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ड्रोन की नजर से बचा सारो क्लब: रातभर छलकते रहे जाम; सख्ती के बीच खुली मनमानी, सवालों में निगरानी सिस्टम

KHULASA FIRST

संवाददाता

13 अप्रैल 2026, 3:39 pm
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ड्रोन की नजर से बचा सारो क्लब

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह की सख्ती के बावजूद नियमों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। जहां एक ओर शहरभर में ड्रिंक एंड ड्राइव पर शिकंजा कसने के लिए चेकिंग पॉइंट और ड्रोन निगरानी जारी है, वहीं शनिवार को खजराना क्षेत्र स्थित सी 21 बिजनेस पार्क का ‘सारो क्लब’ देर रात तक खुलेआम शराबखोरी का अड्डा बना रहा।

शनिवार देर रात करीब 1 बजे तक क्लब के अंदर तेज म्यूजिक, पार्टी और शराबखोरी का दौर चलता रहा। नियमों के मुताबिक तय समय के बाद इस तरह क्लब संचालन पर रोक होती है, इसके बावजूद क्लब में खुलेआम नियमों की अनदेखी की गई।

जानकारी के मुताबिक शहर में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहर पुलिस आए दिन नए-नए प्रयोग कर रही है। विशेष तौर पर जोन-2 में इन दिनों ड्रोन के जरिए निगरानी को लेकर पुलिस काफी सक्रिय है।

चौराहों और संवेदनशील इलाकों पर ड्रोन कैमरे से नजर रखी जा रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े बिजनेस हब में स्थित पब में चल रही इस गतिविधि पर ड्रोन की नजर नहीं पड़ी। बताया जा रहा है कि लसूड़िया, विजय नगर, कनाड़िया, खजराना स्थित पब देर रात तक संचालित हो रहे हैं।

सूत्रों की माने तो रात 12 बजे तक पब-बार पूर्ण रूप से बंद करने के आदेश है, पुलिस रोजाना पब-बार पर पहुंचकर बंद भी करवाती है, लेकिन जैसे ही पुलिस मौके से निकलती वैसे ही संचालक बाहर की लाइट बंद कर या जो पब रूफ टॉप पर है वहां का साउंड बंद कर देते हैं।

इसके बाद नियम-कानून की धज्जियां उड़ाकर अंदर स्थित साउंड प्रूफ हाल में साउंड और जमकर शराब परोसी जाती है । हाल यह है कि क्लब में जो ग्राहकों को 11.30 बजते ही बाहर निकाल दिया जाना चाहिए, वे देर रात 12.30 बजे बाद बाहर निकलते हुए आराम से देखे जा सकते हैं। लसूड़िया क्षेत्र के अपोलो प्रीमियम बिल्डिंग में यह नजारे आम हैं।

डीसीपी स्तर पर चल रही सख्ती के बीच इस तरह की घटनाएं सिस्टम की कमजोर कड़ी को उजागर करती हैं। अगर नियम सबके लिए बराबर हैं, तो फिर क्लबों पर भी वही कार्रवाई जरूरी है जो आम लोगों पर की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों तेजाजी नगर बायपास पर लेट नाइट पार्टी कर लौट रहे छात्र-छात्राएं सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिनमें उन्हें अपनी जान तक गंवाना पड़ी थी। वहीं पिछले दिनों कनाड़िया थाना में पब से लौट रहे छात्रों की कार एक अन्य कार से जा भिड़ी थी, जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

उसी रात कनाड़िया बायपास पर एक युवक शराब के नशे में बिजली के खंभे में जा घुसा था। उक्त युवक भी देर रात पब से लौट रहा था। कहना गलत नहीं होगा कि यदि इन पब-बारों पर सख्ती नहीं हुई तो सड़क पर भी दिखावे के लिए सख्ती दिखाना जरूरी नहीं है, क्योंकि सड़कों पर ना तो यातायात का नियंत्रण ना ही दुर्घटनाओं का, सड़क पर नियंत्रण है तो सिर्फ चलानी कार्रवाई का।

ड्रिंक एंड ड्राइव पर सख्ती, लेकिन सोर्स पर ढील?
शहर में जगह-जगह ड्रिंक एंड ड्राइव के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस चेकिंग पॉइंट्स पर सख्ती दिखा रही है, लेकिन अगर क्लबों में ही देर रात तक शराब परोसी जाएगी तो ऐसे अभियान कितने कारगर होंगे, इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नागरिक मयूर सोलंकी का मानना है कि जब तक शराब परोसने वाले स्थानों पर सख्ती नहीं होगी, तब तक सड़क पर नियंत्रण अधूरा ही रहेगा।

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