तीन दिन के रिमांड पर फिरौती गैंग… अब खुलेगा पूरा काला चिट्ठा!: फ्लैट की तलाशी आज, दो बिल्ली और दो चूहों को भी किया आजाद
KHULASA FIRST
संवाददाता

अपहरण के बाद पांच घंटे में पुलिस ने कर लिया था गिरफ्तार
खुलासा फर्स्ट…इंदौर
ग्रेटर तिरुपति गार्डन से दो बच्चों के अपहरण में अब असली जांच शुरू हो रही है। पुलिस तीन दिन के रिमांड के बाद आरोपियों से पूछताछ करेगी, ताकि पता लगाया जा सके कि गैंग पहले भी ऐसी वारदात तो नहीं कर चुकी। आज उस फ्लैट की बारीकी से तलाशी होेगी, जहां बच्चों को बंधक बनाकर रखा गया था।
एसीपी तुषार सिंह के मुताबिक आरोपियों राधिका पिता राजेश प्रजापति, निवासी कैट रोड, विनीत पिता राजेश प्रजापति निवासी कैट रोड, हाल मुकाम तिलक नगर एक्सटेंशन, तनीषा पति ललित सेन निवासी दत्त नगर, राजेंद्र नगर, ललित पिता दशरथ सेन निवासी सुतलिया राजगढ़, हाल मुकाम दत्त नगर को कोर्ट में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है। पूछताछ का फोकस इस पर रहेगा कि ज्वेलरी शॉप लूट की योजना के अलावा और कौन-कौन से क्राइम प्लान किए थे?
राधिका ने बच्चों के अपरहण के बाद उन्हें रास्ते में चिप्स, टॉफी और पानी दिलाया। फ्लैट में मैगी खिलाई और गेम खेलने दिया। फिर जानवर देने का लालच देती रही। जब बच्चों ने घर जाने की जिद की तो आरोपियों ने उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। जब पुलिस ने दबिश दी तो आरोपियों ने बच्चों को गंुडे आ गए कहकर छिपने और चादर ओढ़कर चुप रहने को कहा।
बेरोजगारी और लालच बना अपराध की वजह
इधर, जांच में सामने आया कि अपहरण कांड के मास्टर माइंड विनीत छह महीने से बेरोजगार था। उस पर बकाया किराया और कर्ज का दबाव था। राधिका टेलीकॉलिंग करती थीं, लेकिन कुछ समय से वह भी पैसे की तंगी झेल रही थी। वहीं तनीषा और ललित भी आर्थिक तंगी में थे। जिसके चलते विनीत राधिका ने पहले ज्वेलरी शॉप लूटने की योजना बनाई, जिसमें तनीषा और ललित को शामिल किया, लेकिन पकड़े जाने के डर से बच्चों के अपहरण का प्लान बना लिया। विनीत घटना स्थल के पास तिलकनगर एक्सटेंशन में ही किराए से रहता था। जिसके चलते उसने और राधिका ने तिलकनगर के समीप ही पॉश इलाके की रेकी की और ग्रेटर तिरुपति गार्डन पहुंचे, जहां उन्हें लगा कि यह बच्चे अमीर घर के हैं, जिनके चलते वह उन्हें दो दिन तक रोजाना आकर कुता, बिल्ली, चूहा देने का कहकर बहला फुसलाते रहे। आरोपियों को भनक तक नहीं थी कि बच्चे गन्ने का ठेला लगाने और बैंड बजाने वाले के है।
कमजोर प्लानिंग के कारण मुंह की खाई
पुलिस को शक है कि आरोपियों ने जल्द पैसा कमाने के लिए अपराध की दुनिया में कदम रखा और यह उनका पहला बड़ा प्रयास था, लेकिन कमजोर प्लानिंग के कारण उन्हें मुंह की खानी पड़ी। हालांकि आज पलासिया पुलिस फ्लैट की जांच में यह देखेगी कि बच्चों को कैसे और कहां छिपाया गया ,कौन-कौन से डिजिटल और फिजिकल सबूत मौजूद हैं। फिरौती मांगने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल, सिम और डिवाइस संभावना है कि फ्लैट से कई ऐसे सुराग मिल सकते हैं, जो कि इस केस को और गहराई तक ले जाएंगे।
पुलिस कमिश्नर करते रहे केस की मॉनीटरिंग
पूरे ऑपरेशन के दौरान पुलिस कमिश्नर के नेतृत्व में मॉनीटरिंग होती रही। पांच टीमों ने मिलकर लोकेशन ट्रेस की सीसीटीवी फुटेज से सुराग मिला। सही समय पर रेड कर बच्चों को बचाया गया। राहत मिलने के बाद दोनों बच्चों ने पुलिस कमिश्नर को सैल्यूट किया। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने उन्हें बस्ता, कॉपी और पानी की बोतल गिफ्ट की। मामले का खुलासा होने पर बड़ी संख्या में बच्चों के परिजन और रहवासी पहुंचे थे, जिन्होंने पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह, एडीसीपी रामस्नेही मिश्रा एसीपी तुषार सिंह और टीआई सुरेंद्र सिंह रघुवंशी को फूल माला पहनाकर उनका आभार माना। इस दौरान परिवार भावुक हो गया था।
अब पुलिस खंगालेगी पुराने राज, क्या पहले भी दे चुके हैं वारदात को अंजाम?
‘जानवरों’ को बनाया था लालच का ‘जाल’
वहीं इस केस का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि आरोपियों ने मासूम बच्चों को फंसाने के लिए कुत्ते, बिल्ली और चूहों का इस्तेमाल किया। जब पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा तो जल्दबाजी में फ्लैट बंद कर दिया गया था, जिसके अंदर एक कुत्ता था। जब आरोपियों से यह जानकारी लगी तो एक टीम तुरंत फ्लैट पर भेजकर पुलिस ने कुत्ते को आजाद किया। यहां टीम को कुत्ते के अलावा दो पालतू बिल्लियां, दो चूहे भी बंद मिले। बाद में पुलिस ने सभी जानवरों को सुरक्षित बाहर निकालकर आरोपियों के परिजन को सौंप दिया। खास बात यह है कि इन्हीं जानवरों के वीडियो और तस्वीरें दिखाकर बच्चों को बहलाया गया था। आरोपी राधिका बच्चों को गार्डन से यह कहकर ले गई कि उन्हें कुत्ते-बिल्ली दिखाएगी।
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