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रिटायर्ड डीएसपी और पत्नी से बदसलूकी पर भड़के रिटायर्ड पुलिस अधिकारी: दर्ज केस की जांच भोपाल सीआईडी से कराने और पन्ना एसपी पर कार्रवाई की मांग

KHULASA FIRST

संवाददाता

14 अप्रैल 2026, 1:20 pm
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खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
पन्ना जिले में पुलिस कार्रवाई पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 80 वर्षीय सेवानिवृत्त डीएसपी भरतसिंह चौहान और उनकी पत्नी राजश्री चौहान के साथ कथित दुर्व्यवहार और कानून का दुरुपयोग कर केस दर्ज किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सेवानिवृत्त राजपत्रित पुलिस अधिकारी कल्याण समिति ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि भरतसिंह चौहान, जो अपने समय के बेहतरीन पुलिस अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं, हाल ही में अपनी पत्नी के साथ मैहर से ग्वालियर रिश्तेदारों के यहां जा रहे थे।

उनके पास एक लाइसेंसी बंदूक थी, जो उनकी पत्नी राजश्री चौहान के नाम पर है। पहले घर से बंदूक चोरी हो चुकी थी, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से वे इसे साथ लेकर चल रहे थे। वे ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठे थे।

जान से मारने की धमकी का केस दर्ज कर लिया- बताया गया कि 7 अप्रैल को दोपहर करीब 12.30 बजे पन्ना जिले में वाहन चेकिंग के दौरान मंडला पुलिस के एक आरक्षक ने उन्हें रोका। आरोप है कि आरक्षक ने सीट बेल्ट नहीं लगाने जैसी बात पर आक्रामक रवैया अपनाया और मामला बढ़ा दिया।

इसके बाद 80 वर्षीय बीमार रिटायर्ड डीएसपी और उनकी पत्नी पर शासकीय कार्य में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए केस दर्ज कर लिया गया। इतना ही नहीं, पुलिस ने मौके पर ही उनकी लाइसेंसी बंदूक भी जब्त कर ली।

समिति का आरोप है कि एक सिपाही की रिपोर्ट पर इतनी बड़ी कार्रवाई कर दी गई और बाद में एसपी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले को प्रचारित भी किया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। कल्याण समिति ने इसे कानून के दुरुपयोग और अमानवीय व्यवहार बताते हुए ज्ञापन में चार मांगें रखी हैं, जो केस दर्ज किया है उसे पन्ना से हटाकर सीआईडी भोपाल को सौंपा जाए, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। पन्ना की महिला एसपी पर कार्रवाई की जाए।

देशभक्ति-जनसेवा की कसम भूल गए
मौके पर मौजूद कुछ रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों का कहना था कि आजकल के पुलिसकर्मी रिटायर्ड अधिकारी तो दूर सीनियर सिटीजन से भी अच्छे से पेश नहीं आते हैं। देशभक्ति-जनसेवा की कसम खाने वाले पुलिसकर्मी फोन करने पर भी ठीक से बात नहीं करते हैं।

जबकि सरकार और डीजी का आदेश है कि सीनियर सिटीजन, रिटायर्ड अधिकारियों से बीट के पुलिसकर्मियों को मिलना-जुलना चाहिए। उनका ध्यान रखना चाहिए। पूर्व पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र ने तो इसके लिए अभियान तक चलाया था।

उनके जाते ही इस अच्छी पहल पर ग्रहण लग गया। हर थाने में एक पेंशन दारण रजिस्टर होता है, जिसमें पेंशनदारों के नाम-पते और मोबाइल नंबर लिखे होते हैं।

बीट के पुलिसकर्मियों को ऐसे लोगों से मिलना-जुलना चाहिए। कुछ नहीं तो उनसे मोबाइल पर बात ही कर लेना चाहिए। उनकी खैरियत का ध्यान रखना चाहिए और मदद करना चाहिए।

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