पिपलियापाला तालाब में सीवेज का जहर: मरेंगी हजारों मछलियां
KHULASA FIRST
संवाददाता

नगर निगम प्रशासन की लापरवाही से शहर का प्रमुख पर्यटन स्थल बना जहरीला जलाशय, अधिकारियों की अनदेखी से बिगड़े हालात
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर का पिपलियापाला तालाब नगर निगम के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है। सवाल उठ रहा है कि जब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के नाम पर घटिया व्यवस्था चलाई जा रही है, तो हजारों मछलियां मरेंगी ही, इसका असली जिम्मेदार कौन है?
स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि सीवेज के पानी को साफ करने का महज ढोंग किया जा रहा है और बिना उपचारित किया गया दूषित पानी सीधे जलाशय में भेजा जा रहा है।
शोधन के नाम पर हो रही इस अनियमितता ने तालाब के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर दिया है। चारों तरफ फैली असहनीय दुर्गंध ने क्षेत्रीय लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। शहर के सबसे बड़े पिकनिक स्पॉट के इस हाल ने पर्यटकों की सुरक्षा और आम नागरिकों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा खड़ा कर दिया है।
जिम्मेदारी दूसरों पर डाल देते हैं अधिकारी
इस भयावह स्थिति पर पत्रकार नीलेश वर्मा और क्षेत्र के नागरिकों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। पत्रकार नीलेश वर्मा ने खुलासा किया है कि पानी अत्यधिक जहरीला होने के कारण बड़ी संख्या में मछलियां मर चुकी हैं, लेकिन अपनी नाकामी छुपाने के लिए नगर निगम द्वारा मृत मछलियों को रातोंरात पानी से बाहर निकलवा दिया गया।
पूरे तालाब का पानी अत्यधिक दूषित और बदबूदार हो चुका है, जिससे आसपास रहना मुश्किल हो गया है। निवासियों का साफ कहना है कि शिकायत लेकर पहुंचने पर संबंधित नगर निगम अधिकारी अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डालकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो एसटीपी प्लांट का सही तरीके से काम न करना सीधे तौर पर राष्ट्रीय पर्यावरण मानदंडों का खुला उल्लंघन है। जल में ऑक्सीजन का स्तर घातक स्तर तक गिर चुका है और जहरीले रसायनों की मात्रा बढ़ गई है, जिससेे जलीय जीवों का दम घुट रहा है।
इस बर्बादी को रोकने के लिए तुरंत पानी के नमूनों की फॉरेंसिक लैब जांच और पूरे सीवेज शोधन तंत्र का निष्पक्ष तकनीकी ऑडिट कराया जाना बेहद जरूरी हो गया है। मुख्य जिम्मेदार होने के नाते नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल को तुरंत इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लेना चाहिए।
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