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अंबेडकर जन्मस्थली पर गूंजे ‘जय भीम’ के नारे: बाबा साहब की जयंती पर उमड़ा जनसैलाब; श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचेंगे मुख्यमंत्री

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 अप्रैल 2026, 11:39 am
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अंबेडकर जन्मस्थली पर गूंजे ‘जय भीम’ के नारे

खुलासा फर्स्ट, महू।
भारत के संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती पर उनकी जन्मस्थली डॉ. अंबेडकर नगर (महू) में भव्य आयोजन किया जा रहा है। देशभर से लाखों अनुयायी, बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा शहर ‘जय भीम’ के नारों से गूंज उठा है।

आधी रात को शुरू हुआ आयोजन, आतिशबाजी से जगमगाया आसमान
सोमवार देर रात 12 बजे काली पलटन स्थित बाबा साहब के जन्म स्मारक पर मान वंदना के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद भव्य आतिशबाजी की गई, जिसने पूरे आसमान को रोशनी से भर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद अनुयायियों ने ‘जय भीम’ के जयकारों के साथ बाबा साहब को नमन किया।

देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
एक दिन पहले से ही महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान सहित कई राज्यों से लोगों का महू पहुंचना शुरू हो गया था। मुंबई, नासिक और औरंगाबाद जैसे शहरों से बड़ी संख्या में अनुयायी यहां पहुंचे हैं। अनुमान है कि कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों की उपस्थिति रहेगी।

मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष होंगे शामिल
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल होंगे। वे बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सभा को संबोधित करेंगे। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा बाबा साहब का फोटो लगाकर कार्यक्रम तो करती है, लेकिन संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ करती है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्मा गया है।

श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं
गर्मी को देखते हुए प्रशासन और स्मारक समिति द्वारा विशेष इंतजाम किए गए हैं। समिति के सचिव राजेश वानखेड़े के अनुसार, परिसर में कारपेट बिछाए गए हैं और ठंडे पानी की व्यवस्था की गई है।एसडीएम राकेश परमार ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने और भोजन की भी समुचित व्यवस्था की गई है।

शहर बना आस्था का केंद्र
सुबह से ही महू में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। जगह-जगह स्वागत मंच लगाए गए हैं और पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल है। अंबेडकर जयंती के अवसर पर महू एक बार फिर सामाजिक समरसता, समानता और संविधान के मूल्यों के संदेश का केंद्र बन गया है।

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