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बैंक घोटाले के पैसे से लंदन में खरीदी प्रॉपर्टी ईडी के शिकंजे में: 307 करोड़ की धोखाधड़ी में इंदौर यूनिट की बड़ी कार्रवाई; सात करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच

KHULASA FIRST

संवाददाता

26 मार्च 2026, 4:17 pm
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बैंक घोटाले के पैसे से लंदन में खरीदी प्रॉपर्टी ईडी के शिकंजे में

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
करोड़ों की बैंक धोखाधड़ी कर विदेशों में निवेश के जरिए रकम छिपाने के खेल पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा वार किया है। इंदौर यूनिट ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत लंदन में सात करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति अटैच की है। यह कार्रवाई उन दो बड़े बैंक फ्रॉड मामलों से जुड़ी है, जिनमें आरोपियों ने कथित तौर पर करीब 307.44 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी कर रकम डमी कंपनियों और फर्जी निवेश के जरिए विदेश तक पहुंचा दिया।

ईडी की जांच के मुताबिक, पाली लॉजिक इंटरनेशनल प्रालि के निदेशक उत्कर्ष त्रिवेदी और अन्य ने पंजाब नेशनल बैंक के साथ 57.47 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की वहीं न्यू कॉर्प इंटरनेशनल लि. के एमडी सुनीलकुमार त्रिवेदी और अन्य पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ 249.97 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोप है।

दोनों मामलों में सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की। खुलासा हुआ आरोपियों ने कर्मचारियों, परिचितों और करीबी लोगों के नाम पर कई डमी कंपनियां खड़ी कीं। इनके जरिए करोड़ों की रकम को लेयरिंग, रूटिंग और फर्जी निवेश के नाम पर घुमाया गया, ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके।

फर्जी फर्मों के जाल से बाहर भेजी गई रकम
ईडी के अनुसार यह सिर्फ बैंक से पैसा निकालने का मामला नहीं था, बल्कि सुनियोजित वित्तीय जाल था। आरोपियों ने कंपनियों का ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो कागजों पर वैध था, लेकिन असल में उसका इस्तेमाल बैंक से निकाली गई रकम को गायब करने और उसे सफेद दिखाने के लिए किया गया।

घोटाले की रकम विदेशों में निवेश के नाम पर ट्रांसफर की गई। यानी, भारत से निकाली गई रकम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घुमाकर ऐसे ठिकानों पर लगाया गया, जहां उसे ट्रैक करना मुश्किल हो। इसी कड़ी में लंदन की यह संपत्ति सामने आई, जिसे अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया है।

छापों में मिले डिजिटल सबूत ...और खुल सकती हैं परतें
ईडी ने 26 फरवरी 2026 को आरोपियों के ठिकानों पर छापामारी कर कई डिजिटल डिवाइस, फाइनेंशियल रिकॉर्ड और अहम दस्तावेज बरामद किए थे। जांच एजेंसियों का मानना है इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों से घोटाले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच अब केवल बैंक धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि देखा जा रहा है विदेशों में और कितनी संपत्ति खरीदी गईं।

किन-किन के नाम पर कंपनियां बनाई गईं, रकम किन देशों और खातों तक पहुंचाई और क्या नेटवर्क में अन्य कारोबारी या वित्तीय मददगार भी शामिल थे? ईडी ने इस कार्रवाई को लेकर प्रेस नोट भी जारी किया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़ी अटैचमेंट, गिरफ्तारी या नई संपत्तियों का खुलासा हो सकता है।

एक ही जांच के दायरे में दो बड़े बैंक फ्रॉड: मामला इसलिए भी बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें दो अलग-अलग बैंक, दो बड़ी कंपनियां और 300 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप शामिल है। जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि क्या यह सिर्फ वित्तीय अपराध था या इसके पीछे संगठित कॉर्पोरेट फ्रॉड नेटवर्क काम कर रहा था।

फिलहाल इतना तय हैइंदौर से शुरू हुई बैंक फ्रॉड जांच अंतरराष्ट्रीय फाइनेंशियल ट्रेल तक पहुंच चुकी है और लंदन में प्रॉपर्टी अटैच होना इस घोटाले की गंभीरता को बढ़ा देता है।

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