क्या ब्लैकमेलिंग के शिकार हो रहे थे बंटी: मदनलाल-छगनलाल ज्वेलर्स परिवार से जुड़ा था रियल एस्टेट कारोबारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

3 दिन पहले से दोस्तों से बनाई दूरी, आखिरी कॉल का राज मोबाइल में बंद, आत्महत्या की नई वजह तलाश रही पुलिस
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी संदीप उर्फ बंटी नागर की आत्महत्या का राज और गहरा गया है। पलासिया पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों ने मौत से पहले की उनकी गतिविधियों पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
रविवार को वे मेन ऑफिस की चाबी छोड़कर सिर्फ 404 नंबर वाले उस ऑफिस की चाबी लेकर पहुंचे थे, जहां बाद में उनका शव मिला था। मदनलाल-छगनलाल ज्वेलर्स परिवार से जुड़े बंटी नागर ने खुदकुशी के 3 दिन पहले से दोस्तों से दूरी बना ली थी।
कल परिजन द्वारा आर्थिक संकट की बात से इनकार करने के बाद पुलिस ब्लैकमेलिंग के साथ-साथ आत्महत्या की नई वजह तलाश रही है। पुलिस ने सीडीआर खंगाली तो डेढ़ महीने में 7 हजार से ज्यादा कॉल सामने आई हैं।
अब मौत से पहले की आखिरी बातचीत किन लोगों से हुई, यह पता लगाने के लिए पुलिस उन नंबरों पर संपर्क कर रही है।
पुलिस ने बंटी नागर के ऑफिस से जब्त सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की तो सामने आया कि वह रविवार दोपहर करीब 1.11 बजे द मार्क बिल्डिंग के कॉरिडोर से अपने ऑफिस की तरफ जाते दिखाई दिए।
उनके हाथ में मोबाइल था, लेकिन कोई साड़ी नहीं थी। इसके बाद वे ऑफिस में जाते और लगातार फोन पर बात करते नजर आते हैं। पुलिस के अनुसार बंटी घर से निकलते समय मेन ऑफिस की चाबी के बजाय 404 नंबर वाले ऑफिस की चाबी लेकर आए थे।
यह वही ऑफिस था, जहां उन्होंने फंदा लगाया। यानी आत्महत्या की जगह पहले से तय कर ली थी। परिवार ने भी पुलिस को बताया कि दोपहर करीब 1.30 बजे के बाद बंटी को फोन किया गया, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया।
शाम करीब 5.30 से 6 बजे के बीच बेटा ऋषित उन्हें तलाशते हुए ऑफिस पहुंचा, तब घटना का पता चला। पुलिस के अनुसार जिस साड़ी से बंटी ने फंदा लगाया, वह उनकी पत्नी अपर्णा की थी।
यानी उन्होंने जान देने की नीयत से साड़ी पहले ही ऑफिस में ले जाकर रख दी थी। हालांकि आत्महत्या की अंतिम वजह को लेकर पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।
जानकारी के मुताबिक बंटी आत्महत्या से करीब पांच दिन पहले दिल्ली गए थे। बताया गया कि वहां उनका मेडिकल चेकअप हुआ था। दिल्ली से लौटने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव महसूस किया गया।
वे लोगों से कम मिलने-जुलने लगे और फोन पर बातचीत भी घट गई। दोस्तों के अनुसार शुक्रवार रात के बाद तो उन्होंने फोन से दूरी बना ली थी।
पुलिस को शंका है कि कुछ लोग बंटी को ब्लैकमेल कर रहे थे। बंटी की कॉल डिटेल निकाली है। शुरुआती जांच में करीब डेढ़ महीने में 7 हजार से अधिक कॉल सामने आईं।
छह महीने की कॉल डिटेल का विश्लेषण होने पर यह रिकॉर्ड और बड़ा होने की संभावना है। अब पुलिस खास तौर पर आत्महत्या से पहले के अंतिम दिनों की कॉलों पर फोकस कर रही है।
बंटी ने आखिरी बार किन लोगों से बात की, किससे कितनी देर बात हुई और किससे बातचीत अचानक बंद हुई। इन सभी बिंदुओं को खंगाला जा रहा है। हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस फिलहाल संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं कर रही है।
फाइनेंसर परेशान, लेकिन आर्थिक संकट का जिक्र नहीं... बंटी नागर शहर के बड़े रियल एस्टेट कारोबारियों में गिने जाते थे। वह इंदौर के प्रसिद्ध मदनलाल-छगनलाल ज्वेलर्स परिवार से थे।
बंटी ने भी दस साल पहले ज्वेलरी का काम किया था। हालांकि तब भारी घाटा हुआ और बंगला, दुकान सब बिक गए। उन्हें एक फ्लैट में शिफ्ट होना पड़ गया, लेकिन इसके बाद वह सुमति जैन के साथ रियल एस्टेट कारोबार में कूदे और फिर पीछे पलटकर नहीं देखा।
गुलमर्ग कॉलोनी में करीब 20 करोड़ का बंगला लिया। कई लग्जरी कारें खरीदीं। कम समय में ही रियल एस्टेट के क्षेत्र में कई बड़े प्रोजेक्ट खड़े किए। फिलहाल करीब पांच प्रोजेक्ट चल रहे थे।
इनमें कई को विकास संबंधी मंजूरियां मिल चुकी थीं। एक प्रोजेक्ट की कार्यपूर्णता हाल ही में ली गई थी, जबकि दूसरे प्रोजेक्टों की विकास मंजूरी पहले से थी। एक अन्य प्रोजेक्ट की फाइल कलेक्ट्रेट में लगी हुई थी।
उनके प्रोजेक्ट में बड़े फाइनेंसरों का पैसा भी लगा हुआ था। उनकी मौत के बाद इन प्रोजेक्ट और निवेशकों के भविष्य को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। कल हुए परिजन के बयान में पुलिस को आर्थिक परेशानी आत्महत्या की सीधी वजह के रूप में नजर नहीं आई है।
यह जानकारी भी मिली है कि बंटी ने इसी महीने सांवेर तहसील में करोड़ों की जमीन खरीदी थी और उसकी रजिस्ट्री कराई थी। उनका बैंक बैलेंस भी मजबूत बताया जा रहा है।
ऑफिस स्टाफ बोला- काम सामान्य, कोई संकट नहीं... पुलिस ऑफिस के कर्मचारियों के बयान भी दर्ज कर चुकी है। कर्मचारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट सामान्य तरीके से चल रहे थे।
बंटी रोजाना प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों से मिलते थे और ऑफिस में उनका व्यवहार भी सामान्य था। किसी बड़े आर्थिक संकट या कारोबार में रुकावट की जानकारी कर्मचारियों को नहीं थी।
इसीलिए पुलिस अब जांच का फोकस सिर्फ कारोबार पर नहीं रख रही। बंटी के निजी जीवन, आखिरी दिनों की गतिविधियों, करीबी संपर्कों, आखिरी कॉल और मोबाइल में मौजूद जानकारी को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
परिवार ने मांगा समय, अब दस्तावेज और बयान होंगे अहम
बुधवार को बंटी की पत्नी अपर्णा, बेटे ऋषित और बड़े भाई थाने पहुंचे। पुलिस ने उनसे सामान्य पूछताछ की। परिवार ने आत्महत्या के पीछे कर्ज जैसी किसी बड़ी वजह से इनकार किया है।
परिवार ने पुलिस को बताया कि वे आर्थिक और अन्य दस्तावेज जुटाकर विस्तृत बयान देंगे। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है जिस कारोबारी के कई प्रोजेक्ट चल रहे थे, जिसने हाल ही में करोड़ों की जमीन खरीदी, जिसका बैंक बैलेंस मजबूत बताया जा रहा है और जिसका कारोबार सामान्य चल रहा था, उसने अचानक अकेले ऑफिस पहुंचकर इतना बड़ा कदम क्यों उठाया?
इस सवाल का जवाब फिलहाल मोबाइल के लॉक, आखिरी कॉल और बंटी के बदले व्यवहार में छिपा नजर आ रहा है। पुलिस इन्हीं तीनों कड़ियों को जोड़कर मौत की असली वजह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
बंटी के देनदार बड़े लोगों के नामों का खुलासा
बंटी खुदकुशी केस में पुलिस तो अपने स्तर पर जांच कर ही रही है, लेकिन खुलासा फर्स्ट भी अपने स्तर पर तहकीकात कर रहा है। पिछले अंकों में खुलासा फर्स्ट ने अशोक भाटिया के नाम का खुलासा कर बताया था कि अशोक ने करोड़ों रुपए बंटी नागर को ब्याज पर दे रखे हैं।
वह बाजार से भी बंटी के लिए रुपयों की व्यवस्था कराता था। ताजा जानकारी के अनुसार अशोक भाटिया ने बंटी को पांच करोड़ रुपए दे रखे थे। वहीं हंसराज जैन से 1.10 करोड़ रुपए बंटी को दिला रखे थे।
ये भी पता चला है कि बंटी नागर को चितेश मेहता ने 6 करोड़, सतीश नीमा ने 8 करोड़, आशीष ने 3 करोड़, सुनील कपूर ने 2 करोड़ व झांझरिया ज्वेलर्स वाले ने 3 करोड़ दे रखे थे।
हालांकि ब्याज पर पैसे देने वाले इन बड़े नामों और उनके द्वारा बंटी को दिए रुपयों के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन ये नाम बंटी नागर खुदकुशी मामले में पुलिस के लिए जांच का विषय जरूर हैं।
खुलासा फर्स्ट को ये भी पता चला है कि चितेश मेहता का गोल्ड का कामकाज है। वह पहले डिब्बा कारोबार करता था। उसने रिफाइनरी भी डाली थी, फिर इससे अलग हो गया।
उसका ब्याज पर पैसे देने का बड़ा कामकाज है। इसके यहां इनकम टैक्स की बड़ी रेड तक पड़ चुकी है। यह बंटी के साथ दर्जी कराड़िया के प्रोजेक्ट में पार्टनर था। उसने बंटी के साथ बड़ी रजिस्ट्री का सौदा भी किया था। सतीश नीमा का डिब्बे का कारोबार है।
रिकॉर्डिंग से हो सकता है खुलासा
बंटी का मोबाइल पुलिस के लिए सबसे अहम कड़ी बना हुआ है। फोन का पैटर्न लॉक अब तक नहीं खुल पाया है। पुलिस और विशेषज्ञ कई पैटर्न आजमा चुके हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली।
सुरक्षा व्यवस्था के कारण गलत पैटर्न डालने पर लॉकिंग टाइम बढ़ता जाता है। यही मोबाइल अब जांच की सबसे बड़ी पहेली है। इसमें कॉल, चैट, रिकॉर्डिंग और मौत से पहले की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है।
बंटी मोबाइल में बातचीत की रिकॉर्डिंग भी करते थे। ऐसे में फोन खुलने के बाद जांच को कोई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना पुलिस तलाश रही है।
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