शेर नहीं, शिकारी होंगे शिकार: मुख्यमंत्री तो नहीं, मंत्री जरूर हो सकते हैं टारगेट
KHULASA FIRST
संवाददाता

ज्यादा मजबूत और स्थिर हुए मोहन, लंबी पारी का ‘टेक ऑफ’, जमीन विवाद ने कर दी जमीन मजबूत...
खोखला साबित हुआ 'जमीन विवाद': चौतरफा हमलों के बाद और ताकतवर हुए मोहन यादव, खेलेंगे सबसे लंबी पारी!
लक्ष्मणरेखा पार करने वालों को चेतावनी: 'मोहन' के चक्रव्यूह में फंसे विरोधी, अब वजीरों की बारी!
तैयार है मंत्रियों का 'रिपोर्ट कार्ड': दतिया मॉडल पर होगा मोहन कैबिनेट का कायाकल्प, बड़े दिग्गजों की छुट्टी तय!
डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लंबी पारी खेलेंगे। शेर की तरह साहस से राजतंत्र चलाने के लिए पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री का राजनीतिक शिकार करने की कोशशें विफल साबित हुईं। अब कहा जा रहा है कि शिकारी खुद शिकार हो सकते हैं, यानी मुख्यमंत्री तो बने रहेंगे, लेकिन उनके विरोधी मंत्रियों या असंतुष्ट वजीर मंत्रिमंडल से विदा हो सकते हैं।
ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति बैठक के पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट में बदलाव की बातें चल पड़ी हैं।
मु ख्यमंत्री के ताकतवर होने का दूसरा कारण यह भी है कि वह पूरी तरह ऊर्जावान और लगातार भ्रमण करते हुए कठोर फैसले ले रहे हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज आत्मविश्वास, निर्भीकता और दृढ़ इच्छाशक्ति से लबरेज नजर आ रही है। इसके विपरीत जो मंत्री सरकार से नाराजगी जाहिर कर रहे थे, वे सब फिलहाल ओझल हो गए हैं।
खेलेंगे स्थिर, मजबूत और लंबी पारी
प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री को लेकर उपजा जमीन विवाद खोखला साबित हुआ। इससे मुख्यमंत्री के नेतृत्व की नींव कमजोर नहीं, बल्कि और ज्यादा मजबूत हुई है। इसी बीच मंत्रिमंडल फेरबदल के संकेत पार्टी हाईकमान और संगठन द्वारा मिलने की चर्चाएं भी सुनाई देने लगी हैं। इससे यह साबित होता है कि मुख्यमंत्री स्थिर, मजबूत और लंबी पारी खेलेंगे।
कहा जा रहा है विपक्ष के षड्यंत्र और झूठे आरोपों को नियंत्रित करने के लिए कांग्रेस के बड़े नेता के भाई साहब की घेराबंदी जिस तरह से हुई, वह विपक्ष के लिए चेतावनी है। विधानसभा सत्र के पहले विपक्ष को संदेश मिल गया है कि वह झूठ और व्यक्तिगत आरोपों की लक्ष्मणरेखा पार न करे।
सरकार और संगठन में जिस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं, उनसे लगता है कि मुख्यमंत्री पर चौतरफा हमला करने के बाद खाली हाथ रह गए थके-हारे विपक्ष और असंतुष्ट नेता अब परेशानी में आ सकते हैं।
जैसा कि मंत्रिमंडल विस्तार/फेरबदल की अटकलें हर बार की तरह इस बार भी फिर चर्चा में आ गईं या लाई गई हैं। हालांकि ऐसा कोई आधिकारिक या पक्का समाचार सामने नहीं आया, लेकिन राजनीतिक गलियारे कैबिनेट में बदलाव की बरसाती फुहार से गुलजार हैं।
इन चर्चाओं को इसलिए भी ताकत मिल रही है, क्योंकि इस समय दतिया उपचुनाव में अप्रत्याशित तरीके से भाजपा के मजबूत नेता और मुख्यमंत्री पद के दावेदार रहे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने चुनाव से बाहर कर दिया, यानी टिकट नहीं दिया। यह वही नरोत्तम हैं, जिन्होंने 2018 की कांग्रेस की सरकार का तख्तापलट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिवराज को मुख्यमंत्री पद मिला।
ऐसे में स्वाभाविक जिज्ञासा और सवाल है कि जो नरोत्तम के साथ हुआ, क्या वह मुख्यमंत्री विरोधी मंत्रियों के साथ नहीं हो सकता?
क्या मोहन यादव कैबिनेट के बड़े असंतुष्ट मंत्रियों के साथ भी पार्टी इसी तरह नरोत्तम एपिसोड को दोहरा सकती है? ऐसा करना आसान हो भी सकता है, क्योंकि संगठन ने बीते ढाई वर्ष के दौरान मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड समय-समय पर तैयार करवाए हैं।
मुख्यमंत्री समर्थक चाहेंगे कि मंत्रिमंडल फेरबदल या विस्तार जैसे राजनीतिक दांव-पेंच को आजमाया जाए, ताकि मुख्यमंत्री बिना दबाव-प्रभाव के प्रदेश को खुशहाल बनाने के अपने अभियान को तेजी से क्रियान्वित कर सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है, तो इसके कई उद्देश्य हो सकते हैं। पहला, असंतुष्ट मंत्रियों और विधायकों पर राजनीतिक संतुलन तथा अनुशासन बनाए रखना।
दूसरा, सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना। तीसरा, कुछ नेताओं को संगठन या अन्य महत्वपूर्ण दायित्व देकर मुख्यमंत्री की कार्यशैली के अनुरूप नई टीम तैयार करना।
दिल्ली लौटे दिग्गज, मोहन मजबूत!
दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सक्रिय कार्यशैली, लगातार कैबिनेट बैठकें, जिलों के दौरे, यूसीसी जैसे बड़े निर्णयों की घोषणाएं और प्रशासनिक फैसले यह संकेत देते हैं कि सरकार सामान्य गति से काम कर रही है। भाजपा का प्रदेश नेतृत्व भी सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है।
ऐसे में फिलहाल सीमित मंत्रिमंडलीय फेरबदल की अटकलों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। फेरबदल में उन बड़े मंत्रियों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्हें केंद्र से प्रदेश में ससम्मान भेजा गया और मंत्री पद दिए गए थे। इनमें एक इंदौर के, दूसरे टीकमगढ़ क्षेत्र के, तीसरे पूर्वी निमाड़ के और चौथे आलीराजपुर क्षेत्र से आने वाले मंत्री हैं।
सीहोर क्षेत्र से भी एक मंत्री का नाम है, जो स्पष्ट व न्यायसंगत तथ्य कैबिनेट में उठते रहते हैं। यह भी चर्चा है कि इन सबको मंत्रिमंडल से मुक्त किया गया तो रिवॉर्ड दिया जाएगा। मतलब केंद्र में या अन्य महत्वपूर्ण दायित्व इन्हें दिए जाएंगे।
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