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बीपीसीएल में 5.72 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला: कंपनी के कर्मचारियों पर फर्जी वॉलेट खेल से धोखाधड़ी का आरोप

KHULASA FIRST

संवाददाता

01 अप्रैल 2026, 5:33 pm
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बीपीसीएल में 5.72 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला

रॉयल्टी एप्लिकेशन में कथित हेरफेर कर ‘स्मार्ट फ्लेक्स’ वॉलेट में डाली रकम

शिप्रा पुलिस ने 7 कर्मचारियों पर केस दर्ज किया

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में कॉर्पोरेट फ्रॉड का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें देश की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को कथित तौर पर 5 करोड़ 72 लाख रुपए से अधिक की चपत लगा दी गई। मामला इतना गंभीर है कि कंपनी के ही कुछ कर्मचारियों पर रॉयल्टी एप्लिकेशन में कथित हेरफेर कर फर्जी तरीके से रकम अपने निजी उपयोग में लेने का आरोप लगा है। पूरे मामले में शिप्रा थाना पुलिस ने कंपनी के 7 कर्मचारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

पुलिस के मुताबिक, यह मामला वर्ष 2023 से जुड़ा हुआ है, जिसकी शिकायत विक्रांत आहते, निवासी नवी मुंबई, ने दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि बीपीसीएल के रॉयल्टी एप्लिकेशन में एक फर्जी/मैनिपुलेटेड स्मार्ट फ्लेक्स खाता बनाकर उसमें गलत तरीके से रकम ट्रांसफर की गई। आरोप है कि इस फर्जी खाते के वॉलेट सिस्टम का उपयोग कर राशि बिना वैध जमा के ही डेबिट/एडजस्ट की जाती रही और कंपनी के वित्तीय सिस्टम को चकमा देकर करोड़ों रुपये का लेनदेन कर लिया गया।

शिकायत के अनुसार, जब इस अनियमितता का पता चला तो फरियादी पक्ष ने संबंधित आरोपियों से गलत तरीके से रिचार्ज/क्रेडिट की गई राशि का पूरा ब्यौरा मांगा और तत्काल रकम लौटाने का अनुरोध किया। लेकिन आरोप है कि बार-बार अनुरोध और फॉलोअप के बावजूद न तो राशि वापस की गई और न ही संतोषजनक जवाब दिया गया। इसके बजाय आरोपियों ने कथित तौर पर इस रकम का अवैध और धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से निजी उपयोग कर लिया।

कंपनी के अंदरूनी सिस्टम का दुरुपयोग, जांच में खुला खेल: प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह कोई साधारण तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सिस्टम की समझ रखने वाले अंदरूनी लोगों की कथित मिलीभगत का मामला हो सकता है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों पर आरोप लगा है, वे सभी किसी न किसी रूप में कंपनी के ऑपरेशन/सिस्टम से जुड़े हुए थे और उन्हें वॉलेट, रॉयल्टी या वित्तीय प्रोसेस की जानकारी थी। इसी वजह से यह शक और गहरा हो गया है कि अंदरूनी एक्सेस का इस्तेमाल कर कंपनी को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाया गया।

शिप्रा पुलिस ने मामले में विशाल सिंह निवासी शालीमार टाउनशिप, शशि सिंह निवासी तलावली/तलावली टाउनशिप, दलबीर सिंह निवासी स्कीम नंबर-114, बलजीत सिंह निवासी स्कीम नंबर-114, वाहिद खान निवासी विजय पैलेस कॉलोनी, नरेंद्र सिंह बासु निवासी खातीवाला टैंक और बलवीर सिंह निवासी अंबिकापुरी के खिलाफ केस दर्ज किया है।

मिलीभगत से कंपनी को करोड़ों का नुकसान
पुलिस का मानना है कि सभी आरोपियों ने मिलीभगत कर कंपनी के डिजिटल सिस्टम का फायदा उठाया और 5.72 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का दुरुपयोग किया। अब पुलिस इस पूरे घोटाले की फाइनेंशियल ट्रेल, बैंकिंग डिटेल, वॉलेट ट्रांजेक्शन, लॉगिन रिकॉर्ड, डिजिटल एक्सेस और तकनीकी उपयोग की जांच कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस घोटाले में सिर्फ यही लोग शामिल थे या फिर कंपनी के भीतर और बाहर के कुछ अन्य लोग भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे। संभावना है कि जांच आगे बढ़ने पर कई और नाम सामने आ सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आईटी/डिजिटल वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ी धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी और तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी है।

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