सीमांकन में देरी करने वाले पटवारी-आरआई निलंबित: कलेक्टर शिवम वर्मा ने की कार्रवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
सीमांकन कार्य में देरी करने और रिश्वत के आरोपी पटवारी और आरआई को कलेक्टर शिवम वर्मा ने निलंबित कर दिया है। दोनों को कदाचरण का दोषी पाया गया है। दोनों अधिकारियों ने पत्रकार के परिजन का काम अटकाया और धमकाया भी।
मामला पत्रकार भुवन तोषनीवाल का है, जो विचार एक प्रयास नामक पत्रिका के संपादक हैं। उन्होंने 21 मार्च को कलेक्टर वर्मा को पत्र लिखकर शिकायत की थी कि चाचा गोपाल तोषनीवाल ने उनकी सांवेर तहसील के ग्राम खाकरोड स्थित भूमि के सीमांकन के लिए 29 अक्टूबर 2025 को आवेदन दिया था।
नियमानुसार ये कार्य समयसीमा में पूर्ण करना था, लेकिन पटवारी दीपशिखा कैथवास और आरआई धर्मेंद्र गुप्ता ने जान-बूझकर कार्य को लंबित रखा। यही नहीं, दोनों अधिकारियों ने सीमांकन कार्य के लिए रिश्वत मांगी। हमने मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की, लेकिन इन अधिकारियों ने इसे वापस लेने का दबाव बनाया।
हमें धरमपुरी कार्यालय में बुलवाकर शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया भी। उन्होंने परिजन के साथ न केवल असहयोगात्मक रवैया अपनाया, बल्कि सीएम हेल्पलाइन को लेकर कहा कि इससे उनका कुछ नहीं बिगड़ता। भुवन तोषनीवाल ने कलेक्टर को एक रिकॉर्डिंग भी सौंपी, जिसमें उनके मोबाइल से दोनों अधिकारी बात कर रहे हैं कि केवल सीएम हेल्पलाइन में की शिकायत रद्द कराने के लिए उन्हें कार्यालय बुलाया है।
इससे जाहिर है कि उनका उद्देश्य सीमांकन कराना नहीं, बल्कि शिकायत समाप्त कराने का प्रयास है। एक और रिकॉर्डिंग में पटवारी दीपशिखा कैथवास परिजन से कह रही हैं कि सीएम हेल्पलाइन को आपने क्या समझ रखा है? इससे कुछ नहीं होता। ये बात न केवल शासन की जनशिकायत प्रणाली की गरिमा के विपरीत है, बल्कि लोगों के विश्वास व अधिकारों का हनन भी है।
याचना दीक्षित पर हुई है कार्रवाई
राऊ तहसील में सरकारी जमीन का निजी व्यक्ति को नामांतरण करने के मामले में हाल ही में राऊ तहसीलदार याचना दीक्षित पर कार्रवाई हुई ही है। अधिकारियों का काकस बन जाने का परिणाम के दो ये ही उदाहरण नहीं हैं, खुड़ैल के पूर्व नायब तहसलीदार दयाराम निगम का नामातंरण विवाद भी सामने आ गया।
संजीव व सुरेश कानूनगो द्वारा की शिकायत में कहा गया है कि वे भिंगारिया गांव में 18 हेक्टेयर जमीन की मालकिन रामकुंवरबाई के वारिस हैं, लेकिन निगम ने सांठगांठ कर अन्य के नाम कर दी, साथ ही इसमें मिलीभगत कर इस जमीन को बिकवाने के लिए भी राजस्व अधिकारियों द्वारा दलाली की जा रही है।
कलेक्टर ने कराई जांच तो पाया दोषी
मामले की जांच कलेक्टर वर्मा ने एडीएम रोशन राय से कराई। 24 मार्च को दिए आदेश में कलेक्टर ने कहा है कि पटवारी दीपशिखा कैथवास द्वारा समयसीमा में सीमांकन न करने, प्रकरण में अत्यंत गंभीर और आपत्तिजनक तथ्य सामने आने, आवेदक के परिजन के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करने और सीएम हेल्पलाइन के प्रति अनादर प्रदर्शित किया जाना पाया है।
दोनों अधिकारियों का ये कृत्य मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 में कदाचरण की श्रेणी में आता है और शासकीय कार्य के प्रति लापरवाही दिखाता है। अत: दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। वे तहसील कार्यालय में बैठेंगी। कलेक्टर ने तहसीलदार पूनम तोमर को भी नोटिस जारी किया है।
अलग तहसील बनने से अधिकारियों की जुगलबंदी
अब कलेक्टोरेट में केवल जूनी इंदौर और बिचौली हप्सी तहसील के कार्यालय ही बचे हैं। सांवेर, महू, देपालपुर तहसील पहले से ही अलग थीं और अब कनाड़िया, राऊ, मल्हारगंज, खुड़ैल भी अलग हो चुकी हैं। हालत यह है कि इन तहसीलों में कोई झांकने वाला नहीं है। इसी का फायदा उठाकर यहां अधिकारियों ने काकस बना लिया है।
वरिष्ठ अधिकारी इधर झांकते भी नहीं। इंदौर में भी प्रोटोकॉल व अन्य काम का जिम्मा दूसरे तहसीलदारों को दिया गया है। 6 माह में रोस्टर बदलना तय था, लेकिन नहीं हुआ, जिसका फायदा अधिकारी उठा रहे हैं।
जो सीसीटीवी तत्कालीन कलेक्टर आशीषसिंह के समय लगे थे, वह डिब्बा हो गए हैं। आरसीएम पोर्टल पर अब रीडर, बाबू ही लॉग इन कर देते हैं। शासन और कलेक्टर दोनों को झांसा दिया जा रहा है।
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