टैक्स बचाने के लिए अब इतने दिन बाकी: इस दिन तक निपटा लें आवश्यक काम; बदल जाएंगे ये नियम, बंद हो सकते हैं खाते
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, दिल्ली।
वित्त वर्ष खत्म होने में अब केवल दो दिन शेष हैं। 31 मार्च की रात 12 बजे के बाद टैक्स और बैंकिंग से जुड़े कई जरूरी कामों की समय-सीमा समाप्त हो जाएगी। यदि इन कामों को समय पर पूरा नहीं किया गया, तो टैक्स छूट का नुकसान उठाना पड़ सकता है और कुछ बचत योजनाओं के खाते निष्क्रिय हो सकते हैं।
31 मार्च तक निपटाएं ये 3 जरूरी काम
1. बचत योजनाओं में न्यूनतम राशि जमा करें
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) और सुकन्या समृद्धि योजना के खाते सक्रिय रखने के लिए हर वित्त वर्ष न्यूनतम राशि जमा करना जरूरी है। पीपीएफ और सुकन्या खाते में कम से कम 250 रुपए जमा करना अनिवार्य है।
एनपीएस खाते में भी न्यूनतम अंशदान करना जरूरी है। यदि यह राशि जमा नहीं की गई तो खाता बंद या निष्क्रिय हो सकता है। बाद में इसे चालू कराने के लिए जुर्माना देना पड़ेगा और प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। साथ ही, इन योजनाओं में निवेश पर आयकर कानून की धारा 80सी के तहत कुल 1.5 लाख रुपए तक की छूट मिलती है।
2. टैक्स बचाने के लिए निवेश का आखिरी मौका
पुरानी कर व्यवस्था अपनाने वालों के लिए टैक्स बचाने का यह अंतिम अवसर है। धारा 80सी के तहत 1.5 लाख रुपए तक की छूट के लिए निवेश करें। धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और इलाज खर्च पर छूट मिलती है। 31 मार्च के बाद किया गया निवेश अगले वित्त वर्ष में गिना जाएगा, इसलिए इस साल टैक्स बचाने का मौका खत्म हो जाएगा।
3. नौकरीपेशा लोग जमा करें जरूरी दस्तावेज
सैलरी पाने वाले लोगों को अपने निवेश से जुड़े प्रमाण अपने कार्यालय में जमा करना जरूरी है। इनमें शामिल हैं: मकान किराया रसीद, बीमा प्रीमियम की रसीद, होम लोन के ब्याज का प्रमाण। यदि ये दस्तावेज समय पर जमा नहीं किए गए तो कंपनी आपकी सैलरी से अधिक टैक्स काट सकती है। बाद में यह राशि वापस पाने के लिए आयकर रिटर्न भरना पड़ेगा।
1 अप्रैल से बदलेंगे नियम
नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ टैक्स और बैंकिंग से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे। ऐसे में 31 मार्च से पहले सभी जरूरी काम पूरे करना जरूरी है, ताकि: टैक्स छूट का पूरा लाभ मिल सके, खाते सक्रिय बने रहें, अतिरिक्त जुर्माना या अधिक टैक्स कटने से बचा जा सके।
31 मार्च की समय-सीमा को हल्के में लेना महंगा पड़ सकता है। बेहतर है कि सभी जरूरी वित्तीय काम समय रहते पूरे कर लिए जाएं, ताकि अनावश्यक परेशानी और नुकसान से बचा जा सके।
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