सीएम हेल्पलाइन की धज्जियां उड़ा रही पटवारी: तहसीलों के कामकाज को लेकर सवालिया निशान; दलालों या निजी सहायकों के बिना नहीं होते काम, लंबित रहते हैं आवेदन
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर की तहसीलों में कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजस्व विभाग में आरआई, पटवारी और कुछ तहसीलदारों के बीच मजबूत गठजोड़ होने के आरोप सामने आए हैं। स्थिति यह बताई जा रही है कि बिना दलालों या प्राइवेट सहायकों के जरिए काम कराए, आम आवेदकों के आवेदन लंबे समय तक लंबित पड़े रहते हैं।
अधिकारी-कर्मचारियों का वर्षों से तबादला नहीं हुआ
सूत्रों के मुताबिक, कई जगह अधिकारी-कर्मचारियों का वर्षों से तबादला नहीं हुआ है, जिसके चलते स्थानीय स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क बन गया है। इसी वजह से बाहरी हस्तक्षेप बढ़ा और व्यवस्था पर असर पड़ा है।
सांवेर तहसील का मामला चर्चा में
ताजा मामला सांवेर तहसील का है, जहां खाकरोड़ गांव के भुवन तोषनीवाल ने सीमांकन के लिए अक्टूबर 2025 में आवेदन दिया था। नियमानुसार 30 दिन में काम होना था, लेकिन समयसीमा में कार्रवाई नहीं हुई।
अप्रत्यक्ष रूप से पैसे की मांग
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उससे अप्रत्यक्ष रूप से पैसे की मांग की जा रही थी। जब उसने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, तो आरोप है कि संबंधित कर्मचारियों ने शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया और कार्यालय बुलाकर समझाइश दी गई।
बंद कमरे में दी धमकी
शिकायतकर्ता के अनुसार पटवारी दीपशिखा कैथवास और आरआई धर्मेंद्र गुप्ता ने इसे वापस लेने के लिए दबाव बनाया। आरोप है कि धरमपुरी को दफ्तर में बुलाया गया और बंद कमरे में धमकी भी दी गई।
ऑडियो में सामने आया बयान
मामले में कुछ ऑडियो क्लिप भी सामने आए हैं, जिनमें पटवारी कथित तौर पर आवेदक से कहती सुनाई दे रही हैं कि आप पता नहीं सीएम हेल्पलाइन को क्या ही समझते हैं। सीएम हेल्पलाइन से कुछ नहीं होता है। मैं मंडे को नपती का नोटिस निकाल दूंगी।
नपती का काम आपका
एक अन्य ऑडियो जो आरआई गुप्ता और पटवारी कैथवास के बीच में है। इसमें आरआई पटवारी से यह कह रहा है कि नपती का काम आपका है। मैंने आवेदक को केवल सीएम हेल्पलाइन के लिए बुलाया था, मौके पर पटवारी जाएगा और बताएगा क्या पोजीशन है। यह देखना आपका काम है।
कार्रवाई: पटवारी-आरआई निलंबित, तहसीलदार को नोटिस
शिकायत के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पटवारी और आरआई को निलंबित कर दिया है। साथ ही संबंधित तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
नई तहसीलों के बाद बढ़ी निगरानी की चुनौती
इंदौर में नई तहसीलों के गठन के बाद प्रशासनिक निगरानी चुनौतीपूर्ण हो गई है। सांवेर, महू, देपालपुर के साथ अब कनाडिया, राऊ, मल्हारगंज और खुडैल जैसी तहसीलें भी अलग हो चुकी हैं। आरोप है कि इन क्षेत्रों में निरीक्षण कम होने से स्थानीय स्तर पर अनौपचारिक तंत्र हावी हो गया है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि कई जगह सीसीटीवी सिस्टम काम नहीं कर रहे हैं और डिजिटल मॉनिटरिंग भी प्रभावी नहीं है। कुछ मामलों में स्टाफ द्वारा सिस्टम लॉगिन का उपयोग कर उपस्थिति दर्शाने के आरोप भी लगे हैं। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठ रहे हैं।
सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर तबादले, नियमित निरीक्षण और सख्त मॉनिटरिंग से ही इस तरह की समस्याओं पर अंकुश लगाया जा सकता है। फिलहाल प्रशासन द्वारा कार्रवाई शुरू होने के बाद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
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