भागीरथपुरा दूषित जलकांड पर हाई कोर्ट का बड़ा खुलासा: 1990 से बेपटरी व्यवस्था अफसरों की घोर लापरवाही; फाइलों की सुस्ती ने छीनी जानें
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर को दहला देने वाले भागीरथपुरा दूषित जलकांड में हाईकोर्ट द्वारा 112 पन्नों की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने के बाद प्रशासनिक और नगर निगम अमले में हड़कंप मच गया है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता द्वारा सौंपी गई इस विस्तृत रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि 35 बेकसूर लोगों की मौत किसी इत्तेफाक का नतीजा नहीं थी, बल्कि यह दशकों से चली आ रही संस्थागत अनदेखी, तकनीकी विफलता और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही की परिणति थी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार शहर के बुनियादी ढांचे में 1990 से ही गंभीर खामियां पनप रही थीं। चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इंदौर विकास प्राधिकरण और नगर निगम के पास 1990 से 2000 के बीच हुए सीवरेज और पेयजल कार्यों का कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं है।
उस दौरान पदस्थ अधिकारियों में से मुख्य अभियंता आरपी गुप्ता और परियोजना निदेशक सीएम डगावकर का निधन हो चुका है, जबकि तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जेपी पाठक, सहायक अभियंता रमन महाजन और उपयंत्री यशवंत वर्मा सेवामुक्त हो चुके हैं।
महत्वपूर्ण फाइलों में अकारण पाई गई देरी... अतिरिक्त आयुक्त स्तर पर निविदाओं में बरती गई सुस्ती को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त भव्या मित्तल और रोहित सिसोनिया के कार्यकाल के दौरान पाइपलाइन बदलने से जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलों में अकारण देरी पाई गई।
उदाहरण के तौर पर भागीरथपुरा की निविदा फाइल पर 15 अक्टूबर 2025 को चर्चा के लिए लिखा गया था, लेकिन यह चर्चा 72 दिनों के भारी अंतर के बाद 26 दिसंबर 2025 को हो सकी।
वर्ष 2022 की शुरुआती निविदा प्रक्रिया के समय अतिरिक्त आयुक्त भव्या मित्तल, कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव, सहायक अभियंता सरोज प्रजापति, उपयंत्री विनोद बागरी, प्रभारी तकनीकी अधिकारी शरद सोनी, निविदा शाखा अधिकारी नीति चौरसिया और निविदा लिपिक प्रज्ञा तिवारी तैनात थे।
उस समय की निविदा समिति में अधीक्षण अभियंता श्रीकांत कांटे, अतिरिक्त आयुक्त वित्त देवधर दरवाई और अतिरिक्त आयुक्त अभय राजनगांवकर शामिल थे।
फाइल पर हस्ताक्षर में 66 दिन का अंतर... प्रशासनिक मोर्चे पर तत्कालीन निगमायुक्त शिवम वर्मा (वर्तमान इंदौर कलेक्टर), दिलीप यादव (वर्तमान प्रबंध संचालक पर्यटन निगम) और प्रतिभा पाल (वर्तमान सागर कलेक्टर) के स्तर पर कोई नीतिगत या प्रक्रियात्मक देरी नहीं पाई गई है।
इसी प्रकार अतिरिक्त आयुक्त अभिलाष मिश्रा, सिद्धार्थ जैन और अभिषेक गेहलोत को भी फाइलों की सुस्ती के आरोप से मुक्त माना गया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के स्तर पर फाइल पर हस्ताक्षर में 66 दिन का अंतर जरूर आया, लेकिन जांच समिति ने स्पष्ट किया कि फाइलों का तकनीकी रखरखाव और समय पर प्रस्तुतिकरण प्रशासनिक विंग का कार्य है, इसलिए उन्हें जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।
ठेकेदार माल्या इंजीनियरिंग ने भी काम पूरा करने में 600 दिन की अत्यधिक देरी की। तत्कालीन निगमायुक्त आशीष सिंह और अतिरिक्त आयुक्त संदीप सोनी भी सीधे जिम्मेदार नहीं पाए गए, यद्यपि 2019 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दी गई चेतावनी रिपोर्ट पर समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई न करने का उल्लेख रिपोर्ट में प्रमुखता से मौजूद है।
भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या अचानक उत्पन्न नहीं हुई थी। वर्ष 2025 से ही पानी के नमूनों में खतरनाक बैक्टीरिया पाए जा रहे थे और स्थानीय नागरिक लगातार शिकायतें कर रहे थे।
संकरी गलियों में पेयजल और सीवर लाइनें बेहद पास-पास थीं और कई जगह क्रॉस कर रही थीं। पुलिस चौकी के पास बने सेप्टिक टैंक से हो रहे निरंतर रिसाव ने पानी को जहरीला बना दिया।
समय रहते सतर्कता न बरतने के कारण यह जानलेवा त्रासदी घटी और अब रिपोर्ट उजागर होने के बाद दोषी अफसरों पर विभागीय व कानूनी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
लीकेज की चेतावनियों को नहीं लिया गंभीरता से... रिपोर्ट ने इस पूरी त्रासदी की जवाबदेही को तीन अलग-अलग स्तरों में विभाजित किया है। सबसे मुख्य और सीधी लापरवाही जल शाखा के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव के स्तर पर पाई गई है, जो वर्ष 2013 से इसी पद पर काबिज थे।
लंबी अवधि तक पद पर बने रहने के बावजूद उन्होंने न तो पाइपलाइनों के रखरखाव पर ध्यान दिया, न ही लीकेज की चेतावनियों को गंभीरता से लिया। निविदा प्रक्रिया अटकाने और वर्क ऑर्डर जारी करने में देरी के लिए भी उन्हें प्राथमिक रूप से कटघरे में खड़ा किया गया है।
संबंधित समाचार

इंडिया-वेस्टइंडीज T20 मुकाबला:स्टेडियम में तैयारियां तेज; पिच से सुरक्षा तक इंतजाम शुरू, फैंस में भारी उत्साह

MP के युवाओं के लिए सुनहरा मौका:कांस्टेबल ड्राइवर के पदों पर निकली भर्ती; जानिए आवेदन की पूरी प्रोसेस

मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे पर अड़े राहुल गांधी:जंतर-मंतर जाने को लेकर पुलिस से बहस; प्रियंका का सड़क पर लेटकर धरना

रिकॉर्ड में एक दुकान, मौके पर अवैध मल्टी खड़ी कर डकार गए एमओएस:जोन-13 में बिल्डर की धांधली- नक्शा बदलकर लाखों का राजस्व डुबाया

बाउंड ओवर नोटिस से नाराज 28 पार्षदों का सामूहिक इस्तीफा:आधी रात थाने पर धरना; इनके पहुंचने पर माने

MP में बढ़ा हुआ बस किराया कम करने की तैयारी:मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए ये निर्देश

मंदिर से चोरी अष्टधातु प्रतिमाएं बरामद:पुलिस ने आरोपी को पकड़ा; चार साथियों के नाम का खुलासा

बैंक अधिकारी बनकर नगर निगम ठेकेदार से ठगी:खाते से उड़ाए हजारों रुपए; शिकायत के बाद केस दर्ज

परिवार ने कलेक्टर से लगाई गुहार:धमकी और मानसिक प्रताड़ना की शिकायत; सरकारी के बाद अब निजी जमीन पर कब्जे का आरोप

MP में पटवारियों पर कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद:4 सस्पेंड; 52 को सेवा समाप्ति का नोटिस, काम बंद करने की दी चेतावनी

3 साल से स्पीड ब्रेकर की मांग अधूरी, लोग नाराज:स्कूटी से गिरकर महिला हो चुकी है घायल

जनसुनवाई में अधिकारियों को सौंपा दूषित पानी का गिफ्ट:नगर निगम की नाकामी; 6 महीने से गंदा पानी पीने को मजबूर है जनता

देखिए वीडियो, पांच मंजिला इमारत ढही:इतने लोगों के दबे होने की आशंका; दो बच्चे सुरक्षित निकाले गए, रेस्क्यू जारी

सड़कों पर पसरी गंदगी, गलियों में न झाड़ू लगी, न पहुंची कचरा गाड़ियां:नंबर वन शहर की सफाई व्यवस्था बेपटरी

कांग्रेस पार्षद का निधन:अस्पताल में तोड़ा दम; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी श्रद्धांजलि

आटा चक्की चलाते-चलाते प्रॉपर्टी लाइन का बड़ा ब्रोकर बन गया गुड्डा:बंटी नागर ने भी निभाया याराना; दोनों ने जमकर कूटा माल

फर्नीचर गोदाम में लगी भीषण आग:करोड़ों रुपए का सामान जलकर हुआ राख; 7 फायर ब्रिगेड मौके पर

तू गलत कर रहा है हमें तो प्लॉट लग रहा है:विकास जरिया को धमकाने की रिकॉर्डिंग आई सामने

रावण दहन के विरोध में समाज:इतने आयोजकों को कानूनी नोटिस; कहा-‘प्रथा बंद करें, नहीं तो आंदोलन करेंगे’

40 साल से बसे 400 परिवार सरकारी रिकॉर्ड और मूलभूत सुविधाओं से बाहर:स्वामित्व योजना में राऊ की एक भी रजिस्ट्री नहीं
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!