लेंसकार्ट शोरूम पर प्रदर्शन करके कर्मचारियों को बिंदी-टीका लगाया: हिंदू कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन मध्य प्रदेश के नेतृत्व में सैकड़ों हिंदू कार्यकर्ताओं ने कल इंदौर के विजय नगर स्थित लेंसकार्ट शोरूम पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का मुख्य कारण कंपनी की कथित एंटी-हिंदू ड्रेस कोड पॉलिसी था, जिसमें कर्मचारियों को बिंदी, टीका या अन्य हिंदू धार्मिक प्रतीकों को पहनने पर रोक लगाने का आरोप लगा, जबकि कुछ अन्य धार्मिक प्रतीकों (जैसे हिजाब) को अनुमति दी गई थी।
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने प्रदर्शन की अगुवाई की। उनके साथ महिला प्रदेश अध्यक्ष सुनीता जायसवाल, मठ-मंदिर प्रमुख पंडित वासुदेव त्रिपाठी, सिद्धेश्वर पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अतुलानंद महाराज और मंडल महामंत्री चिंटू सांगले सहित सैकड़ों मातृ शक्ति एवं भाई-बहन मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने शोरूम के बाहर नारेबाजी की और कंपनी की नीति की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह सनातन धर्म के प्रति असम्मान और भेदभावपूर्ण रवैया है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने शोरूम पर अपने कुछ चश्मों को तोड़ा तथा कर्मचारियों को बिंदी और टीका लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि हिंदू धार्मिक प्रतीकों को अपनाने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए और कंपनी को अपनी नीति तुरंत वापस लेनी चाहिए। अग्रवाल ने कहा कि लेंसकार्ट जैसी कंपनियां हिंदू कर्मचारियों के सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास कर रही हैं। हम इस भेदभाव के खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेंगे। हिंदू समाज अब चुप नहीं रहेगा।
सुनीता जायसवाल ने महिला शक्ति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि माताएं-बहनें सनातन मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आई हैं। पंडित वासुदेव त्रिपाठी और स्वामी अतुलानंद महाराज ने भी प्रदर्शन को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से उचित ठहराया।
यह प्रदर्शन हाल ही में लेंसकार्ट की लीक हुई स्टाफ यूनिफॉर्म एंड ग्रूमिंग गाइड के बाद देशभर में चल रहे विरोध का हिस्सा है। इंदौर के अलावा भोपाल, पुणे, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में भी हिंदू संगठनों ने इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किए हैं, जहां कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों को तिलक और कलावा बांधा था।
फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी अपनी नीति में बदलाव नहीं लाती और हिंदू प्रतीकों पर रोक नहीं हटाती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। यह घटना हिंदू समाज में बढ़ते सांस्कृतिक अस्मिता के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करती है।
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