फर्जी डिग्री पर नौकरी करने वाले 24 शिक्षकों का वेतन रोका: संविदा भर्ती के पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे; लोकायुक्त की सक्रियता के बाद शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिले में शिक्षा विभाग के भीतर वर्षों से दबे एक बड़े फर्जी नियुक्ति प्रकरण ने अब गंभीर रूप ले लिया है। फर्जी अंकसूचियों और संदिग्ध डिग्रियों के सहारे सरकारी स्कूलों में नौकरी हासिल करने के आरोपों में 74 शिक्षकों को जांच के घेरे में लिया गया है।
लोकायुक्त की सक्रियता के बाद शिक्षा विभाग ने मामले में सख्ती दिखानी शुरू कर दी है और पहले चरण में 24 शिक्षकों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। यह कार्रवाई उन शिक्षकों पर की गई है, जिन्होंने विभाग की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
इस कार्रवाई ने न सिर्फ संदिग्ध शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, बल्कि उन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्होंने नियुक्ति के समय दस्तावेजों की जांच में कथित रूप से ढिलाई या चुप्पी बरती। पूरा मामला वर्ष 2006-07 में सांवेर जनपद पंचायत के माध्यम से हुई संविदा शिक्षक भर्ती से जुड़ा हुआ है।
उस दौर में नियुक्त किए गए कई शिक्षकों के दस्तावेजों को अब दोबारा खंगाला जा रहा है।लोकायुक्त के हस्तक्षेप के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने इन शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत डीएड और बीएड की अंकसूचियों का मिलान माध्यमिक शिक्षा मंडल के रिकॉर्ड से कराया था।
रोल नंबर किसी और के, डिग्री किसी और की
कई शिक्षकों ने जो अंकसूचियां और डिग्रियां पेश की थीं, उनमें दर्ज रोल नंबर रिकॉर्ड में किसी दूसरे परीक्षार्थी के नाम पर पाए गए। यानी कागजों में जो प्रमाणपत्र नौकरी पाने के लिए लगाए गए, वे न केवल संदिग्ध निकले, बल्कि कई मामलों में सीधे फर्जी होने की पुष्टि भी हुई। सबसे गंभीर बात यह है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल ने लिखित रूप में यह स्पष्ट कर दिया है कि विभाग को सौंपी गई कई डिग्रियां और अंकसूचियां उनके द्वारा जारी ही नहीं की गई थीं।
जांच के दायरे में कई नाम ऐसे भी हैं, जो महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि कार्रवाई कुछ शिक्षकों तक सीमित मामला नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे शिक्षा विभाग में जमे एक पुराने भर्ती नेटवर्क की परतें खुलने के तौर पर देखा जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन 24 शिक्षकों का वेतन रोका गया है, वह केवल शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई है।
अधिकारी का पक्ष: जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी भार्गव ने बताया कि फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाने की शिकायतों के बाद मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि 26 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इनमें से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर 24 शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है।
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