कॉलेज संचालक से करोड़ों की फिरौती: फायरिंग की थी तैयारी; रिमांड में आरोपी ने कबूला लॉरेंस गैंग से कनेक्शन, विदेश से ऑपरेट हो रहा नेटवर्क
KHULASA FIRST
संवाददाता

इंदौर, महू, भोपाल समेत कई शहरों के कारोबारियों को बनाया निशाना
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कॉलेज संचालक और कारोबारियों को करोड़ों की फिरौती के लिए धमकाने के मामले में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की एंट्री सामने आई है। रिमांड पर लिए गए आरोपी मनीष जांगिड़ ने गैंग के शार्प शूटर ऋतिक बॉक्सर व सरगना हैरी बॉक्सर से जुड़े होने की बात स्वीकार की है। खुलासा हुआ है कि आरोपी इंदौर में हवाई फायरिंग और पेट्रोल बम फेंककर दहशत फैलाने की तैयारी में था। पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को नामजद कर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ना शुरू कर दिया है।
एडिशनल डीसीपी (क्राइम) राजेश दंडोतिया के मुताबिक निपानिया डीबी सिटी निवासी कॉलेज संचालक रंजन मित्तल को 7 फरवरी को इंटरनेशनल वर्चुअल नंबरों से धमकीभरे कॉल आए थे। आरोपियों ने करोड़ों की फिरौती मांगी थी।
मित्तल पिपल्याकुमार क्षेत्र में इस्बा ग्रुप के नाम से कॉलेज चलाते हैं। पुलिस ने जांच तेज करते हुए आरोपी मनीष जांगिड़ को अशोक नगर से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया।
पूछताछ में सामने आया कि जयपुर निवासी शार्प शूटर ऋतिक बॉक्सर अजमेर जेल में बंद रहते हुए गैंग का नेटवर्क चला रहा था। वह लॉरेंस गैंग से जुड़ा है और हैरी बॉक्सर के निर्देश पर काम करता है। आरोपी इंटरनेट आधारित एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप के जरिए संपर्क में रहते थे।
मनीष को ऋतिक के माध्यम से हैरी बॉक्सर से जोड़ा गया था, जिसके बाद उसने कारोबारियों को धमकाना शुरू किया। मामले में इंटेलिजेंस इनपुट मिलने के बाद एसटीएफ ने भी जांच शुरू की है। अब फरार आरोपियों की तलाश जारी है व गैंग से जुड़े अन्य नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि बीकानेर और भिंड के कियोस्क संचालकों से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए जाते थे। मामले में दीपक सुतार व पवन शर्मा को गिरफ्तार किया गया है, जबकि प्रदीप शुक्ला फरार बताया जा रहा है। आरोपियों के तार आगरा और गोवा से भी जुड़े पाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार आरोपी इंदौर आकर कॉलेज संचालक और अन्य कारोबारियों के ठिकानों पर हवाई फायरिंग और पेट्रोल बम फेंककर दहशत फैलाने की तैयारी में था। अशोक नगर के एक कारोबारी को भी इसी तरह धमकाया गया था।
आरोपी गैंग के निर्देश पर अलग-अलग शहरों के उद्योगपतियों और व्यापारियों की जानकारी जुटाकर उन्हें वॉइस नोट और कॉल के जरिए धमका रहे थे।
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