बॉर्डर पर शाह: देश की सरहद पर 15 दिन बिताएंगे ‘मोटाभाई’
KHULASA FIRST
संवाददाता

नक्सलवाद के खात्मे के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने शुरू किया ‘बॉर्डर मिशन’, भारत बनेगा अभेद्य किला
पाकिस्तान व बांग्लादेश से सटी भारत की सीमा पर जमीनी स्थिति जानने निकले गृहमंत्री
शाह का लक्ष्य ‘स्मार्ट बॉर्डर’, देश की 6 हजार किलोमीटर लंबी सीमाओं को पूरी तरह किया जाएगा सील
कल राजस्थान से शुरू हुआ गृहमंत्री शाह का दौरा, गुजरात, त्रिपुरा होते हुए आखिरी में पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे
बीकानेर वाली सांचू चौकी पर पहुंचने वाले देश के पहले गृहमंत्री बने शाह, ‘हरामी नाले’ का भी करेंगे दौरा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जवाहरलाल नेहरू, लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, चंद्रशेखर, पीवी नरसिंहराव, बूटासिंह, ज्ञानी जैलसिंह से लेकर मुफ्ती मोहम्मद सईद और मुरलीमनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी तक देश ने अनेक गृहमंत्री देखे।
मुफ्ती मोहम्मद सईद को छोड़ दें तो अमूमन हर गृहमंत्री ने अपने कार्यकाल में अलग ही छाप छोड़ी है। इनमें अब अमित शाह सबसे हटकर साबित हो रहे हैं।
देश के प्रति ये उनकी गहरी जवाबदेही व चिंताओं का ही असर है कि वे ऐसे पहले गृहमंत्री हैं, जो पद पर रहते हुए एक दिन भी देश छोड़कर बाहर किसी अन्य देश में नहीं गए।
देश के लिए नासूर बन चुकी बरस-ओ-बरस पुरानी नक्सलवाद की रक्तरंजित समस्या को मुकम्मल रूप से जड़ से उखाड़ने का काम उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
अब शाह अपने नए मिशन पर निकले हैं। मिशन का नाम है- स्मार्ट बॉर्डर। पाकिस्तान, बांग्लादेश से सटी देश की करीब 6 हजार किलोमीटर लंबी सीमाओं को वे अब अभेद्य बनाने के मिशन पर निकल गए हैं।
निशाने पर उनके फिलहाल पाक-बांग्ला ही हैं। घुसपैठ व उससे बिगड़ता और बदलता सीमावर्ती इलाकों का जनसंख्या संतुलन उनकी चिंता का विषय है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में इस समस्या को नजदीक व गहराई से देखने के बाद गृहमंत्री का ये मिशन अहम है।
आमतौर पर ये काम रक्षा मंत्रालय के जिम्मे रहता है और सीमावर्ती इलाकों का दौरा रक्षामंत्री करते आए हैं, लेकिन ‘मोटाभाई’ का अपना एक अलग अंदाज जो है..!
कें द्रीय गृहमंत्री अमित शाह का ‘बॉर्डर दौरा’ देश की सीमाओं, खासकर पाकिस्तान और बांग्लादेश से सटे इलाकों को पूरी तरह से अभेद्य बनाने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने का एक व्यापक सुरक्षा मिशन है।
गृहमंत्री पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाओं की सुरक्षा जांचने के लिए चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा का दौरा कर रहे हैं। दौरे की शुरुआत राजस्थान के बीकानेर से हुई, जहां उन्होंने सांचू सीमा चौकी पर बीएसएफ के जवानों को संबोधित किया।
यहां आने वाले वे देश के पहले गृहमंत्री हैं। शाह के मिशन बॉर्डर का मकसद सीमा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए बीएसएफ, सेना, प्रशासन और स्थानीय नागरिकों को मिलाकर एक ‘4-स्तरीय सुरक्षा ग्रिड’ बनाना है।
गृहमंत्री ने सीमा चौकियों पर 14 नए महिला बैरकों का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बीएसएफ की भूमिका की सराहना की और विपरीत मौसम में जवानों के साहस को सराहा।
गृहमंत्री का यह मिशन लगातार कई दिन तक चलेगा, ताकि सीमावर्ती गांवों में कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने तथा सुरक्षा को और मजबूत करने की रणनीति तैयार की जा सके।
‘मोटाभाई’ दरअसल नक्सलवाद को खत्म करने के बाद भारत को घुसपैठ से पूरी तरह से मुक्त करने के मिशन में जुट गए हैं। उन्होंने फरवरी में बिहार के सीमांचल में घुसपैठ से प्रभावित सात जिलों का दौरा किया था।
इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों से बैठक कर घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम लगाने की रणनीति तैयार की थी। उनके राजस्थान, गुजरात, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों के दौरे को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
भुज में ‘हरामी नाले’ का भी दौरा करेंगे अमित शाह
शाह 29 मई को गुजरात के भुज में सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील ‘हरामी नाले’ का भी दौरा करेंगे। गुजरात के कच्छ रण में पड़ने वाले करीब 22 किलोमीटर लंबे इस दलदली समुद्री चैनल इलाके में बीएसएफ को निगरानी रखना बेहद चुनौतीभरा कार्य है।
पाकिस्तान इस इलाके से आतंकवादियों और तस्करों की घुसपैठ कराने की फिराक में रहता है। भारत की सुरक्षा के लिहाज से हरामी नाले की सुरक्षा को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
गुजरात, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल जाएंगे गृहमंत्री
5 जून को गृहमंत्री त्रिपुरा में और 15 जून को पश्चिम बंगाल पहुंचेंगे, जहां वह बांग्लादेश से लगते बॉर्डर का सिक्योरिटी रिव्यू करेंगे। गृहमंत्री के इन चारों राज्यों में बॉर्डर इलाकों में जाकर वहां सिक्योरिटी रिव्यू करना आने वाले दिनों में देश की बॉर्डर को और अधिक मजबूत करने की दिशा में उठाया जा रहा कदम है।
पश्चिम बंगाल में सरकार बनने के बाद सरकार ने घुसपैठ रोकने का दावा भी किया था। पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से बॉर्डर पर फेंसिंग लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन भी अलॉट की गई है।
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