फागन में सावन: लिहाफ में लिपटे थे ऋतुराज; अब भीगो-भीगो फागुणियो
KHULASA FIRST
संवाददाता

बेमौसम बारिश में इंदौर सहित आधा मध्य प्रदेश भीगा, ठंड फिर लौटी
फरवरी में झूम के बरसे बादल, माहौल में घुली ठिठुरन, ठंडी हवा ने फिर कंपकंपाया
चक्रवात व पश्चिमी विक्षोभ के कारण 24 घंटों में प्रदेश के 80 शहरों में हुई बारिश, फरवरी में चौथी बार बदला मौसम
25 किमी रफ्तार से चली ठंडी हवा, 3 डिग्री गिरा रात का पारा, अगले 3 दिन भी मौसम के मिजाज ऐसे ही रहने के आसार
इंदौर के आसमान में आज सुबह से बादलों ने फिर डाला डेरा, अलसुबह हुई बारिश से सड़कें तरबतर, बिजली हुई गुल
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
लगता है कुदरत भी इस बरस सबकी ‘फिरकी’ ले रही है। अब जब सर्दी को विदा मान लिया गया, तब सर्द बयार के साथ फिर ठिठुरन लौट रही है। बारिश का मौसम मीलों दूर है, पर झमाझम बारिश हो रही है। मावठे का एक दौर बीत गया और दूजे में अभी देर है, फिर भी बिन बुलाए बदरा बरस रहे हैं। वह भी ऐसे, जैसे सावन में बरसते हैं। छिटपुट बूंदाबांदी नहीं, मूसलधार बरसे। बुधवार के बाद शुक्रवार सुबह से भी बरस रहे हैं।
एक दिन पहले आसमान में बादल अकस्मात आ धमके। सीहोर के आसपास दूरदराज कहीं बरसे थे, लेकिन इतनी जल्दी इतना फासला पाटकर अहिल्या नगरी पर भी ये लाड़ लड़ाएंगे, रत्तीभर इल्म नहीं था। ऐसे बरसे कि जो जहां था, वहीं थमने को मजबूर हो गया। पानी में ‘गार’ नहीं थी, लेकिन था वह ‘ठंडा गार’। ऊपर से 25 किमी की रफ्तार से दौड़ रही ठंडी हवा भी। लिहाजा कोई भी भीगने की हिम्मत जुटा नहीं पाया। बिजली की दमक और बादलों की गर्जना के बीच जो जहां था, वहीं थमकर बारिश रुकने का इंतजार करने लगा।
मौसम के बदले मिजाज के मामले में लगा कि ये सब बुधवार रात तक ही सीमित था और रात गई, बात गई हो जाएगा, लेकिन गुरुवार की रात होते-होते वही बुधवार जैसे हालात बन गए। शुक्रवार सुबह जब लोग सोकर उठे तो बारिश से उनका सामना हुआ। आसमान में बादलों का ऐसा घना पहरा था कि अंधेरा-सा छा गया। सड़कें पानी से तरबतर और घर-आंगन भीगे-भीगे। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि ये ठंड को अलविदा कहती और गर्मी की अगवानी करती फरवरी है। सब कुछ एक बार फिर ठंडा-ठंडा, भीगा-भीगा।
बेमौसम की इस बारिश में इंदौर सहित आधा मध्य प्रदेश भीग गया। राज्य के 80 से ज्यादा शहरों में जोरदार बारिश हुई। उज्जैन के घट्टिया, महिदपुर, उन्हेल जैसे ग्रामीण इलाके में तो ओले भी गिर गए। खड़ी फसलें औंधे मुंह हो गईं और किसानों को भारी नुकसान हुआ। इंदौर जिले में भी सांवेर व देपालपुर तहसील में अतिवृष्टि से फसलों के नुकसान का सांसद ने जायजा लिया। सांसद ने प्रशासन को नुकसान का सर्वे करने को भी कहा है। बीते 24 घंटों में राज्य के 25 जिलों में बेमौसम बारिश हुई। इनमें मालवा-निमाड़ अंचल से लेकर श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, ग्वालियर और अशोक नगर, टीकमगढ़ तक का इलाका शामिल है।
ल गता है कुदरत भी इस बरस सबकी ‘फिरकी’ ले रही है। अब जब सर्दी को विदा मान लिया गया, तब सर्द बयार के साथ फिर ठिठुरन लौट रही है। बारिश का मौसम मीलों दूर है, पर झमाझम बारिश हो रही है। मावठे का एक दौर बीत गया और दूजे में अभी देर है, फिर भी बिन बुलाए बदरा बरस रहे हैं। वह भी ऐसे, जैसे सावन में बरसते हैं। छिटपुट बूंदाबांदी नहीं, मूसलधार बरसे। बुधवार के बाद शुक्रवार सुबह से भी बरस रहे हैं।
एक दिन पहले आसमान में बादल अकस्मात आ धमके। सीहोर के आसपास दूरदराज कहीं बरसे थे, लेकिन इतनी जल्दी इतना फासला पाटकर अहिल्या नगरी पर भी ये लाड़ लड़ाएंगे, रत्तीभर इल्म नहीं था। ऐसे बरसे कि जो जहां था, वहीं थमने को मजबूर हो गया। पानी में ‘गार’ नहीं थी, लेकिन था वह ‘ठंडा गार’। ऊपर से 25 किमी की रफ्तार से दौड़ रही ठंडी हवा भी। लिहाजा कोई भी भीगने की हिम्मत जुटा नहीं पाया। बिजली की दमक और बादलों की गर्जना के बीच जो जहां था, वहीं थमकर बारिश रुकने का इंतजार करने लगा।
मौसम के बदले मिजाज के मामले में लगा कि ये सब बुधवार रात तक ही सीमित था और रात गई, बात गई हो जाएगा, लेकिन गुरुवार की रात होते-होते वही बुधवार जैसे हालात बन गए। शुक्रवार सुबह जब लोग सोकर उठे तो बारिश से उनका सामना हुआ। आसमान में बादलों का ऐसा घना पहरा था कि अंधेरा-सा छा गया। सड़कें पानी से तरबतर और घर-आंगन भीगे-भीगे। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि ये ठंड को अलविदा कहती और गर्मी की अगवानी करती फरवरी है। सब कुछ एक बार फिर ठंडा-ठंडा, भीगा-भीगा।
बेमौसम की इस बारिश में इंदौर सहित आधा मध्य प्रदेश भीग गया। राज्य के 80 से ज्यादा शहरों में जोरदार बारिश हुई। उज्जैन के घट्टिया, महिदपुर, उन्हेल जैसे ग्रामीण इलाके में तो ओले भी गिर गए। खड़ी फसलें औंधे मुंह हो गईं और किसानों को भारी नुकसान हुआ। इंदौर जिले में भी सांवेर व देपालपुर तहसील में अतिवृष्टि से फसलों के नुकसान का सांसद ने जायजा लिया। सांसद ने प्रशासन को नुकसान का सर्वे करने को भी कहा है। बीते 24 घंटों में राज्य के 25 जिलों में बेमौसम बारिश हुई। इनमें मालवा-निमाड़ अंचल से लेकर श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, ग्वालियर और अशोक नगर, टीकमगढ़ तक का इलाका शामिल है।
रंगों के मौसम में ओले-ओले
मौसम विभाग ने कुदरत के इस बदले मिजाज का जिम्मेदार चक्रवात व पश्चिमी विक्षोभ को बताया है। मौसम महकमे का कहना है कि अगले 3 दिन भी ऐसा ही मौसम बना रहेगा। हाल-फिलहाल बारिश का अलर्ट तो नहीं, लेकिन 25 फरवरी के बाद फिर मौसम के भीगने का अंदेशा जाहिर किया गया है।
प्रकृति की इस ‘फिरकी’ ने विदा होती ठंड को रोक दिया है। रात का न्यूनतम तापमान 3 डिग्री कम होकर 15 डिग्री से नीचे आ गया। वहीं 29 डिग्री तक जा पहुंचा दिन का पारा भी 26 डिग्री तक आ गया। माहौल में ठिठुरन समा गई है। एक तरफ शहर में फागुन महीने की मस्ती बढ़ रही है और फाग उत्सवों का दौर शुरू हुआ ही, वहीं दूसरी तरफ आंधी-पानी के साथ ओले और सर्द हवा आ गई है।
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