्षण कर चुकी है, जिसमें चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। जांच में 60 इमारतों में फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं मिली, जबकि 28 इमारतों में लगाए गए उपकरण खराब या निष्क्रिय पाए गए।

व्यापक जांच के निर्देश
नगर निगम ने शहर के सभी 22 जोन के भवन अधिकारियों को फायर एनओसी और सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान अभी शुरुआती चरण में है और आगे बड़े पैमाने पर कार्रवाई होगी।

चार महीने चलेगा अभियान, 12 हजार इमारतें जांच के दायरे में
नगर निगम के मुताबिक, शहर में करीब 12 हजार बहुमंजिला और व्यावसायिक इमारतें हैं, जिनकी जांच की जानी है। यह अभियान पूरे गर्मी सीजन में करीब चार महीने तक चलाया जाएगा।

15 दिन के भीतर सुधार करने के निर्देश
जिन इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था अधूरी, अनुपस्थित या खराब पाई गई है, उन्हें 15 दिन के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। तय समय सीमा में सुधार नहीं होने पर संबंधित इमारतों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी।

फायर सेफ्टी के लिए तीन स्तर की अनुमति जरूरी
शहर में अब फायर एनओसी स्थानीय स्तर पर नगर निगम द्वारा जारी की जाती है। वर्ष 2022 से पहले यह प्रक्रिया भोपाल से संचालित होती थी। फायर सेफ्टी के लिए तीन चरण अनिवार्य हैं: फायर प्लान अप्रूवल: भवन निर्माण से पहले स्वीकृति, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट: सिस्टम इंस्टॉल होने के बाद और एनओसी रिन्यूअल: हर तीन साल में अनिवार्य। वर्तमान में निगम यह भी जांच कर रहा है कि किन इमारतों के मालिकों ने समय पर एनओसी का नवीनीकरण नहीं कराया है।

जांच में इन बिंदुओं पर फोकस
निरीक्षण के दौरान निगम टीम निम्न व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच कर रही है: फायर एनओसी की वैधता, फायर एक्सटिंग्विशर और अन्य उपकरणों की स्थिति, इमरजेंसी एग्जिट और निकासी मार्ग और हर फ्लोर पर स्मोक डिटेक्टर और फायर अलार्म सिस्टम।

मॉक ड्रिल से लोगों को दी जा रही ट्रेनिंग
गर्मी के मौसम में बढ़ते अग्नि जोखिम को देखते हुए नगर निगम की फायर टीम शहर में मॉक ड्रिल अभियान भी चला रही है। कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर व्यावसायिक, शैक्षणिक और सार्वजनिक संस्थानों में आग से बचाव और सुरक्षित निकासी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

यह भी सिखा रहे
लोगों को यह भी सिखाया जा रहा है: आग लगने पर तुरंत 101 पर सूचना दें, घबराएं नहीं, व्यवस्थित तरीके से लोगों को बाहर निकालें, धुएं से बचने के लिए झुककर चलें, लिफ्ट का उपयोग न करें, सीढ़ियों का इस्तेमाल करें और बिजली और गैस कनेक्शन तुरंत बंद करें।

संकरी गलियों के लिए फायर रोबोट की मदद
इंदौर के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में करीब 60% जगहों पर गलियां संकरी हैं, जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पातीं। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने फायर रोबोट खरीदे हैं। हालांकि, निगम के पास पहले से मौजूद ‘फायर बुलेट’ वाहन सीमित परिस्थितियों में ही कारगर साबित हो रहा है, खासकर भीषण आग की घटनाओं में।

अस्पतालों पर भी सख्ती
50 बेड से अधिक क्षमता वाले अस्पतालों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य कर दी गई है। जिन अस्पतालों के पास यह अनुमति नहीं है, उनके पंजीयन की प्रक्रिया रोक दी गई है।

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