मानसून ने बढ़ाई निगम की चिंता: 26 साल में दूसरा सबसे सूखा सीजन; घर-घर शुरू किया सर्वे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इस साल कमजोर मानसून ने शहर और आसपास के इलाकों के लिए आने वाले दिनों में पानी और खेती से जुड़ी चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
मानसून सीजन करीब 23 इंच बारिश के साथ खत्म हुआ, जो सामान्य औसत से लगभग 14 इंच कम है।
26 साल में दूसरा सबसे सूखा सीजन
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले 26 वर्षों में शहर का दूसरा सबसे कम बारिश वाला मानसून रहा।
अब अक्टूबर में होने वाली बारिश पर शहर की पानी की जरूरत और ग्रामीण क्षेत्रों में रबी फसल की संभावनाएं काफी हद तक निर्भर हैं।
बारिश नहीं हुई तो पेयजल व्यवस्था के साथ किसानों की सिंचाई संबंधी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
घर-घर पहुंचकर पानी की जरूरत का आंकड़ा जुटा रहा निगम
कम बारिश और गिरते जलस्तर को देखते हुए नगर निगम ने शहर में घर-घर सर्वे शुरू किया है।
निगम की टीमें अलग-अलग इलाकों में जाकर यह जानकारी जुटा रही हैं कि प्रत्येक घर में पानी की कितनी जरूरत है।
सर्वे में परिवार के सदस्यों की संख्या, किराएदारों की संख्या और घर में होने वाली पानी की खपत जैसी जानकारी ली जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इस डेटा के आधार पर जरूरत के मुताबिक जल आपूर्ति की योजना तैयार करने में मदद मिलेगी।
तालाबों में पर्याप्त पानी नहीं, भूजल पर भी दबाव
कम बारिश का असर इंदौर के प्रमुख जलस्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। कई तालाब अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप नहीं भर पाए हैं।
वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर नीचे जाने से रबी फसल की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।
शहर के कुछ हिस्सों में सितंबर-अक्टूबर में ही बोरिंग से पानी नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
भीषण गर्मी के दौरान कई इलाकों में भूजल स्तर पहले ही नीचे चला गया था।
मानसून की कमी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कुछ क्षेत्रों में नगर निगम को पानी के टैंकर भी भेजने पड़ रहे हैं।
सितंबर में 10 साल की सबसे कम बारिश
सितंबर में भी इंदौर को पर्याप्त बारिश नहीं मिली। पूरे महीने में करीब 125 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम बताई जा रही है।
तुलना करें तो 2013 और 2019 में इंदौर में सालाना बारिश का आंकड़ा 1,300 मिमी से अधिक रहा था।
इसके मुकाबले 2026 में अब तक करीब 590 मिमी बारिश ही दर्ज हुई है।
कम बारिश के पीछे बताए जा रहे प्रमुख कारण
मौसम से जुड़े विश्लेषण के अनुसार इंदौर और मालवा क्षेत्र में कम बारिश के पीछे कई मौसमी परिस्थितियां जिम्मेदार रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
1. अल नीनो का प्रभाव: प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति का असर मानसूनी गतिविधियों पर पड़ने की बात कही गई है।
2. बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का रुख: कई निम्न दबाव वाले सिस्टम मध्यप्रदेश के उत्तरी हिस्सों की ओर चले गए या मालवा तक पहुंचने से पहले कमजोर पड़ गए।
3. दक्षिणी मध्यप्रदेश और विदर्भ में सिस्टम का ज्यादा असर: मानसून के कई प्रभावी सिस्टम दक्षिणी जिलों और विदर्भ क्षेत्र के आसपास केंद्रित रहे, जिससे इंदौर को अपेक्षित बारिश नहीं मिली।
4. गुजरात-मालवा क्षेत्र में स्थानीय सिस्टम की कमी: सामान्य तौर पर इस क्षेत्र में बनने वाले स्थानीय मौसम सिस्टम मालवा में बारिश लाने में मदद करते हैं, लेकिन इस बार ऐसी गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रहीं।
5. अरब सागर से पर्याप्त नमी नहीं मिलना: मजबूत सिस्टम या ट्रफ की कमी के कारण अरब सागर से आने वाली नमी का प्रभाव भी इंदौर क्षेत्र में सीमित रहा।
अक्टूबर की बारिश अब अहम
मानसून सीजन कमजोर रहने के बाद अब अक्टूबर की बारिश पर नजर है। यदि इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो जलस्रोतों और भूजल स्तर को कुछ राहत मिल सकती है।
वहीं बारिश नहीं होने की स्थिति में शहर की पेयजल व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में रबी फसल के लिए अतिरिक्त प्रबंध करने पड़ सकते हैं।
प्रशासन ने शुरू की तैयारी
तालाबों में कम पानी और भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर बैठकें भी की जा रही हैं।
नगर निगम के घर-घर सर्वे के बाद पानी की वास्तविक जरूरत का आकलन किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक सर्वे के आंकड़ों के आधार पर टैंकरों और अन्य माध्यमों से जल आपूर्ति की आवश्यकता वाले क्षेत्रों के लिए आगे की व्यवस्था का रोडमैप तैयार किया जाएगा।
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