पुष्यमित्र भार्गव का दिग्विजय सिंह पर पलटवार: कहा- कैंपस को राष्ट्र निर्माण के केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए; जानिये क्या है पूरा मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
डेली कॉलेज को लेकर उठे विवाद के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के हालिया बयान पर तीखा पलटवार किया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज प्रशासन को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी कि संस्थान के परिसर में कथित तौर पर राजनीतिक और वैचारिक गतिविधियों का उपयोग बढ़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया था कि शैक्षणिक संस्थान की “न्यूट्रल पहचान” बनाए रखने के बजाय उसे राजनीतिक मंच की तरह क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है।
पुष्यमित्र भार्गव का पलटवार
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जो लोग वर्षों तक कॉलेज कैंपस को अपनी वैचारिक प्रयोगशाला बनाकर चुनिंदा बैठकों और सीमित लोगों के बीच एजेंडा चलाते रहे, आज वही राष्ट्रवाद की आवाज से असहज हो रहे हैं।
असली समस्या राष्ट्रवाद नहीं
उन्होंने कहा कि असली समस्या राष्ट्रवाद नहीं है, बल्कि पुराने नैरेटिव का कमजोर पड़ना है। भार्गव ने आरोप लगाया कि जब डेली कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में देश, सेना और राष्ट्र निर्माण की बात हो रही है, तो कुछ लोगों को उससे परेशानी हो रही है।
राजनीतिक स्वार्थ का केंद्र बनाने का दौर अब खत्म
उन्होंने आगे कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक स्वार्थ का केंद्र बनाने का दौर अब खत्म हो रहा है। नई पीढ़ी जागरूक है और अब कैंपस को राष्ट्र निर्माण के केंद्र के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में।
22 अप्रैल से भाजपा का प्रशिक्षण वर्ग
उल्लेखनीय है कि प्रतिष्ठित डेली कॉलेज में 22 अप्रैल से भारतीय जनता पार्टी के सात राज्यों के वरिष्ठ नेताओं के प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन की तैयारियों के बीच प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और संस्थान के संरक्षक दिग्विजय सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है।
बढ़ता राजनीतिक तनाव
इस पूरे मामले ने इंदौर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर दिग्विजय सिंह शैक्षणिक संस्थानों की निष्पक्षता पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता इसे राष्ट्रवाद और विचारधारा की लड़ाई बता रहे हैं। डेली कॉलेज विवाद अब केवल शैक्षणिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बनता जा रहा है।
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