विद्यार्थियों की कॉशन मनी खाकर प्रेस्टीज ग्रुप बना रहा यूनिवर्सिटी: अपने रुपए के लिए चक्कर काट रहे सैकड़ों छात्र
KHULASA FIRST
संवाददाता

पुनीत विजयवर्गीय 99770-00405, खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रेस्टीज कॉलेज शहर का प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। 1992 में प्रेस कॉम्प्लेक्स में एक अखबार की बिल्डिंग में किराए की जगह लेकर शुरू किए गए प्रेस्टीज कॉलेज ने अपनी गुणवत्ता शिक्षा की वजह से जल्द ही शहर के साथ ही देश में अपना नाम कर लिया था।
स्कीम नंबर 54 के हेल्थ एंड एजुकेशन सेक्टर में बॉम्बे हॉस्पिटल के नजदीक वाले कैंपस में कॉलेज शिफ्ट करने के बाद प्रेस्टीज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च का नाम इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा कि कॉलेज के ग्वालियर, देवास सहित अन्य शहरों में भी कैंपस शुरू कर दिया गया।
इसके बाद स्कीम नंबर 74 में इंजीनियरिंग, लॉ और अन्य कोर्स का कॉलेज शुरू करने के साथ ही वहां स्कूल भी शुरू कर दिया। प्रेस्टीज ग्रुप इतना नाम कर चुका था कि यहां पढ़ने के लिए छात्र छात्राएं सपने संजोए बैठने लगे थे। जब कॉलेज का नाम चल गया तो, ग्रुप ने अपनी खुद की डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने की योजना बनाई और इसके लिए सांवेर रोड पर जमीन खरीद ली गई।
अब वहां तेजी से काम किया जा रहा है। लेकिन तेजिंसे काम करने के लिए ग्रुप को रुपयों की आवश्यकता पड़ रही है और इन रुपयों की पूर्ति कॉलेज प्रबंधन द्वारा अपने छात्रों की कॉशन मनी रोककर की जा रही है।
कॉलेज के अलग अलग डिपार्टमेंट से 2 साल से अधिक समय पहले पासआउट हो चुके छात्र अभी तक अपनी कॉशन मनी के लिए भटक रहे है। कॉलेज प्रबंधन सैकड़ों छात्रों के करोड़ों रुपयों की कॉशन मनी रोककर बैठ गया है।
जब भी छात्र अपनी कॉशन मनी की डिमांड करने कॉलेज पहुंचते है तो उन्हें एक टेबल से दूसरी टेबल भेज दिया जाता है, कोई भी इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता है। बाद में छात्रों से कह दिया जाता है कि प्रेस्टीज ग्रुप की डीम्ड यूनिवर्सिटी सांवेर रोड पर बन रही है, जिसके लिए अत्यधिक रुपयों की आवश्यकता है, इस वजह से छात्रों की कॉशन मनी फिलहाल नहीं लौटाई जा सकती और ये कॉशन मनी कब लौटाई जाएगी इसका भी कोई पक्का जवाब नहीं दे रहा है। कॉलेज प्रबंधन को छात्रों की कॉशन मनी लौटना होगी नहीं तो एनएसयूआई छात्रों के लिए कॉलेज कैंपस में उग्र आंदोलन करेगी। -विकास नंदवाना, यूनिवर्सिटी प्रभारी, एनएसयूआई।
बीच सेमेस्टर बढ़ा दी फीस
कॉलेज के लॉ डिपार्टमेंट में पढ़ने वाले फाइनल ईयर के छात्रों ने बताया कि उनका सेशन शुरू हो चुका है, हर साल की फीस पहले से ही तय थी। लेकिन अब फाइनल ईयर में आने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने 5 से 10 हजार रुपए तक फीस बढ़ा दी है।
यह नियम के बिल्कुल विरुद्ध है। प्रेस्टीज ग्रुप डीम्ड यूनिवर्सिटी अपनी कमाई के लिए बना रहा है, उन्हें छात्रों के भविष्य से कोई मतलब नहीं है, यदि उन्हें छात्रों की चिंता होती तो उनकी कॉशन मनी नहीं रोकते।
प्रबंधन को दिया नोटिस
बुधवार को लॉ डिपार्टमेंट के पूर्व छात्र कॉलेज में अपनी कॉशन मनी के लिए एक बार फिर गए थे, लेकिन प्रबंधन ने उन्हें वो ही जवाब देकर रवाना करने का प्रयास किया, लेकिन कोर्ट में वकालत कर रहे इन छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन को तमाम कानून बता डाले।
साथ ही 3 दिन में सभी छात्रों की कॉशन मनी लौटने का नोटिस कॉलेज प्रबंधन को दे दिया। इसमें चेतावनी दी गई है, यदि उनकी कॉशन मनी 3 दिन में नहीं लौटाई गई तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।
26 युवाओं के भविष्य से किया खिलवाड़
अपनी डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने के लिए प्रेस्टीज कॉलेज ग्रुप किस कदर लालची और अंधा हो चुका है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2022 में प्रबंधन ने लॉ डिपार्टमेंट में 26 छात्रों को यूनिवर्सिटी की एडमिशन रजिस्ट्रेशन वेबसाइट बंद होने के बावजूद सितंबर में फर्जी एडमिशन दे दिया।
ये छात्र 3 महीने तक कॉलेज जाते थे, मिड टर्म एग्जाम भी देते थे, लेकिन जब फर्स्ट सेमेस्टर की परीक्षा आई तो उसके 6 दिन पहले छात्रों को पता चला कि यूनिवर्सिटी में उनका एनरोलमेंट ही नहीं हुआ है, इस वजह से छात्रों का एक साल खराब हो गया।
छात्रों ने इसकी शिकायत कलेक्टर को भी की थी, लेकिन कॉलेज प्रबंधन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कॉलेज प्रबंधन सैकड़ों छात्रों की कॉशन मनी रोककर बैठा है। छात्र परेशान हो रहे है, लेकिन प्रबंधन को इससे की मतलब नहीं है।
हमने कॉलेज प्रबंधन को 3 दिन का नोटिस दिया है, इसके बाद हम कानूनी कार्रवाई करेंगे, अब तक 150 से ज्यादा छात्र हमसे जुड़ चुके है। छात्रों को पासआउट हुए कई वर्ष हो गए, लेकिन उन्हें कॉशन मनी नहीं लौटाई जा रही। इस मामले में कॉलेज के डायरेक्टर निशांत जोशी से बात करने का प्रयास किया गए, लेकिन जवाब नहीं होने के डर से उन्होंने 2 बार फोन तक नहीं उठाया।
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