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बैंक में इतने करोड़ का गोल्ड लोन घोटाला: नकली सोना गिरवी रख दिया; आंतरिक ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 अप्रैल 2026, 5:24 pm
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बैंक में इतने करोड़ का गोल्ड लोन घोटाला

खुलासा फर्स्ट, नागपुर।
महाराष्ट्र के नागपुर में ICICI Bank से जुड़ा एक बड़ा गोल्ड लोन घोटाला सामने आया है। आरोप है कि बैंक की कई शाखाओं में नकली सोने के आभूषण गिरवी रखकर करीब 23 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया गया। मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ऑडिट में खुला फर्जीवाड़ा
यह घोटाला जनवरी 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच अंजाम दिया गया। बैंक द्वारा कराए गए आंतरिक ऑडिट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नागपुर की 9 अलग-अलग शाखाओं में जमा किए गए कई आभूषण असली सोने के बजाय नकली थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि करीब 195 खाताधारकों ने इस फर्जीवाड़े के जरिए लोन लिया। कुल रकम लगभग 23.19 करोड़ रुपए बताई जा रही है।

शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस
इस मामले की शिकायत बैंक के जोनल ऑफिस में कार्यरत अधिकारी धनंजय रमेश थिटे ने की। शिकायत के आधार पर नागपुर के धंतोली थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 409, 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 120B (आपराधिक साजिश) और 34 के तहत केस दर्ज किया है।

कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैंक की जांच प्रक्रिया को दरकिनार कर इतने बड़े स्तर पर नकली सोना कैसे स्वीकार किया गया। जानकारों के मुताबिक, गोल्ड लोन देने से पहले आभूषणों की शुद्धता जांचने के लिए वैल्युअर्स (मूल्यांकनकर्ता) की भूमिका अहम होती है।

अंदरूनी कर्मचारियों या वैल्युअर्स की मिलीभगत
ऐसे में संदेह जताया जा रहा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में बैंक के अंदरूनी कर्मचारियों या वैल्युअर्स की मिलीभगत हो सकती है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या यह एक संगठित गिरोह (सिंडिकेट) था, जिसने योजनाबद्ध तरीके से नकली गहनों को असली बताकर बैंक को चूना लगाया।

जांच का दायरा बढ़ा
फिलहाल पुलिस सभी संदिग्ध खाताधारकों, वैल्युअर्स और संबंधित बैंक कर्मचारियों की सूची तैयार कर रही है। साथ ही उन सभी लोन खातों की भी दोबारा जांच की जा रही है, जिनमें गोल्ड लोन जारी किया गया था।

बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल
इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और ऑडिट प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतनी बड़ी रकम का लोन बिना सही सत्यापन के जारी होना सिस्टम में बड़ी चूक की ओर इशारा करता है।

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