राममंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट में बोले सॉलिसिटर जनरल एसआईटी रिपोर्ट अजनबियों को नहीं दी जा सकती
KHULASA FIRST
संवाददाता

धर्मपथ, न्याय की आस
सुझाव देने की छूट; कोर्ट ने कहा जनहित की भावना रखने वाला कोई भी व्यक्ति जांच से संबंधित अपने सुझाव सॉलिसिटर जनरल के कार्यालय को दे सकता है
खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की सोमवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि उन्हें भी जांच से जुड़ी रिपोर्ट दी जानी चाहिए, ताकि वे अदालत की मदद कर सकें। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- जांच रिपोर्ट ऐसे लोगों को नहीं दी जा सकती, जो मामले से सीधे जुड़े नहीं हैं।
इस पर वकील ने कहा- हम अजनबी नहीं हैं। यह याचिका भारत की जनता की ओर से दायर की गई है। उन्होंने कहा- हमें सच जानने का मौलिक अधिकार है। अगर जांच से जुड़ी जानकारी किसी आरोपी या जांच में मदद कर रहे व्यक्ति को दे दी गई और याचिकाकर्ताओं को इससे दूर रखा गया, तो वे अदालत की सहायता करने की स्थिति में नहीं रहेंगे।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा... एसआईटी का गठन हमने किया है। यह अदालत के प्रति जवाबदेह और उत्तरदायी है। इसे अपनी रिपोर्ट हमें ही सौंपनी होगी। एक फॉरेंसिक ऑडिटर वाली एसआईटी अपनी स्टेटस रिपोर्ट बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करे।
रिपोर्ट को पहले हम देखेंगे। उसके बाद तय करेंगे कि इसे सभी पक्षों को सौंपा जाए या नहीं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें चढ़ावा चोरी की सीबीआई जांच की मांग की गई थी।
इससे पहले, कोर्ट ने 27 जुलाई को एसआईटी में फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया था, ताकि वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाने के लिए खातों और रिकॉर्ड्स की जांच कराई जा सके। कोर्ट ने 20 जुलाई को यूपी सरकार को नए सिरे से विशेष जांच टीम गठित करने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता या अन्य कोई नेक नीयत वाले और जनहित की भावना रखने वाले व्यक्ति सॉलिसिटर जनरल के ऑफिस को अपने सुझाव दे सकते हैं। ये सुझाव उन पहलुओं के बारे में हो सकते हैं, जिनकी एसआईटी की तरफ से गहन जांच की जरूरत हो। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हमें जांच रिपोर्ट एक कॉपी दी जानी चाहिए, ताकि हम कोर्ट की सहायता कर सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच रिपोर्ट किसी अनजान व्यक्ति या बाहरी पक्ष के साथ साझा नहीं की जा सकती। वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हम अनजान नहीं हैं। यह याचिका भारत की जनता की ओर से दायर की गई है। हमें सच जानने का मौलिक अधिकार है।
मैं एक और बात आपके सामने रखना चाहूंगा- यह मामला इस अदालत के सामने विचाराधीन है और मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से एसआईटी के निष्कर्षों का हवाला देकर कह रहे हैं कि इसमें कोई साधू शामिल नहीं है। वहीं
सीजेआई ने कहा कि यदि एसआईटी अपना काम संतोषजनक ढंग से कर रही है, तो वह एक अलग विषय है। लेकिन, अगर आपको लगता है कि उनके काम में कोई कमी है और इसमें सुधार की जरूरत नहीं है, तो हमारा रुख खुला है। हम नए दिशा-निर्देश जारी कर सकते हैं। चूंकि, जांच अभी चल रही है, इसलिए मामले को आगे विचार के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
एसआईटी ने फिर खंगाले बैंक लॉकर, कर्मचारियों से पूछताछ...श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की एसआईटी जांच अभी जारी है। जांच के क्रम में गठित फोरेंसिक ऑडिट टीम ने सोमवार को अयोध्या पहुंचकर ट्रस्ट के बैंक लॉकर और वित्तीय अभिलेखों की दोबारा जांच की।
टीम ने बैंक में ट्रस्ट से संबंधित दस्तावेजों, लॉकर से जुड़े अभिलेखों और लेनदेन संबंधी रिकॉर्ड का परीक्षण किया। इस दौरान बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों से भी आवश्यक जानकारी ली गई। जांच के दौरान ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन और सचिव जगदीश आफले भी मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, फोरेंसिक ऑडिट टीम जांच के प्रत्येक वित्तीय पहलू को दस्तावेजी और तकनीकी आधार पर सत्यापित कर रही है। इससे पहले भी टीम लगातार चार दिनों तक बैंक में ट्रस्ट के लॉकर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर चुकी है। सोमवार को हुई पड़ताल को उसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है।
टीम ने ट्रस्ट की सालाना आय-व्यय से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट और वित्तीय अभिलेखों की भी जांच की। आय के स्रोत, विभिन्न मदों में हुए भुगतान, खर्च से संबंधित दस्तावेज और ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों का आपसी मिलान किए जाने की जानकारी है।
सूत्रों ने बताया कि फोरेंसिक ऑडिट का उद्देश्य वित्तीय रिकॉर्ड में दर्ज प्रविष्टियों और वास्तविक लेनदेन के बीच किसी तरह की विसंगति होने की स्थिति में उसका पता लगाना है। फिलहाल फोरेंसिक ऑडिट टीम की ओर से जांच के निष्कर्षों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच पूरी होने के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट से ही वित्तीय अभिलेखों की पड़ताल के निष्कर्ष स्पष्ट होंगे।
डॉ. अनिल मिश्र के पीए सहित दो कर्मियों ने दिया इस्तीफा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में कार्यरत दो कर्मचारियों के इस्तीफे की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, डॉ. अनिल मिश्र के पीए के रूप में कार्यरत एक कर्मचारी ने हाल में इस्तीफा दिया है। हालांकि, उनके इस्तीफे का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
वहीं, ट्रस्ट के दान काउंटर पर कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत एक अन्य कर्मचारी ने करीब एक सप्ताह पहले इस्तीफा दिया था। ट्रस्ट ने दोनों इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, कंप्यूटर ऑपरेटर ने अपने इस्तीफा पत्र में तीन वर्षों से ट्रस्ट में कार्यरत होने का उल्लेख किया है। पत्र में वेतन में अब तक केवल 900 रुपये की वृद्धि होने की बात भी कही गई है। बताया गया है कि कर्मचारी करीब नौ हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहा था।
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