कुलीनों के इस क्लब के चुनाव की तैयारियां: हटना होगा अब चेयरमैन और सचिव को; इन नामों पर चर्चा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर के प्रतिष्ठित यशवंत क्लब की मैनेजिंग कमेटी के चुनाव जून 2026 में प्रस्तावित हैं। चुनाव से पहले ही मौजूदा चेयरमैन टोनी सचदेवा और सचिव संजय गोरानी की टीम ने अपने संभावित उम्मीदवारों के नाम तय करना शुरू कर दिया है, जिससे क्लब की सियासत गर्माने लगी है।
दो कार्यकाल के बाद अब नई टीम की जरूरत
यशवंत क्लब के संविधान के अनुसार कोई भी पदाधिकारी लगातार तीन कार्यकाल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। इसी नियम के चलते चेयरमैन टोनी सचदेवा और सचिव संजय गोरानी अब तीसरी बार चुनाव मैदान में नहीं उतर पाएंगे।
एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग बुलाने की तैयारी
इस नियम में बदलाव के लिए ईओजीएम (एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) बुलाने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन क्लब के भीतर बढ़ते विरोध के चलते फिलहाल इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
पैनल के संभावित उम्मीदवार सामने
सूत्रों के मुताबिक, सचदेवा-गोरानी पैनल ने नए चेहरे आगे करने का फैसला किया है। चेयरमैन पद के लिए: जितेंद्र उर्फ जीतू जैन, सचिव पद के लिए: विजय कस्तूरी, कोषाध्यक्ष: रूपल पारिख और सह सचिव: हंटू जनेजा। हालांकि इन नामों की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने इन्हें लगभग तय माना जा रहा है।
वादे टूटने से नाराजगी
पैनल के भीतर असंतोष भी सामने आ रहा है। कई सदस्यों का आरोप है कि पिछले चुनाव में उनसे वादा किया गया था कि दो कार्यकाल पूरे होने के बाद उन्हें मौका दिया जाएगा, लेकिन इस बार कई नामों को नजरअंदाज कर दिया गया। इससे भीतरखाने नाराजगी बढ़ रही है, जो चुनाव में असर डाल सकती है।
विपक्षी पैनल पर सस्पेंस
दूसरी ओर, सचदेवा-गोरानी पैनल के सामने कौन चुनौती देगा, यह अभी साफ नहीं है। पूर्व चेयरमैन पम्मी छाबड़ा खुद मैदान में उतरेंगे या कोई नया पैनल सामने आएगा—इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि चेयरमैन पद के लिए पम्मी छाबड़ा खुद चुनाव लड़ सकते हैं। अन्य पदों के उम्मीदवारों को लेकर अभी कोई नाम सामने नहीं आया है।
बागी भी बना सकते हैं समीकरण
चुनाव से पहले पैनल में टिकट नहीं मिलने से नाराज सदस्य बागी होकर मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में इस बार का चुनाव मुकाबले को और दिलचस्प और कांटेदार बना सकता है। कुल मिलाकर, यशवंत क्लब का यह चुनाव केवल पदों का चयन नहीं, बल्कि आंतरिक खींचतान और रणनीति की भी बड़ी परीक्षा बनने जा रहा है।
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