संपदा 2.0 पंजीकृत दस्तावेज से छेड़छाड़ कर फिर किया रजिस्ट्रेशन: वैध पंजीयन के बाद इनकंप्लीट रजिस्ट्रेशन का वाटरमार्क
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
संपदा 2.0 प्रणाली के माध्यम से पंजीकृत एक विक्रय विलेख में सुनियोजित और चरणबद्ध कथित रूप से छेड़छाड़ कर उसे निरस्त करने और पुनः पंजीयन कराने का खुलासा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पंजीयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि सिस्टम में संभावित हेरफेर की आशंका भी बढ़ा दी है।
12 दिसंबर 2025 को पंजीयन क्रमांक MP7IGR17532025A101139378 के तहत एक विक्रय विलेख का विधिवत पंजीयन किया गया। सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं, स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क का भुगतान हुआ तथा दस्तावेज को पंजीयन क्रमांक, दिनांक और पृष्ठ संख्या के साथ इंडेक्स भी जारी किया गया।
इस विलेख में खरीदार के रूप में मनीषा अग्रवाल और विक्रेता के रूप में ओमप्रकाश मूलानी एवं रेणुका मूलानी (निवासी दुबई) शामिल थे। जब पंजीकृत दस्तावेज की प्रति निकाली गई, तो उसके हर पृष्ठ पर ‘इनकंप्लीट रजिस्ट्रेशन’ का वाटरमार्क अंकित मिला, जबकि दस्तावेज पूरी तरह पंजीकृत था।
शिकायत के बाद भी नहीं समाधान नहीं
पक्षकारों द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बावजूद विभाग ने वाटरमार्क हटाने में असमर्थता जताई और पुनः पंजीयन की सलाह दे दी। विक्रेता के दुबई में होने के कारण दोबारा उपस्थित होना संभव नहीं था, वहीं खरीदार ने अपूर्ण दस्तावेज स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया गया। आरोप है कि इसके बाद विभागीय स्तर पर संपदा 2.0 प्रणाली में हस्तक्षेप कर दस्तावेज को दोबारा प्रोसेस के लिए सर्विस प्रोवाइडर के पास भेजा गया।
नया स्लॉट बुक कर पुनः पंजीयन की प्रक्रिया कराई गई। इस दौरान खरीदार व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ, जबकि विक्रेता ने दुबई से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की।
कानूनी पहलू: रजिस्ट्रेशन एक्ट 1908 के अनुसार किसी भी पंजीकृत दस्तावेज को बिना न्यायालय के आदेश के निरस्त नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद उक्त दस्तावेज में छेड़छाड़ कर पुनः पंजीयन कराना कानूनसम्मत नहीं माना जा सकता।
तारीखों में गड़बड़ी
दस्तावेज पर पंजीयन दिनांक 12.12.2025 अंकित है, जबकि अन्य प्रक्रियाएं 26.02.2026 दर्शाई गई हैं। यह दर्शाता है कि दस्तावेज पहले पंजीकृत हुआ और बाद में उसकी प्रक्रिया दिखाई गई, जो गंभीर अनियमितता की ओर इशारा करता है।
यह मामला संकेत देता है कि संपदा 2.0 प्रणाली में रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ संभव है। यदि यह सच है, तो आम नागरिकों के संपत्ति संबंधी दस्तावेज भी सुरक्षित नहीं माने जा सकते। इस पूरे मामले को लेकर अधिवक्ता हितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने शासन को नोटिस भेजा है।
इसमें मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव (वाणिज्यिक कर विभाग), महानिरीक्षक पंजीयन एवं उप महानिरीक्षक पंजीयन को संबोधित करते हुए प्रमुख मांगें रखी गई हैं- पंजीकृत दस्तावेज सीधे उप-पंजीयक द्वारा पक्षकारों को दिए जाएं, जिम्मेदारी तय की जाए और धोखाधड़ी या छेड़छाड़ की स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
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