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संपत्ति पंजीयन गाइड लाइन की गोपनीयता लीक: आखिर कौन कर रहा बाजार भाव का खुलासा; कलेक्टर से कार्रवाई की मांग

KHULASA FIRST

संवाददाता

09 मार्च 2026, 5:25 pm
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संपत्ति पंजीयन गाइड लाइन की गोपनीयता लीक

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अचल संपत्ति के पंजीयन मूल्य निर्धारण के लिए तैयार की जा रही नई गाइड लाइन की गोपनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रस्ताव अभी जिला मूल्यांकन समिति के सामने भी नहीं आया है, उससे पहले ही विभिन्न क्षेत्रों और कॉलोनियों के प्रस्तावित भाव सार्वजनिक हो रहे हैं। इस मामले को लेकर मप्र कांग्रेस ने कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

गाइड लाइन तैयार करने का कार्य उप जिला मूल्यांकन समिति द्वारा किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत शासन और जिला प्रशासन स्तर से आवश्यक दस्तावेज और निर्देश समिति को दिए जाते हैं, जिसके आधार पर प्रस्ताव तैयार कर जिला मूल्यांकन समिति को भेजा जाता है।

लेकिन हैरानी है प्रस्ताव अभी जिला मूल्यांकन समिति तक औपचारिक रूप से पहुंचा भी नहीं है उससे पहले ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों, मोहल्लों और कॉलोनियों में प्रस्तावित भावों की जानकारी सार्वजनिक होने लगी है। कुछ मीडिया माध्यमों में भी इन भावों को प्रसारित किया है, जिससे प्रक्रिया की गोपनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मप्र कांग्रेस कमेटी के पूर्व प्रवक्ता एडवोकेट प्रमोद कुमार द्विवेदी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा क्या यही सरकार की गोपनीयता नीति है? क्या प्रस्तावित भाव का जानबूझकर खुलासा किया जा रहा है या उप जिला मूल्यांकन समिति के कुछ सदस्य किसी साजिश के तहत यह कर रहे हैं।

केंद्रीय मूल्यांकन समिति या शासन स्तर से भाव बढ़ाने के लिए क्या आधार तय किया गया है, इसकी जानकारी भी मीडिया में आ रही है। आखिर यह जानकारी उसे कौन दे रहा है और किसके इशारे पर यह सब हो रहा है। जिला मूल्यांकन समिति में वरिष्ठ जिला पंजीयक संयोजक होते हैं, जबकि कलेक्टर अध्यक्ष। एक विधायक सहित अन्य विभागों के प्रमुख सदस्य रहते हैं। अभी तक समिति की बैठक नहीं हुई और प्रस्ताव उस तक पहुंचा भी नहीं, इसके बावजूद भावों को इस तरह सार्वजनिक किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

लॉटरी की तरह खुल रहे भाव
द्विवेदी ने आरोप लगाया अधिकारियों के बयान ऐसे आ रहे हैं मानो लॉटरी के भाव खोले जा रहे हों। उन्होंने शासन से मांग की मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और किसी अधिकारी ने गोपनीयता भंग की है तो उस पर सेवा सिविल आचरण नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।

पिछले वर्ष की गाइड लाइन की भी जांच हो। द्विवेदी के अनुसार कई स्थानों पर मनमाने भाव तय कर दिए गए थे। इस कारण रजिस्ट्रियां नहीं हो सकीं और जिला मूल्यांकन समिति को दो-तीन बार प्रस्ताव केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजना पड़ा। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ा।

जिन कॉलोनियों में अनाप-शनाप भाव तय किए गए और रजिस्ट्रियां ही नहीं हुईं, उसके लिए जिम्मेदार उप जिला मूल्यांकन समिति के सदस्यों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। पिछली गाइडलाइन की गड़बड़ियों और वर्तमान में गोपनीयता भंग करने के मामले में दोषियों को कड़ी सजा होना चाहिए।

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