डरे रहवासियों ने नहीं भरा पानी: भागीरथपुरा जहरीला जल हादसा; महापौर ने नई पाइप लाइन का पानी पीकर की टेस्टिंग
KHULASA FIRST
संवाददाता

दूषित पानी से हुई मौतों के बाद 30 % क्षेत्र में बिछ चुकी नई लाइन
ताई की देहरी पर पटवारी की दस्तक से सियासत गरमाई
महापौर बोले- देर से ही सही, पटवारी को सद्बुद्धि तो आई
सच्चाई या सियासती खेल? मृतका सुभद्राबाई के डॉक्टर पुत्र ने भी किया खुलासा
भागीरथपुरा में मौत के आंकड़ों पर तकरार, प्रशासन ने खबरों को बताया ‘भ्रामक’
राहुल गांधी से कहो, सही जगह उठाएं बात
मंत्री और महापौर पर फोड़ा है 24 मौतों का ठीकरा; वर्षों से मल-मूत्र मिला जहरीला पानी पीने को मजबूर थे रहवासी: सज्जनसिंह वर्मा
दिग्विजय सिंह ने घेरा सरकार को
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
भागीरथपुरा में शुक्रवार को नई पाइप लाइन से नर्मदा जल सप्लाई किया गया। दूषित पानी की आशंका से डरे लोगों ने पानी भरने की बजाय सड़कों पर बहा दिया। किसी ने गाड़ी साफ की, तो किसी ने घर के सामने की गंदगी।
प्रदेश की सियासत के केंद्र इंदौर में उस वक्त राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया, जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अचानक पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) के निवास पर उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे।
इस मुलाकात ने जहां राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया, वहीं भाजपा ने इसे पटवारी के पुराने आचरण पर आत्मग्लानि करार दिया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस मुलाकात पर तंज कसते हुए कहा, पटवारी को देर से ही सही, लेकिन सद्बुद्धि तो आई। उन्होंने नसीहत दी कि ताई के पास मार्गदर्शन लेने जाने से पहले पटवारी को अपने पुराने आचरण और भाषा की मर्यादा पर भी गहराई से विचार करना चाहिए।
महापौर भार्गव ने पटवारी की इस पहल को घेरे में लेते हुए सवाल उठाया कि आज जब पटवारी मर्यादा और शालीनता की बात कर रहे हैं, तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पूर्व में जब उन्होंने अभद्र टिप्पणियां की थीं, तब उनकी यह नैतिकता कहां सोई हुई थी।
उन्होंने मांग की कि सार्वजनिक जीवन में शुचिता की बात करने वाले पटवारी को अपने पिछले व्यवहार के लिए जनता के सामने जवाबदेही तय करनी चाहिए। महापौर ने पटवारी के दस साल के विधायक कार्यकाल को विकास के मोर्चे पर विफल बताते हुए कहा, आज उनकी ही पार्टी के नेता उमंग सिंघार उनके पूर्व विधानसभा क्षेत्र की बदहाली पर रील बना रहे हैं, जो पटवारी के दावों की जमीनी हकीकत बयां करने के लिए पर्याप्त है।
राहुल का दौरा इवेंट पॉलिटिक्स
कांग्रेस के इंदौर घेराव और राहुल गांधी के दौरे पर प्रहार करते हुए महापौर ने इसे इवेंट पॉलिटिक्स करार दिया। उन्होंने कहा, राहुल गांधी जिन समस्याओं को लेकर इंदौर आने वाले हैं, वैसी ही स्थितियां देश के अन्य कांग्रेस शासित राज्यों में भी विद्यमान हैं।
भार्गव ने सवाल दागा कि क्या राहुल गांधी के पास शहरीकरण और जलसंकट जैसी जटिल चुनौतियों के लिए कोई ठोस रिसर्च या दूरगामी विजन है या फिर यह दौरा केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने तक सीमित रहेगा?
भागीरथपुरा की त्रासदी का उल्लेख करते हुए महापौर ने कांग्रेस पर फोटो पॉलिटिक्स का आरोप लगाया और कहा कि जब प्रशासन धरातल पर समाधान के लिए संघर्ष कर रहा था, तब कांग्रेस नेता केवल रील बनाने और विरोध के नाम पर राजनीति चमकाने में व्यस्त थे।
भागीरथपुरा में ड्रेनेजयुक्त गंदा व दूषित पानी पीने से अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों बीमार हैं। ऐसे में निगम ने अब तत्परता दिखाते हुए यहां 30 फीसदी क्षेत्र में नई पाइप लाइन डालकर पानी सप्लाय शुरू कर दिया।
हादसे के बाद रहवासियों में व्याप्त तमाम शंका-कुशंकाओं को दूर करने के लिए मौके पर पहुंचे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने टेस्टिंग के तौर पर नई पाइप लाइन से सप्लाय पानी पीकर दिखाया। हादसे के बाद निगम ने भागीरथपुरा में त्वरित रूप से नई पाइप लाइन डालने का कार्य शुरू किया।
अब तक करीब 30 फीसदी क्षेत्र में नई लाइन बिछाकर शुक्रवार को इसमें पानी सप्लाय किया गया, जिसे महापौर भार्गव ने पीकर टेस्ट किया। इस मौके पर वार्ड पार्षद कमल वाघेला सहित कई नेता उपस्थित थे। ज्ञातव्य है करीब सात माह पहले स्थानीय पार्षद वाघेला द्वारा नई पाइप लाइन बिछाने के लिए पत्र लिखे गए थे।
स्वीकृति मिलने के बावजूद प्रस्ताव में देरी होती रही। इसी बीच दूषित पानी के कारण बस्ती में हैजा व डायरिया फैल गया। इस महामारी में अब तक सैकड़ों लोग बीमार हुए, जबकि दूषित पानी के सेवन से 24 लोगों की मौत हो गई और 8 मरीज अब भी आईसीयू में भर्ती हैं।
60 टैंकर... पूरे क्षेत्र में जब तक नई पाइप लाइन नहीं बिछ जाती, तब तक निगम द्वारा टैंकरों से पानी सप्लाय किया जा रहा है। 60 से अधिक टैंकरों से पानी की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि पाइप लाइन डालने के लिए चल रही खुदाई के कारण कई गलियों में टैंकर नहीं पहुंच पा रहे। इससे स्थानीय लोगों को भारी जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है।
सामने से हटो…भागीरथपुरा में जब महापौर पानी टेस्ट कर रहे थे, उस समय उनके फोटो खींचने और वीडियो बनाने वालों में होड़ लग गई। तभी एक व्यक्ति महापौर और कैमरे के बीच आ गया तो मौके पर मौजूद पार्षद वाघेला ने नाराजगीभरे अंदाज में कहा कि सामने से हटो, दिखता नहीं फोटो खिंच रही है। उनकी यह बात सुनकर मौजूद लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए।
थमने लगा डायरिया का कहर; बीते 24 घंटे में मिले मात्र तीन मरीज
805-डेंगू मलेरिया स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा भागीरथपुरा क्षेत्र में घर घर सर्वे कर पानी में लार्वा की जांच करते हुए। पैर पसार कर जमे डायरिया के प्रकोप पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावी नियंत्रण का दावा किया है।
शुक्रवार को प्रभावित क्षेत्र की ओपीडी में आए कुल 88 मरीजों में से केवल तीन में डायरिया के लक्षण पाए गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। राहत की बात यह रही गंभीर स्थिति न होने के चलते किसी मरीज को अस्पताल रैफर करने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
सीएमएचओ डॉ. माधवप्रसाद हासानी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया सघन जांच और उपचार अभियान के सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। क्षेत्र में जनजीवन तेजी से सामान्य हो रहा है। स्वास्थ्य टीमों ने अब तक 35 हजार से अधिक घरों का व्यापक सर्वे किया है।
लगभग 1 लाख 65 हजार लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए 63 हजार से ज्यादा ओआरएस पैकेट और करीब पौने तीन लाख जिंक टैबलेट्स का वितरण किया है।
विभिन्न अस्पतालों में 11 मरीजों का उपचार जारी है, जिनमें से पांच एहतियात के तौर पर आईसीयू में हैं। विभाग की टीमें न केवल डायरिया बल्कि अभियान स्वास्थ्यवर्धन के जरिए गैर-संचारी रोगों की भी लगातार निगरानी कर रही हैं।
शुक्रवार को 1312 घरों में दस्तक... शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग के 23 विशेष दलों ने 1312 घरों में दस्तक देकर लार्वा सर्वे किया और नागरिकों को मौसमी बीमारियों से बचाव के गुर सिखाए।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से उपजे संकट के बीच मौतों के बढ़ते आंकड़ों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। एक ओर जहां मीडिया व स्थानीय लोग मौतों का आंकड़ा 24 तक पहुंचने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने इन खबरों को तथ्यहीन करार दिया।
शुक्रवार को प्रशासन ने सुभद्राबाई की मृत्यु को लेकर कहा कि हर मौत को दूषित पानी से जोड़ना गलत है।
मेरी मां की मौत डायरिया से नहीं हुई: डॉ. सतीश पवार
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब मृतका सुभद्राबाई के पुत्र डॉ. सतीश पवार खुद सामने आए। एनेस्थेसिया विशेषज्ञ डॉ. पवार ने मीडिया में चल रही खबरों का खंडन करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी को बताया कि उनकी माताजी लंबे समय से हृदय रोग से ग्रसित थीं।
उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के कारण मेट्रो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉ. पवार ने दु:ख जताते हुए कहा शोकाकुल परिवार की इस निजी क्षति को दूषित पानी के प्रकरण से जोड़ना न केवल असत्य है, बल्कि आपत्तिजनक भी।
मेट्रो अस्पताल और सीएमएचओ की क्लीन चिट
प्रशासनिक अमला अब उन खबरों को फेक न्यूज की श्रेणी में रख रहा है, जिनमें सुभद्राबाई की मृत्यु का कारण डायरिया बताया गया था। सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने मेट्रो अस्पताल के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए पुष्टि की है कि इलाज के दौरान दूषित पानी के संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए। प्रशासन का मानना है कि इस संवेदनशील समय में भ्रामक खबरें जनता में डर फैला रही हैं, जबकि वास्तविकता मेडिकल रिपोर्ट्स के आधार पर कुछ और ही है।
मीडिया के दावे और प्रशासन की घेराबंदी
जहां मीडिया में 24वीं मौत की सुर्खियां बटोरी जा रही थीं, वहीं स्वास्थ्य विभाग के इस नए दावे ने मीडिया की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि भागीरथपुरा मामले में केवल उन्हीं मौतों को शामिल किया जाए, जिनकी पुष्टि मेडिकल बोर्ड ने की हो। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन का यह स्पष्टीकरण जनता के गुस्से को शांत कर पाएगा या फिर आंकड़ों की बाजीगरी नई बहस को जन्म देगी।
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने पहुंचे थे कांग्रेस नेता; सियासत से ऊपर उठी ताई ने पटवारी से कहा- मुझे सब पता है क्या हो रहा है
शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से होने वाली मौतों के मामले ने अब एक नया और दिलचस्प मोड़ ले लिया है। इस मुद्दे पर जहां सत्ताधारी दल के दिग्गज नेता कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं भाजपा की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) का रुख अपनी ही सरकार के रुख से जुदा नजर आया।
शुक्रवार सुबह जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और चिंटू चौकसे अचानक ताई के मनीषपुरी स्थित निवास पर पहुंचे, तो दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा ने शहर की राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
ताई ने न केवल शहर में दूषित पानी और बदहाल ड्रेनेज सिस्टम की सच्चाई को स्वीकार किया, बल्कि पटवारी को यह नसीहत भी दे डाली कि वे राहुल गांधी से कहें कि मुद्दों को सही मंच और सही जगह पर उठाएं।
मुलाकात के दौरान जब पटवारी ने शहर की जल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इंदौर का 70 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं है और बिना ताई के हस्तक्षेप के प्रशासन नहीं जागेगा, तो सुमित्रा महाजन ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से माना कि पानी की गुणवत्ता खराब है और इसी वजह से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
ताई ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर परोक्ष रूप से उंगली उठाते हुए कहा कि उन्हें शहर के मौजूदा हालातों की पूरी जानकारी है। जब कांग्रेस नेताओं ने भ्रष्टाचार का मुद्दा छेड़ा, तो ताई ने संतुलित, लेकिन गंभीर लहजे में कहा कि किसी की भी मौत की कीमत नहीं लगाई जा सकती और पानी जैसे बुनियादी मुद्दे पर काम होना ही चाहिए।
इस चर्चा की सबसे खास बात ताई का वह सुझाव रहा, जिसमें उन्होंने राजनीति से परे हटकर एक स्वतंत्र कमेटी बनाने की बात कही।
राहुल गांधी की यात्रा के बाद भी चैन से नहीं बैठेगी कांग्रेस
आज राहुल गांधी की भागीरथपुरा यात्रा के बाद भी कांग्रेस चैन से बैठने वाली नहीं है। प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी, शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे का कहना है कि पार्टी इस मुद्दे पर तब तक आंदोलन जारी रखेगी जब तक कि पीडि़तों को न्याय नहीं मिल जाता।
हमारी मांग मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा, शहरभर की पानी की पाइपलाइनों की जांच कर शुद्ध पानी का वितरण और जिम्मेदार मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा है। जब तक ये नहीं होता तब तक कांग्रेस का एक भी कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेगा।
राहुल गांधी को सौंपेंगे कांग्रेस की जांच रिपोर्ट
दूषित पेयजल के कारण हुई 24 हृदय विदारक मौतों के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ लिया है। प्रदेश कांग्रेस के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत और तथ्यात्मक जांच रिपोर्ट तैयार कर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को प्रेषित की है। शनिवार को इंदौर आ रहे राहुल गांधी को इसे औपचारिक रूप से सौंपा जाएगा।
पूर्व सांसद सज्जनसिंह वर्मा, विधायक महेश परमार और विधायक प्रताप ग्रेवाल के नेतृत्व में गठित जांच दल ने रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे कर बताया है भागीरथपुरा के नागरिक वर्षों से मानव मल मूत्र युक्त जहरीला पानी पीने को विवश थे।
पुलिस चौकी भागीरथपुरा के समीप स्थित सार्वजनिक शौचालय में सेप्टिक टैंक की समुचित व्यवस्था न होने के कारण गंदगी जमीन में रिसती रही और पेयजल पाइपलाइन में गंभीर लीकेज होने के चलते पूरा जल वितरण नेटवर्क घातक बैक्टीरिया के भंडार में तब्दील हो गया।
प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप... कांग्रेस की रिपोर्ट में वैज्ञानिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए बताया गया है परीक्षण के दौरान पानी में फीकल कोलीफॉर्म, ई-कोलाई, स्यूडोमोनास और क्लेब्सिएला जैसे जानलेवा जीवाणु पाए गए हैं, जो हैजा और अन्य गंभीर बीमारियों का मुख्य कारण बने।
सबसे गंभीर आरोप प्रशासन की लापरवाही का है, जिसमें कहा गया है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2017-18 में ही खतरे की चेतावनी दे दी थी, किंतु जिम्मेदारों ने लगातार नजरअंदाज किया। सेवानिवृत्त विशेषज्ञों के इनपुट के आधार पर रिपोर्ट में तकनीकी खामी का भी उल्लेख कर कहा गया है घटिया गुणवत्ता वाली सीवरेज लाइन को पेयजल पाइपलाइन के अत्यंत निकट बिछाया गया, जिससे वैक्यूम प्रेशर बनते ही सीवरेज की गंदगी सीधे पीने के पानी में समाहित हो जाती थी।
महापौर, बबलू शर्मा प्रत्यक्ष जिम्मेदार... राजनीतिक रूप से बेहद हमलावर रिपोर्ट में सीधे तौर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कटघरे में खड़ा किया गया है। क्षेत्र नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत है, इसलिए रिपोर्ट में उनकी राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव और जल कार्य समिति प्रभारी अभिषेक बबलू शर्मा को मौतों का प्रत्यक्ष जिम्मेदार ठहराते हुए प्रशासन पर जानकारी छिपाने और पीड़ितों को मुआवजा न देने का आरोप है। रिपोर्ट में उस घटना का भी जिक्र है जब जांच दल को रोकने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया और पुलिस ने कांग्रेस प्रतिनिधियों को हिरासत में लिया, जो लोकतंत्र की हत्या और सच दबाने का प्रयास था।
न्यायिक जांच और सार्वजनिक सुनवाई की मांग
दूषित जल से हुई मौतों के मामले में राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने त्रासदी के लिए भारतीय जनता पार्टी की आपसी खींचतान और प्रशासनिक समन्वय के अभाव को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया जब तक न्यायिक जांच और पब्लिक हायरिंग( सार्वजनिक सुनवाई) नहीं की जाती, असली दोषियों की जिम्मेदारी तय नहीं हो पाएगी।
दिग्विजय सिंह ने कटाक्ष किया छोटे कर्मचारियों को निलंबित करना या अधिकारियों का तबादला महज खानापूर्ति है, जबकि निर्णय लेने वाली शक्तियों पर अब तक कोई आंच नहीं आई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा के आंतरिक घमासान को त्रासदी की मुख्य वजह बताते हुए कहा शहर में सत्ता के दो केंद्र हैं। एक ओर मुख्यमंत्री का कथित आदेश है अधिकारी स्थानीय नेताओं की न सुनें। महापौर और पार्षद मंद स्वर में स्वीकार करते भी हैं अधिकारी उनकी बात अनसुनी कर रहे हैं।
सिंह के मुताबिक खींचतान ही विकास कार्यों में बाधक है। उन्होंने खुलासा किया भागीरथपुरा में 2022 में ही पाइपलाइन बदलने का फैसला हो चुका था और बजट भी स्वीकृत था, लेकिन ठेकेदारों को लेकर भाजपा नेताओं की आपसी बंदरबांट और चहेतों को उपकृत करने की होड़ ने टेंडर प्रक्रिया को लटकाए रखा, जिसका खामियाजा निर्दोष जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री को सीधे चुनौती देते हुए सवाल किया क्या वे इस घटनाक्रम की न्यायिक जांच का साहस जुटा पाएंगे? उन्होंने मांग की मामले से संबंधित तमाम शासकीय दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा यदि इस लापरवाही में मेयर-इन-काउंसिल या महापौर की भूमिका संदिग्ध है, तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की चूक है, तो उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो। जोर दिया इस त्रासदी के सच को सामने लाने के लिए न्यायिक जांच ही एकमात्र पारदर्शी रास्ता है।
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