सड़क पर दुकानदारी जेल रोड पर दिनभर रेंगती हैं गाड़ियां: दोनों ओर आधे रोड तक वाहनों का अवैध अतिक्रमण; सड़क पर सजा सामान
KHULASA FIRST
संवाददाता

नगर निगम में वित्तीय घोटाला
आयुक्त ने बिठाई उच्चस्तरीय जांच, 5 सदस्यीय समिति 7 दिन में सौंपेगी रिपोर्ट
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में शुमार जेल रोड पर यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। दिनभर लगने वाले ट्रैफिक जाम से आम जनता बेहाल है। हालात बिगड़ने की सबसे बड़ी वजह स्थानीय व्यापारी ही हैं, जो अपनी दुकानों का सामान मुख्य सड़क पर रखते हैं।
इसके साथ ही दुकानों के सामने सड़क के दोनों ओर आधे रोड तक दोपहिया वाहनों की अवैध पार्किंग करवा दी जाती है। ऐसा प्रतीत होता है कि दुकानदारों को आम जनता की सहूलियत से कोई सरोकार नहीं है और वे खुद ही नहीं चाहते कि जेल रोड की यातायात व्यवस्था सुधरे।
लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल... जेल रोड पर सुबह से देर रात तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। दुकानदारों द्वारा आधी सड़क तक सामान फैलाने और उसके आगे वाहनों की अवैध कतारें लगवाने के कारण अब आम लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। जब चलने के लिए जगह ही नहीं बची तो राहगीर जान जोखिम में डालकर रेंगती हुई गाड़ियों के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। व्यापारी दुकानों के सामने ग्राहकों और कर्मचारियों के दोपहिया वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े करवा देते हैं। सड़क के दोनों किनारों पर आधे हिस्से तक केवल वाहन ही खड़े रहते हैं और बाकी बची जगह पर दुकान का सामान फैला रहता है।
वाहन चालकों के निकलने के लिए सड़क का एक चौथाई हिस्सा ही बचा... दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के निकलने के लिए सड़क का बमुश्किल एक चौथाई हिस्सा ही बच पाता है, जिससे हर दस मिनट में वहां जाम की स्थिति बन जाती है। ग्राहक भी सड़क के बीच में ही अपने वाहन खड़े कर सामान खरीदते हैं, जिससे यह अव्यवस्था और भी ज्यादा गहरा जाती है।
निगम प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी जिम्मेदार
इस पूरी अराजकता के पीछे नगर निगम प्रशासन की घोर लापरवाही और अनदेखी जिम्मेदार है। नगर निगम का अतिक्रमण निरोधी अमला इस पूरे मामले से आंखें मूंदे बैठा है। स्थानीय निवासियों और राहगीरों का आरोप है कि नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल और महापौर की तमाम बैठकों व निर्देशों के बावजूद मैदानी अमला कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती करता है। निगम के क्षेत्रीय उपायुक्त और अतिक्रमण निरोधी दस्ता प्रभारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। साल में एक-दो बार खानापूर्ति के लिए गाड़ी भेजी जाती है, चालान काटने का नाटक होता है और टीम के जाते ही स्थिति जस की तस हो जाती है। निगम की इस अनदेखी ने सड़क पर कब्जा करने वालों के हौसले बढ़ा दिए हैं।
सिर्फ तमाशा देखते हैं यातायात व्यवस्था देखने वाले
यातायात व्यवस्था संभालने का दावा करने वाली पुलिस भी इस मुद्दे पर मूकदर्शक बनी हुई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशों का असर जेल रोड पर नजर नहीं आता। यातायात प्रबंधन और क्षेत्र के संबंधित पुलिस अधिकारियों के मातहत कर्मचारी दिनभर चौराहे पर खड़े रहकर सिर्फ तमाशा देखते हैं। सड़क के दोनों ओर अवैध रूप से खड़े वाहनों को जब्त करने या सड़क पर सामान फैलाकर बैठे व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय पुलिस बल मूकदर्शक बना रहता है। ऐसा लगता है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण जेल रोड को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है।
यदि नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने मिलकर जेल रोड के व्यापारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, सड़क के दोनों ओर होने वाली अवैध पार्किंग को बंद नहीं कराया और सामान रखने वालों पर भारी जुर्माना नहीं ठोंका तो आने वाले दिनों में जेल रोड की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो जाएगी। इंदौर को स्वच्छता में नंबर वन बताने वाला नगर निगम प्रशासन यातायात, अतिक्रमण प्रबंधन और पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने के मोर्चे पर पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है, जिसकी कीमत शहर की जनता को रोजाना जेल रोड के जाम में घंटों फंसकर चुकानी पड़ रही है।
मस्टर कर्मचारियों के वेतन में हेराफेरी, फर्जी खातों में भेज दी राशि
नगर निगम में मस्टर कर्मचारियों के वेतन आहरण में धांधली और वित्तीय गबन का खुलासा हुआ है। बैंक खातों में हेराफेरी कर नगर निगम के फंड को अनधिकृत खातों में ट्रांसफर किया गया है। निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है।
लेखा विभाग के माध्यम से हुआ खुलासा... यह मामला पिछले महीने लेखा विभाग के माध्यम से सामने आया, जब मस्टर कर्मचारियों के वेतन भुगतान की एनईएफटी बैंक फाइल फेल हो गई। इसके बाद जब तकनीकी और वित्तीय परीक्षण किया गया तो प्रधान कार्यालय की स्थापना शाखा में कार्यरत पांच मस्टर कर्मचारियों के वेतन आहरण में गड़बड़ी पकड़ी गई। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इन कर्मचारियों के मूल और सही बैंक खाता नंबरों को सिस्टम से बदलकर अनाधिकृत खाते दर्ज किए गए और निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाई गई। मामले की तह तक जाने और इसमें शामिल दोषियों को चिह्नित करने के लिए गठित समिति में अभय राजनगांवकर अपर आयुक्त को अध्यक्ष बनाया गया है।
समिति में देवधर दरवई अपर आयुक्त-वित्त, केएस सगर उपायुक्त को सदस्य सचिव तथा आशीष तागड़े लेखापाल और कपिल गेहलोत सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह उच्च स्तरीय जांच समिति फर्जीवाड़े, खाते बदलने की प्रक्रिया और अनाधिकृत राशि अंतरण की निष्पक्ष पड़ताल कर अगले सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
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