आशा कन्फेक्शनरी को लेकर सड़क पर संग्राम: वेतन और पीएफ के मुद्दे पर घंटों चक्काजाम; मेंदोला की फटकार पर सक्रिय हुई पुलिस
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सांवेर रोड आशा कन्फेक्शनरी में शनिवार को तब कोहराम मच गया, जब महीनों से पसीने की कमाई के लिए तरस रहे सैकड़ों कर्मचारियों का गुस्सा ज्वालामुखी बन फट पड़ा। वेतन और प्रोविडेंट फंड (पीएफ) की राशि जमा न होने से तिलमिलाए कामगारों ने न केवल उत्पादन ठप किया, बल्कि मॉडर्न चौराहे की मुख्य सड़क पर उतरकर व्यवस्था की चूलें हिला दीं।
पसीने की पाई-पाई का हिसाब मांग रहे प्रदर्शनकारियों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच विवाद महज नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देखते ही देखते मारपीट और तोड़फोड़ के हिंसक मंजर में तब्दील हो गया। इस हाई वोल्टेज ड्रामे के चलते घंटों पूरा इलाका पुलिस छावनी बना रहा और यातायात रेंगने पर मजबूर हुआ।
हंगामे की मुख्य वजह कर्मचारियों का वह गंभीर आरोप है, जिसमें उन्होंने प्रबंधन पर कई महीनों का वेतन डकारने और उनके खातों से काटी गई पीएफ राशि को संबंधित विभाग में जमा न करने का दावा किया है। बदहाली और आर्थिक तंगी से गुजर रहे इन कर्मचारियों का कहना है कई बार शांतिपूर्ण तरीके से गुहार लगाई। हर बार प्रबंधन ने खोखले आश्वासनों का झुनझुना थमाया।
शनिवार सुबह जैसे ही कर्मचारियों का सब्र टूटा, उन्होंने काम बंद कर मॉडर्न चौराहे पर मोर्चा खोल दिया। चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की मील लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता को भीषण गर्मी और जाम के बीच भारी परेशानी झेलना पड़ी। विवाद की तपिश उस समय और बढ़ गई जब फैक्ट्री परिसर से मारपीट और तोड़फोड़ की खबरें आईं।
कंपनी के संचालक दीपक दरयानी ने प्रदर्शनकारियों पर बेहद संगीन आरोप जड़ते हुए कहा उन्होंने फैक्ट्री की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया है और जबरन घुसकर बेटे संस्कार दरयानी व अन्य सहयोगियों के साथ मारपीट की। संचालक का दावा है कंपनी हमेशा कर्मचारियों के हित में रही है, लेकिन कुछ लोग राजनीतिक मंशा के चलते माहौल बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं। दूसरी ओर कर्मचारियों ने प्रबंधन के इन दावों को मनगढ़ंत बताते हुए कहा यह उनकी आवाज दबाने और बकाया राशि से बचने का पैंतरा है।
भारी शोर-शराबे और गहमागहमी के बीच पहुंचे पुलिस बल को स्थिति पर काबू पाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश की लेकिन आक्रोशित कामगारों ने चेतावनी दी हक का बकाया वेतन और पीएफ का पूरा भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।
फिलहाल मामला बाणगंगा थाने की दहलीज पर है। उधर, कर्मचारियों ने अब इंसाफ के लिए लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। औद्योगिक क्षेत्र में व्याप्त यह तनाव बड़ी कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
भाजपा कार्यकर्ता को पीटने वाले संस्कार दरियानी पर एफआईआर
उद्योगपति और आशा कंफेक्शनरी के संचालक दीपक दरियानी के बेटे संस्कार ने एक बार फिर कानून को चुनौती देने की हिमाकत की है। इस बार मामला केवल कर्मचारियों के शोषण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्कार ने एक भाजपा कार्यकर्ता पर भी हाथ साफ कर दिया। विडंबना देखिए घंटों बाणगंगा पुलिस दबाव में मूकदर्शक रही और शिकायत के बावजूद एफआईआर से कतराती रही।
सूत्रों के अनुसार पुलिस का लचर रवैया तब बदला जब क्षेत्रीय विधायक रमेश मेंदोला को भनक लगी। मेंदोला ने पुलिस अधिकारियों को फोन पर जमकर फटकार लगाई, जिसके बाद मजबूरन पुलिस को संस्कार दरियानी पर केस दर्ज करना पड़ा। वेतन वृद्धि और बोनस न मिलने को लेकर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप था दीपक दरियानी और उनके बेटे संस्कार ने न केवल उनकी जायज मांगों को अनसुना किया, बल्कि गाली-गलौज और मारपीट भी की।
बाणगंगा टीआई सियाराम सिंह गुर्जर ने बताया कर्मचारी पुरुषोत्तम इंगले की रिपोर्ट पर संस्कार दरियानी पर मारपीट का केस दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस अब भी बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में है और फैक्ट्री संचालक की ओर से लगाए गए तोड़फोड़ के आरोपों की जांच की बात कह रही है।
दीपक दरियानी का इतिहास विवादों से भरा रहा है। शनिवार को बाणगंगा थाने का नजारा भी कुछ ऐसा ही था, जहां पुलिस पीड़ितों को न्याय देने के बजाय रसूख के आगे असहज नजर आई। सवाल है हस्तक्षेप के बाद हुई एफआईआर ठोस अंजाम तक पहुंचेगी या मामले को रफा-दफा करने की कोशिश होगी।
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