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तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वालों के खिलाफ सख्त रुख: बोर्ड अध्यक्ष पवार बोले; 155 वर्ष पुरानी विरासत से खिलवाड़ अस्वीकार्य

KHULASA FIRST

संवाददाता

18 अप्रैल 2026, 4:22 pm
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तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने वालों के खिलाफ सख्त रुख

‘वॉइस ऑफ डीसी’...

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
डेली कॉलेज सोसायटी द्वारा कल आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष विक्रम सिंह पवार ने हाल के घटनाक्रमों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि देश की 155 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्था की छवि को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह केवल मतभेद का विषय नहीं है, बल्कि संस्थान की साख को कमजोर करने की एक संगठित कोशिश है। उन्होंने गचिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बिना तथ्यों को समझे, आधी-अधूरी और भ्रामक जानकारी के आधार पर संस्था को निशाना बनाया जा रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि आने वाले समय में संस्था की विश्वसनीयता, अनुशासन और स्थिरता के लिए भी हानिकारक सिद्ध हो सकती है।

उन्होंने कहा कि डेली कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के बारे में सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार का दुष्प्रचार करना केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि एक गौरवशाली शैक्षणिक विरासत पर प्रहार है।

संवाद के नाम पर दबाव की कोशिश
प्रेसीडेंट पवार ने 16 अप्रैल को हुई घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि विद्यालय प्रशासन ने संवाद के उद्देश्य से केवल पांच ओल्ड डेलियंस को आमंत्रित किया था, परंतु इसके विपरीत लगभग 25 से 30 लोगों का समूह विद्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्रित हो गया।

यह घटना उस समय हुई, जब विद्यालय में नियमित कक्षाएं चल रही थीं और साथ ही कक्षा 10 के बोर्ड परिणामों में ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव मनाया जा रहा था। ऐसे समय में हाथों में प्लेकार्ड लेकर एकत्रित होना यह स्पष्ट संकेत देता है कि उद्देश्य संवाद स्थापित करना नहीं, बल्कि दबाव बनाना, भ्रम की स्थिति पैदा करना और विद्यालय की सामान्य व्यवस्था को प्रभावित करना था।

उन्होंने कहा कि प्राचार्या ने परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंततः पांच प्रतिनिधियों को बुलाकर उनकी बात सुनी और उन्हें आश्वस्त किया कि उनके सभी बिंदु बोर्ड के समक्ष रखे जाएंगे। इसके बाद बोर्ड अध्यक्ष ने लगभग 20 प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर विस्तृत चर्चा का प्रस्ताव रखा, ताकि विषय का समाधान तथ्यों और संवाद के माध्यम से निकाला जा सके।

परंतु संबंधित पक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय यह कहा कि वे अपनी बात केवल ईओजीएम में ही रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज भी जब उन्हें अध्यक्ष और बोर्ड सदस्यों के साथ चर्चा के लिए बुलाया गया, तब भी वे नहीं आए। इससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि उनका उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ लेना, किसी भी तरह सत्ता प्राप्त करना और संस्था के भीतर असंतोष और भ्रम फैलाना है।

संविधान संशोधन: तथ्य स्पष्ट, भ्रम निराधार
संविधान संशोधन के विषय पर पवार ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर जानबूझकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1948 में बनाए गए मूल संविधान में यह प्रावधान था कि ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन का सचिव सीधे बोर्ड का हिस्सा होता था। बाद में वर्ष 1959 में इस व्यवस्था में बदलाव कर अन्य प्रतिनिधित्व जोड़ा गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रस्ताव का उद्देश्य उसी मूल भावना को पुनः स्थापित करना है, जिसमें ओडीए के अध्यक्ष और सचिव बोर्ड में शामिल होकर सीधे तौर पर ओल्ड डेलियंस के हितों का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि ओडीए के अध्यक्ष और सचिव, जिन्हें सभी ओल्ड डेलियन सदस्य चुनाव के माध्यम से चुनते हैं, वही बोर्ड में प्रतिनिधित्व करेंगे।

यदि किसी कारणवश वे इस जिम्मेदारी को स्वीकार नहीं करते हैं, तो ओडीए के अन्य निर्वाचित पदाधिकारियों में से दो सदस्य बोर्ड में शामिल होंगे। इस प्रकार हर स्थिति में केवल चुने हुए और ओल्ड डेलियंस द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधि ही बोर्ड का हिस्सा बनेंगे।

मतदान अधिकार समाप्त नहीं किए जा रहे
उन्होंने दोहराया कि किसी भी ओल्ड डेलियन के मतदान अधिकार समाप्त नहीं किए जा रहे हैं। प्रत्येक सदस्य पहले की तरह मतदान करेगा और प्रत्येक पात्र सदस्य चुनाव लड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से प्रतिनिधित्व अधिक स्पष्ट, सीधा और जवाबदेह बनेगा।

साथ ही दो अलग-अलग चुनावों की व्यवस्था के स्थान पर एक समेकित प्रक्रिया होने से अनावश्यक विवाद, खर्च और राजनीतिक तनाव में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि यह बदलाव नियंत्रण के लिए नहीं, बल्कि स्पष्टता, स्थिरता और जवाबदेही के लिए किया जा रहा है।

साथ ही एक अतिरिक्त मेंबर को भी बोर्ड मैं लिया जायेगा जो की अवार्ड विनर और ऐसा व्यक्ति है जो स्कूल को बेहतर जानता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरा प्रस्ताव बोर्ड की बैठक में विधिवत प्रस्तुत किया गया, उस पर चर्चा हुई और उसे सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया। इसके बाद इसे संबंधित प्राधिकरण के समक्ष भेजा गया है और प्रक्रिया विधिक रूप से जारी है।

अभिव्यक्ति नहीं, अमर्यादा, अश्लीलता और सुनियोजित दुष्प्रचार
‘वॉइस ऑफ डीसी’ नामक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के विषय में अध्यक्ष पवार ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह केवल आलोचना का मंच नहीं, बल्कि संगठित चरित्र हनन और संस्थागत क्षति पहुँचाने का माध्यम बन चुका था। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर जिस प्रकार की सामग्री डाली गई, उसने हर सीमा पार कर दी।

टीचर को बार में बैठकर शराब पीते हुए दिखाया गया, उन्हें अपमानजनक और अशोभनीय परिस्थितियों में चित्रित किया गया, महिला स्टाफ के लिए अत्यंत अभद्र और असम्मानजनक शब्दों का उपयोग किया गया।

कुछ पोस्ट में यह तक दिखाया गया कि शिक्षक शराब पीकर उल्टी कर रहे हैं, जो न केवल झूठा है बल्कि पूरे शिक्षण समुदाय का अपमान है। उन्होंने कहा कि बोर्ड सदस्यों को ‘डी कंपनी’, ‘चमचा’, ‘भोपू’ जैसे शब्दों से संबोधित किया गया।

एक सिख बोर्ड सदस्य को धार्मिक रूप से आपत्तिजनक और अपमानजनक तरीके से प्रस्तुत किया गया, और कई पोस्ट में अश्लील एवं विकृत चित्रण के माध्यम से व्यक्तियों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया। प्राचार्या को ‘पार्ट-टाइम प्राचार्या’ बताया गया, उन्हें स्कूल के संसाधनों के दुरुपयोग से जोड़ने की झूठी कहानियां बनाई गईं।

उन्होंने कहा कि यह आलोचना नहीं है, यह अश्लीलता, चरित्र हनन और संस्थान को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश है। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि जब इन पोस्ट्स के बारे में पूछा गया, तो इसे ‘मजाक’ बताया गया।

इस पर पवार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘ऐसी कौन सी शिक्षा है जो मजाक के नाम पर इस स्तर तक गिर सकती है? यदि किसी संस्था की 155 वर्ष पुरानी प्रतिष्ठा, उसके शिक्षकों और उसके नेतृत्व को इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जाए और उसे मजाक कहा जाए, तो यह मजाक नहीं, बल्कि नैतिक पतन है।‘

पैटर्न स्पष्ट है: पहले दुष्प्रचार, फिर दबाव, फिर फैलाया गया भ्रम
अध्यक्ष पवार ने कहा कि पूरी घटनाओं की शृंखला एक स्पष्ट पैटर्न को दर्शाती है, जिसमें पहले झूठी और अपमानजनक सामग्री बनाई गई, फिर उसे व्यापक स्तर पर फैलाया गया, और जब उस पर कानूनी कार्रवाई हुई, तो उसके खिलाफ दबाव बनाने की कोशिश की गई।

गतिविधियों में भाग लेने वालों की संख्या 25-30 लोगों तक सीमित
उन्होंने कहा कि एक ओर हजारों ओल्ड डेलियंस के समर्थन का दावा किया जाता है, जबकि वास्तविकता में इस प्रकार की गतिविधियों में भाग लेने वालों की संख्या 25-30 लोगों तक सीमित है। यह अंतर स्वयं इस बात को स्पष्ट करता है कि भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि अधिकांश ओल्ड डेलियन्स संस्था के साथ खड़े हैं।

ओल्ड डेलियंस प्रतिनिधियों से सभी भ्रमों और प्रश्नों का समाधान
डेली कॉलेज सोसायटी ने स्पष्ट किया कि संस्था संवाद और समाधान के लिए पूरी तरह तैयार है और सभी मुद्दों पर तथ्यात्मक चर्चा के लिए सदैव तत्पर है। शीघ्र ही एक संरचित बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें ओल्ड डेलियंस के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर सभी भ्रमों और प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत किया जाएगा।

डेली कॉलेज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक जीवंत विरासत
प्रेसीडेंट पवार ने कहा कि डेली कॉलेज केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक जीवंत विरासत है, जिसे किसी भी व्यक्तिगत एजेंडा, राजनीति, दुष्प्रचार या अशोभनीय अभियान का माध्यम नहीं बनने दिया जाएगा। बोर्ड पूरी दृढ़ता के साथ इस संस्था की गरिमा, पारदर्शिता और भविष्य की रक्षा करता रहेगा।

नीयत भी साफ... ‘स्लो पॉइजन’ रणनीति का खुलासा
प्रेसीडेंट पवार ने यह भी कहा कि इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर पहलू यह है कि संबंधित लोगों की आपसी बातचीत और चैट्स से उनकी नीयत स्पष्ट हो जाती है। इन चैट्स में यह चर्चा की गई कि लोगों के बीच लगातार इस प्रकार की सामग्री ‘फीड’ की जाए, एक ‘स्लो पॉइजन’ रणनीति अपनाई जाए और चुनाव से पहले ऐसा माहौल बनाया जाए कि वर्तमान बोर्ड के खिलाफ नकारात्मकता फैल जाए।

उन्होंने कहा कि इससे यह स्पष्ट है कि यह सब किसी सुधार या चिंता के कारण नहीं, बल्कि धारणा को प्रभावित कर राजनीतिक लाभ लेने और सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से किया गया प्रयास है।

एफआईआर... संस्था की गरिमा की रक्षा के लिए अनिवार्य कदम
अध्यक्ष पवार ने स्पष्ट किया कि दर्ज की गई एफआईआर किसी व्यक्तिगत प्रतिशोध के तहत नहीं, बल्कि संस्था की गरिमा, उसकी वैधानिक स्थिति और उसके भविष्य की रक्षा के लिए आवश्यक कदम है। उन्होंने कहा कि यह एफआईआर सीधे तौर पर स्कूल द्वारा नहीं, बल्कि पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दर्ज की गई, जिसमें यह पाया गया कि संबंधित प्लेटफॉर्म पर भ्रामक प्रस्तुति, प्रतिरूपण और मानहानिकारक सामग्री का व्यवस्थित उपयोग किया गया।

उन्होंने यह भी बताया कि आगे की जांच में और गंभीर पहलू सामने आने पर अतिरिक्त धाराएं जोड़ने हेतु आवेदन दिया गया, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 319  के अंतर्गत आपराधिक न्यास भंग का पहलू भी शामिल है, क्योंकि आरोपित व्यक्ति संस्था से जुड़े हुए थे और उसी विश्वास का दुरुपयोग किया गया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो प्रतिनिधिमंडल विद्यालय आया था, उसका एक प्रमुख उद्देश्य एफआईआर हटवाने का दबाव बनाना था। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग संस्था की छवि को सार्वजनिक रूप से अश्लील और अपमानजनक तरीके से नुकसान पहुँचा रहे थे, उन्हीं के पक्ष में आकर एफआईआर हटाने की मांग करना किस प्रकार उचित ठहराया जा सकता है।

मौके दिए गए, लेकिन उद्देश्य समाधान नहीं
प्रेसीडेंट पवार ने कहा कि यदि वास्तव में उद्देश्य समाधान होता, तो कई अवसर दिए गए थे। संदीप पारेख को कंस्ट्रक्शन और परचेज कमेटी का नेतृत्व करने का अवसर दिया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया।

उन्हें खुले मंच पर अपने आरोपों के साथ आने का निमंत्रण दिया गया, परंतु वे सामने नहीं आए।

हाल ही में भी उन्हें और अन्य लोगों को बोर्ड के साथ चर्चा के लिए बुलाया गया, परंतु उन्होंने उसमें भी भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट करता है कि उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि आलोचना, भ्रम और असंतोष के माध्यम से राजनीतिक लाभ प्राप्त करना है।

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