हाईकोर्ट में मेटा के खिलाफ याचिका: इंस्टाग्राम एन्क्रिप्शन हटाने के फैसले पर उठाए सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की हाईकोर्ट की खंडपीठ में मेटा के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में इंस्टाग्राम पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सुविधा समाप्त करने के प्रस्तावित फैसले को चुनौती दी गई है।
नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
यह याचिका अधिवक्ता पार्थ शर्मा द्वारा दायर की गई है। उन्होंने कोर्ट में तर्क दिया कि 8 मई 2026 के बाद इंस्टाग्राम पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन बंद करने से यूजर्स के निजी संदेशों तक अनधिकृत पहुंच संभव हो सकती है, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
उन्होंने इसे निजता का अधिकार (अनुच्छेद 21) से जोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक के.एस. पुट्टास्वामी केस का हवाला भी दिया।
कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण निर्देश
मामले की सुनवाई विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता को डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बोर्ड के समक्ष जाने का निर्देश दिया।
सरकार ने क्या कहा
भारत सरकार की ओर से उपस्थित एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सुनील कुमार जैन ने दलील दी कि डेटा संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए यह बोर्ड ही सक्षम प्राधिकरण है, इसलिए याचिकाकर्ता को पहले वहीं जाना चाहिए था।
7 दिन में आवेदन, 6 मई तक फैसला
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता 7 दिनों के भीतर बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखे। साथ ही बोर्ड को निर्देश दिया गया कि वह 6 मई 2026 से पहले इस मामले में विस्तृत और तर्कसंगत आदेश पारित करें।
6 मई को अगली सुनवाई
चूंकि मेटा 8 मई से एन्क्रिप्शन सुविधा बंद करने जा रही है, इसलिए कोर्ट ने 6 मई को अगली सुनवाई तय की है, जिसमें बोर्ड के निर्णय की समीक्षा की जाएगी।
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