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शिव भक्ति का सैलाब: अमरनाथ यात्रा-2026

Khulasa First

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संवाददाता

11 जुलाई 2026, 2:46 pm
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शिव भक्ति का सैलाब

अब तक 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन, 8,796 तीर्थयात्रियों का नया जत्था रवाना

पहलगाम से चंदनवाड़ी: लिद्दर नदी के बदलते रंग और अनछुए रास्तों की जादुई दुनिया

खुलासा फर्स्ट, श्रीनगर।
श्री अमरनाथ यात्रा 2026 श्रद्धालुओं की भारी आस्था और उत्साह के बीच लगातार जारी है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस पवित्र यात्रा में अब तक 1.60 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। वहीं शुक्रवार को 8,796 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ।

अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार सुबह रवाना हुए नौवें जत्थे में 3,350 श्रद्धालु तड़के 2:42 बजे सुरक्षा काफिले के साथ बालटाल बेस कैंप के लिए निकले। वहीं 5,346 श्रद्धालुओं का दूसरा काफिला सुबह 3:24 बजे नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुआ।

जत्थे में 33 विदेशी श्रद्धालु भी शामिल... नौवें जत्थे में कुल 6,426 पुरुष, 2,042 महिलाएं, 228 साधु, 10 बच्चे और 33 विदेशी नागरिक शामिल हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए कुल 354 वाहनों की व्यवस्था की गई। इनमें 175 बसें, 70 मीडियम मोटर वाहन, 106 हल्के वाहन और तीन दोपहिया वाहन शामिल रहे। इनमें से 173 वाहन बालटाल मार्ग के लिए तथा 181 वाहन पहलगाम मार्ग के लिए निर्धारित किए गए।

एलजी मनोज सिन्हा ने की व्यवस्थाओं की समीक्षा... जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र स्थित पंथा चौक यात्री शिविर का दौरा कर यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार अमरनाथ यात्रा में अधिक संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं, जो प्रदेश के पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

उन्होंने कहा कि यात्रा के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को भी देशभर में नई पहचान मिल सकती है। उनका प्रयास है कि प्रदेश के कारीगरों के उत्पाद श्रद्धालुओं के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचें, जिससे स्थानीय रोजगार और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ अभियान को भी मजबूती मिले।

बेहतर समन्वय और सुरक्षा पर जोर... उपराज्यपाल ने जिला प्रशासन, श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड, पुलिस, सुरक्षा बलों और सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन, पंजीकरण प्रक्रिया और श्रद्धालुओं तक समय पर सूचना पहुंचाने के लिए सभी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना आवश्यक है।

28 अगस्त को होगा यात्रा का समापन... गौरतलब है कि श्री अमरनाथ यात्रा 2026 का समापन 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के अवसर पर होगा। श्रद्धालु 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर तक पारंपरिक पहलगाम मार्ग या छोटे बालटाल मार्ग से पहुंचते हैं।

पहलगाम मार्ग से यात्रा पूरी करने में लगभग चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग से श्रद्धालु दर्शन कर उसी दिन बेस कैंप लौट सकते हैं।

यात्रा के दौरान एक जवान के हौसले ने थके हुए श्रद्धालु को दी नई ऊर्जा
अमरनाथ यात्रा के दौरान भारतीय सुरक्षा बल के एक जवान का मानवीय व्यवहार इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत रहा है। कठिन चढ़ाई के बीच एक थके हुए श्रद्धालु का हौसला बढ़ाते जवान का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

वीडियो में जवान के कुछ प्रेरणादायक शब्द सुनकर श्रद्धालु दोबारा उत्साह के साथ अपनी यात्रा जारी रखता दिखाई देता है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि ऊंची चढ़ाई और कठिन रास्ते से गुजरते हुए एक श्रद्धालु थककर लगभग रुक जाता है। इसी दौरान वहां ड्यूटी पर तैनात एक भारतीय जवान उसके पास पहुंचता है और उसे शांत एवं आत्मीय अंदाज में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

जवान के शब्दों ने बढ़ाया हौसला... वीडियो में जवान श्रद्धालु से कहता है कि मंजिल अब ज्यादा दूर नहीं है और थोड़ी हिम्मत के साथ आगे बढ़ने पर बाबा बर्फानी के दर्शन हो जाएंगे। जवान की बातों से श्रद्धालु का मनोबल बढ़ जाता है और वह फिर से यात्रा शुरू कर देता है।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो लोगों को भावुक कर रहा है। कई यूजर्स ने जवान की संवेदनशीलता और सेवा भावना की सराहना करते हुए लिखा कि भारतीय सैनिक केवल देश की सीमाओं की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि हर परिस्थिति में लोगों का हौसला भी बढ़ाते हैं।

कठिन मानी जाती है अमरनाथ यात्रा... अमरनाथ यात्रा देश की सबसे कठिन धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, बदलता मौसम और कठिन चढ़ाई के कारण कई श्रद्धालुओं को शारीरिक थकान का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर तैनात सुरक्षा बल केवल सुरक्षा व्यवस्था ही नहीं संभालते, बल्कि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालुओं की हर संभव मदद भी करते हैं।

सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना... वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग भारतीय जवान की प्रशंसा कर रहे हैं। कई यूजर्स ने उन्हें “देश का सच्चा हीरो” बताया, जबकि अन्य ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में बोले गए कुछ प्रेरणादायक शब्द भी किसी व्यक्ति को नई ऊर्जा देने का काम करते हैं। यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है और लोगों का दिल जीत रहा है।

सैलानियों की भीड़ से दूर: लिद्दर घाटी के वे मौन कोने, जहां आज भी सुस्ताता है कश्मीर, ग्लेशियर की गवाही: चंदनवाड़ी के रास्ते पर बदलती लिद्दर नदी की अनकही दास्तान, आस्था के पथ पर प्रकृति का कैनवास: पहलगाम रूट के वे नजारे जो कैमरों में दर्ज नहीं हो पाते, कंक्रीट की सड़क छोड़िए, पगडंडियों पर आइए: अमरनाथ यात्रा के शुरुआती पड़ाव का अनदेखा भूगोल

हर साल जब आषाढ़-सावन के महीने में बाबा बर्फानी के जयकारों से कश्मीर की वादियां गूंज उठती हैं, तब देश-दुनिया के लाखों तीर्थयात्रियों का ध्यान मुख्य रूप से अमरनाथ गुफा और पवित्र शिवलिंग के दर्शनों पर केंद्रित होता है।

इस महायात्रा के पारंपरिक मार्ग ‘पहलगाम से चंदनवाड़ी’ के बीच से होकर गुजरते हुए अधिकांश श्रद्धालु इसे केवल एक ‘बेस कैंप’ या यात्रा का शुरुआती पड़ाव मानकर आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन, मुख्य सड़क की कंक्रीट और सुरक्षाबलों के काफिलों से ज़रा सा नजरें हटाकर अगर आप इस घाटी के भीतर झांकेंगे, तो आपको लिद्दर वैली के वे गुप्त कोण और अनछुए ट्रैकिंग पॉइंट्स मिलेंगे, जो आम तीर्थयात्रियों की नज़रों से अक्सर छूट जाते हैं।

बहुरूपी रंगों का एक जीवंत कैनवास...पहलगाम से शुरू होकर चंदनवाड़ी तक जाने वाले लगभग 16 किलोमीटर के इस मार्ग के समानांतर बहने वाली लिद्दर नदी कोई साधारण जलधारा नहीं है। इस यात्रा मार्ग पर लिद्दर अपने रंगों को किसी गिरगिट की तरह बदलती है। पहलगाम के मुहाने पर नदी का पानी हल्का मटमैला और गहरे नीले रंग का मिश्रण लिए होता है, जहाँ कोलाहोई ग्लेशियर से पिघलकर आई बर्फ पहली बार मैदानी पत्थरों से टकराती है।

गांव के अंदरूनी कोनों में जैसे ही आप मुख्य मार्ग से कटकर गणेशबल या ममलेश्वर के गुप्त रास्तों की तरफ बढ़ते हैं, लिद्दर का रंग दूधिया सफेद और पन्ना हरे के एक जादुई संयोजन में बदल जाता है। स्थानीय कश्मीरी बुजुर्ग बताते हैं कि सूरज की किरणें जब देवदार के जंगलों से छनकर इस नदी के उथले पानी पर पड़ती हैं, तो नदी के तल के रंग बदलते हुए दिखाई देते हैं, जिसे देखने के लिए आम यात्री कभी रुकते ही नहीं।

तुलियन वैली और बायसरन के वे गुप्त कोण, जहां सन्नाटा बोलता है... अमरनाथ यात्रा की भीड़-भाड़ के बीच, पहलगाम के ठीक ऊपर स्थित कुछ ऐसे ट्रैकिंग पॉइंट्स हैं जो इस पूरे रूट का विहंगम दृश्य प्रदान करते हैं।

तुलियन झील ट्रेक- पहलगाम से चंदनवाड़ी के रास्ते में थोड़ा ऊपर की ओर कटने वाला यह ट्रेक लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक जमी हुई झील तक जाता है। यात्रा के दिनों में जहां नीचे मुख्य मार्ग पर गाड़ियों का शोर होता है, वहीं इस अनछुए पॉइंट पर केवल हवाओं की सरसराहट और बर्फ की चादर ओढ़े पहाड़ दिखाई देते हैं।

काणिमर्ग और डबियन- चंदनवाड़ी पहुंचने से ठीक पहले, घने जंगलों के बीच छुपे हुए ये दो ऐसे अल्पाइन घास के मैदान हैं, जहां गुज्जर-बकरवाल जनजातियों के चुनिंदा डेरे ही नजर आते हैं। यहाँ से नीचे बहती लिद्दर नदी किसी पतले धागे जैसी और पूरी घाटी एक गहरी खाई जैसी दिखाई देती है। यह वह ‘एंगल’ है जिसे सिर्फ पेशेवर फोटोग्राफर या घुमक्कड़ ही तलाश पाते हैं।

चंदनवाड़ी का ‘स्नो ब्रिज’ और खोजी रास्तों का रोमांच... चंदनवाड़ी को अमरनाथ यात्रा का अंतिम मोटर-मार्ग पड़ाव माना जाता है, जहां से पिस्सू टॉप की खड़ी चढ़ाई शुरू होती है। लेकिन चंदनवाड़ी के ठीक बगल से गुजरने वाला पुराना पैदल रास्ता आज भी रोमांच से भरा है। यहां आज भी सर्दियों की बर्फ का एक बड़ा हिस्सा स्नो ब्रिज के रूप में लिद्दर नदी के ऊपर जमा रहता है।

मुख्यधारा के तीर्थयात्री बसों और टैक्सियों से उतरकर सीधे यात्रा कतारों में लग जाते हैं, जिससे इस प्राकृतिक आश्चर्य का दीदार केवल वही लोग कर पाते हैं जो इस घाटी के भूगोल को खंगालने की इच्छा रखते हैं।

प्रकृति और आस्था का संतुलन... अमरनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र को करीब से देखने का एक दुर्लभ अवसर भी है। लिद्दर नदी के ये बदलते रंग इस बात का संकेत हैं कि ग्लेशियरों की सेहत कैसी है। एक खेल और खोजी घुमक्कड़ के नज़रिए से, पहलगाम से चंदनवाड़ी के बीच के ये 16 किलोमीटर केवल दूरी तय करने के लिए नहीं, बल्कि हर एक किलोमीटर पर रुककर इस घाटी के छिपे हुए कैनवास को अपनी आंखों में कैद करने के लिए बने हैं। अगली बार जब आप इस मार्ग पर कदम रखें, तो अपनी गति को थोड़ा धीमा करें और लिद्दर के उन गुप्त कोणों को खोजें, जहां कश्मीर का असली और शांत सौंदर्य आज भी सुरक्षित है।

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