गेहूं खरीदी पर सियासत तेज: देरी को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन; सरकार पर लगाए रणनीतिक घोटाले के आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में आज से चार संभागों में गेहूं खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो रही है, लेकिन देरी को लेकर सियासत तेज हो गई है। सरकार जहां अंतरराष्ट्रीय हालात खासतौर पर इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को इसकी वजह बता रही है, वहीं कांग्रेस पार्टी ने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए प्रदेशभर में प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
खंडवा में बैरिकेडिंग तोड़ी, कलेक्ट्रेट का घेराव
खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन करते हुए बैरिकेडिंग तोड़ दी और कलेक्ट्रेट पहुंचकर जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में करीब 5 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बताई जा रही है।
रतलाम और भोपाल में भी विरोध
रतलाम में जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कृषि उपज मंडी में धरना दिया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में किसान भी शामिल हैं। वहीं भोपाल में भी कांग्रेस कार्यकर्ता नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे हैं।
जीतू पटवारी के आरोप
जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गेहूं खरीदी में देरी एक रणनीतिक घोटाला है। उन्होंने कहा कि बारदाने (बोरियों) की कमी का बहाना बनाकर खरीदी टाली गई, जिससे किसानों को नुकसान हुआ।
25% गेहूं ओपन मार्केट में बिक गया
भोपाल से छतरपुर रवाना होने से पहले पटवारी ने दावा किया कि लगभग 10 लाख क्विंटल गेहूं ओपन मार्केट में बिक चुका है। करीब 25% गेहूं 1600 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाया।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
पटवारी ने कहा कि मोहन यादव ने गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल का वादा किया था, लेकिन इसे पूरा नहीं किया गया। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान और पीएम नरेंद्र मोदी पर भी किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया।
प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी
पटवारी के अनुसार, कांग्रेस आज पूरे प्रदेश में जिला कलेक्टर कार्यालयों का घेराव कर रही है। इसके साथ ही दो दिन बाद किसानों के साथ उपवास किया जाएगा। उज्जैन में मुख्यमंत्री के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
सियासत तेज, किसानों की नजर खरीदी पर
एक ओर सरकार गेहूं खरीदी शुरू करने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर किसानों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा सकता है।
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