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पहले पुराने पैसे दो तो काम करेंगे: नए काम के वर्कऑर्डर मिलते ही ठेकेदार अड़े

KHULASA FIRST

संवाददाता

22 मार्च 2026, 1:53 pm
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पहले पुराने पैसे दो तो काम करेंगे

नए विकास कार्य ठप होने से हो रही निगम की किरकिरी, निगम पर ठेकेदारों कीे 800 करोड़ देनदारी बाकी

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर निगम ने करोड़ों रुपए की विकास योजनाएं मंजूर कर टेंडर जारी कर दिए, ठेकेदारों से अनुबंध कर उन्हें वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए। वर्क ऑर्डर मिलते ही ठेकेदार अड़ गए और कह रहे हैं कि जब तक पुराना पैसा नहीं मिलेगा वह नया काम नहीं करेंगे। इससे निगम की किरकिरी होने लगी है। निगम अफसर ठेकेदारों से कहने लगे हैं कि काम तो करो पैसे भी मिलेंगे, लेकिन ठेकेदार नहीं मान रहे हैं।

इससे निगम की अधिकतर विकास योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गई हैं। वहीं निगम ने भी ठेकेदारों के मंसूबों को ठेंगा दिखाकर बिना पैसे के काम कराने के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है, जिससे शहर की सड़कें व चौराहे तो सुंदर बनाए जा सकें। देश के सबसे स्वच्छ शहर के निगम का खजाना खाली है।

निगम द्वारा कराए गए कार्यों के एवज में निगम ठेकेदारों को करीब 800 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है, लेकिन निगम खजाना खाली होने से भुगतान अटका हुआ है। महीनों से ठेकेदार महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल से गुहार लगा रहे हैं कि पुराने बिलों का भुगतान करा दो, लेकिन अब तक ठेकेदारों के भुगतान की कोई कार्ययोजना नहीं बनी है।

जबकि निगम के एक पुराने ठेकेदार पप्पू भाटिया निगम से भुगतान न होने के कारण जहर खाकर जान दे चुके हैं। इसके बाद भी निगम प्रबंधन ठेकेदारों के भुगतान में लापरवाह बना हुआ है। हालांकि महापौर ने पूर्व में घोषणा की थी कि निगम ठेकेदारों का भुगतान जल्द किया जाएगा, लेकिन वह घोषणा भी हवा हो गई।

जबकि महापौर परिषद लगातार शहर में विकास कार्यांे को मंजूरी देकर टेंडर जारी कराती रही। इसके चलते शहर में हजारों करोड़ के विकास कार्य के टेंडर ठेकेदारों को मिल गए। निगम अफसरों ने ठेकेदारों से अनुबंध कर उन्हें वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए।

नए कार्य के वर्क ऑर्डर मिलते ही जो ठेकेदार पैसे के लिए गिड़गिड़ा रहे थे उनके तेवर बदल गए और उन्होंने पुराने पैसे मांगने शुरू कर दिए। पुराने बिलों का भुगतान न होने से निगम द्वारा जारी किए गए वर्क ऑर्डर रद्दी साबित होने लगे हैं। कोई भी ठेकेदार नया काम कराने को तैयार नहीं है।

जोन के कार्य भी रुके
नगर निगम ने शहरभर में पानी और सीवरेज की पाइप लाइनें डलवा दीं। कई क्षेत्रों में पानी की निकासी के लिए अलग से पाइप लाइन डाली गई, लेकिन इसके बाद खोदी गई सड़कों पर गिट्टी डालकर छोड़ दिया गया। इससे शहरवासी परेशान हो रहे हैं। निगम रेस्टोरेशन कराने में भी असहाय साबित हो रहा है।

पार्षद व एमआईसी सदस्य रेस्टोरेशन की बात करते हैं तो टेंडर जारी कर वर्क ऑर्डर ठेकेदारों को सौंप दिया गया, लेकिन पुराने पैसे नहीं मिलने से ठेकेदार महज वही काम कर रहे हैं जिनका भुगतान निगम कर रहा है। इस वजह से पूरे शहर की कॉलोनियों की महीनों पूर्व खोदी गई सड़कें अब तक नहीं बन सकी हैं।

साख बचाने की जंग
महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल अब इंदौर शहर की साख बचाने और निगम द्वारा कार्य किए जाने के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके चलते शहर के चौराहे, सड़क, डिवाइडर, ग्रीन बेल्ट की व्यवस्था करने का जिम्मा शहर की संस्थाओं को सौंप दिया गया है, जिससे बाहर से आने वालों को शहर की सड़कें व चौराहे सुंदर दिखें अन्यथा ठेकेदारों के अड़े रहने से निगम की साख को दाग लगने लगा है। निगम का कोई ठेकेदार पुराने पैसे लिए बिना काम करने को तैयार नहीं है।

तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं भर रहा खजाना
नगर निगम प्रबंधन पूरी ताकत राजस्व वसूली में लगा रहा है, लेकिन निगम के तमाम प्रयासों के बाद भी खजाना नहीं भर रहा है। इसके चलते पैसे की कमी के कारण महापौर केसरी प्रतियोगिता भी निरस्त कर दी गई। वहीं ठेकेदार पुराना भुगतान पाने के लिए हर दिन बड़ी संख्या में निगम के लेखा विभाग पहुंच रहे हैं, लेकिन खजाने में पैसे न होने से अफसर भी असहाय बने हुए हैं।

हालांकि लेखा विभाग के अफसरों की मंशा तो है कि वह भुगतान करे, लेकिन खजाने में पैसे न होने से वह ठेकेदारों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। जबकि शासन से भी अब तक चुगी राशि सहित अन्य मदों की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इससे निगम का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है।

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