आयुष्मान योजना में आज से बड़ा बदलाव: इन 4 शहरों के निजी अस्पतालों पर NABH की शर्त लागू
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत ‘निरामयम्’ योजना के तहत इलाज कराने वाले मरीजों से जुड़ा बड़ा बदलाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है।
NABH प्रमाणन की शर्त महत्वपूर्ण हो जाएगी
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के लिए अब NABH प्रमाणन की शर्त महत्वपूर्ण हो जाएगी।
सरकार ने यह व्यवस्था अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े मानकों को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू करने का फैसला किया है।
समयसीमा 30 सितंबर को समाप्त हो गई
पहले यह नियम 1 अप्रैल से लागू होना था, लेकिन अस्पतालों को तैयारी के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था। अब यह समयसीमा 30 सितंबर को समाप्त हो गई है।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, नई व्यवस्था से चारों शहरों के करीब 250 से ज्यादा निजी अस्पताल प्रभावित हो सकते हैं।
मरीजों को कहां आ सकती है परेशानी?
अगर किसी अस्पताल की आयुष्मान संबद्धता या संबंधित पैकेज की पात्रता नई शर्तों के कारण प्रभावित होती है, तो वहां आयुष्मान कार्ड के जरिए कैशलेस इलाज उपलब्ध नहीं रहेगा। ऐसे में मरीजों को दूसरे संबद्ध अस्पताल का रुख करना पड़ सकता है।
इसका सीधा असर उन अस्पतालों पर मरीजों की संख्या बढ़ने के रूप में पड़ सकता है, जहां आवश्यक NABH प्रमाणन उपलब्ध है। इससे कुछ अस्पतालों में इलाज के लिए प्रतीक्षा समय बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
हालांकि, मरीज का आयुष्मान कार्ड या योजना के तहत मिलने वाला मूल कवरेज खत्म नहीं होगा। बदलाव मुख्य रूप से अस्पताल की योजना से संबद्धता और संबंधित पैकेज की पात्रता से जुड़ा है।
मेडिसिन पैकेज के लिए नियम ज्यादा सख्त
नई व्यवस्था में मेडिसिन पैकेज को लेकर प्रमाणन की शर्त अपेक्षाकृत कड़ी है। चारों शहरों में इस पैकेज के तहत आयुष्मान मरीजों का इलाज जारी रखने के लिए अस्पताल को फाइनल यानी फुल NABH प्रमाणपत्र हासिल करना होगा।
जिन अस्पतालों के पास फिलहाल एंट्री-लेवल NABH प्रमाणन है, उन्हें मौजूदा प्रमाणपत्र की वैधता तक संबंधित पैकेज के तहत इलाज की अनुमति मिल सकती है।
प्रमाणपत्र की अवधि समाप्त होने के बाद फुल NABH की आवश्यकता होगी। वहीं अन्य आयुष्मान पैकेज के लिए कम से कम एंट्री-लेवल NABH प्रमाणन की शर्त रखी गई है।
निजी अस्पतालों की बढ़ी चिंता
नई व्यवस्था को लेकर निजी अस्पताल संचालकों की ओर से आपत्ति भी सामने आई है। अस्पताल संगठनों का कहना है कि NABH प्रमाणन की प्रक्रिया में छोटे और मध्यम अस्पतालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
निजी अस्पतालों की एक अन्य प्रमुख चिंता आयुष्मान योजना के भुगतान में देरी को लेकर है। अस्पताल संचालकों का दावा है कि लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण दवाओं, कर्मचारियों और अन्य संचालन खर्चों का प्रबंधन मुश्किल हो रहा है।
कुछ निजी अस्पताल संगठनों ने नियमों में राहत नहीं मिलने की स्थिति में 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना के बहिष्कार की चेतावनी भी दी है।
पहले भी हो चुकी है अस्पतालों पर कार्रवाई
NABH से जुड़ी शर्तों को लेकर इस साल पहले भी अस्पतालों को नोटिस और कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। अप्रैल 2026 में करीब 125 अस्पतालों को NABH प्रक्रिया पूरी करने के संबंध में नोटिस दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।
हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में प्रभावित अस्पतालों की संख्या अलग बताई गई है। इसलिए 1 अक्टूबर के बाद वास्तविक रूप से कितने अस्पतालों की संबद्धता या पैकेज प्रभावित होती है, यह अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकार का फोकस इलाज की गुणवत्ता पर
NABH प्रमाणन अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, साफ-सफाई, दवाओं की व्यवस्था, नर्सिंग सेवाएं, आपातकालीन व्यवस्था, मेडिकल रिकॉर्ड और इलाज की प्रक्रियाओं जैसे कई मानकों का मूल्यांकन करता है।
सरकार का तर्क है कि इन मानकों को आयुष्मान योजना से जोड़ने से मरीजों को बेहतर और मानकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
फुल NABH वाले अस्पतालों को मिल सकता है सीधा लाभ
जिन अस्पतालों के पास पहले से फुल NABH प्रमाणपत्र है, उनके लिए योजना से जुड़ने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान रखी गई है। ऐसे अस्पतालों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत ‘डीम्ड इंपैनलमेंट’ का लाभ मिलने की व्यवस्था बताई गई है।
दूसरी ओर, जिन अस्पतालों के पास अभी प्रमाणन नहीं है, उन्हें निर्धारित मानकों को पूरा कर NABH प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
पूरे मध्य प्रदेश में एक साथ लागू नहीं
इस बदलाव का दायरा फिलहाल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के आयुष्मान संबद्ध अस्पतालों तक सीमित बताया गया है। यानी प्रदेश के हर जिले के अस्पतालों पर एक जैसी शर्त लागू होने की बात नहीं है।
अब 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना अहम होगा कि कितने अस्पताल आवश्यक प्रमाणन पूरा कर पाते हैं और कितने अस्पतालों के आयुष्मान पैकेज प्रभावित होते हैं।
मरीजों के लिए सबसे जरूरी बात: आयुष्मान कार्ड की पात्रता अलग विषय है। किसी अस्पताल के योजना से बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि मरीज का आयुष्मान कार्ड या उसका मूल कवरेज खत्म हो गया।
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