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अस्पतालों में मरीजों को जान का खतरा: बिना अनुमति बिल्डिंग निर्माण; फायर एनओसी नहीं, पुरानी बिल्डिंगों में रिनोवेशन के नाम पर निर्माण

KHULASA FIRST

संवाददाता

25 मार्च 2026, 1:27 pm
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अस्पतालों में मरीजों को जान का खतरा

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शहर में चिकित्सा माफिया पूरी तरह सक्रिय हो गया है। इसके चलते अस्पताल की बिल्डिगें निगम की अनुमति के बिना बन गई हैं। बहुमंजिला बिल्डिगों में आग से सुरक्षा के संसाधन नहीं होने से अब तक फायर एनओसी नहीं मिली है।

इसके अलावा पुरानी बिल्डिंग को नया दिखाने के लिए रिनोवेशन के नाम पर निर्माण कार्य किए जाने से कई अस्पतालों में मरीजों की जान को खतरा बढ़ गया है। लेकिन प्रशासन, निगम व स्वास्थ्य विभाग के अफसर मूक दर्शक बने हुए हैं।

नगर निगम में अफसरों की अफसरशाही हावी है। इसके चलते शहर में अवैध निर्माण होते हैं और अफसर सबकुछ देखकर भी उनको अनदेखा कर देते हैं। बाद में जब मामलों का खुलासा होता है तो नोटिस देकर कार्रवाई की चेतावनी देकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

निगम अफसरों की इस करतूत का फायदा उठाकर शहर में चिकित्सा माफिया ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। बताया जाता है कि शहर में करीब 36 अस्पताल भवन नगर निगम की अनुमति के बिना ही बन गए हैं।

बहुमंजिला भवन बनाने के दौरान निर्माणकर्ता और निगम के बिल्डिंग परमिशन विभाग के अफसरों की मिलीभगत होने से उनके खिलाफ कभी कार्रवाई नहीं की गई। अब जब मामले का खुलासा हुआ तो निगम अफसरों ने महज नोटिस देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।

जबकि निगम सख्त कार्रवाई करता तो अस्पताल भवन बनाने वालों के मंसूबे धरे रह जाते। लेकिन निजी अस्पताल संचालकों की राजनीतिक जुगलबंदी और निगम अफसरों से नजदीकी के चलते अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इससे चिकित्सा माफिया के हौसले बढ़ गए हैं। निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के बाद भी मरीजों की जान को हमेशा खतरा बना रहता है, लेकिन प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसकी अनदेखी कर रहे हैं।

फायर सेफ्टी नहीं
करीब दर्जन भर बड़े अस्पतालों में आग से सुरक्षा के संसाधन नहीं हैं। इसके बाद भी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इससे अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों की जान खतरे में है। अस्पतालों के पास आग बुझाने के बेसिक इंतजाम तक नहीं हैं। इनमें सरकारी पीसी सेठी अस्पताल भी शामिल है।

इसका खुलासा एक आरटीआई से हुआ। अधिवक्ता चर्चित शास्त्री ने 100 बेड से ज्यादा क्षमता वाले अस्पतालों की फायर एनओसी की जानकारी मांगी तो खुलासा हुआ कि शहर के दर्जन भर अस्पतालों के पास फायर एनओसी नहीं है। इन अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम के संसाधन ही नहीं है, जबकि कई अस्पतालों ने सालों से एनओसी का नवीनीकरण नहीं कराया।

इससे इन अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को आग लगने पर जान का खतरा बना रहता है। ऐसे अस्पतालों में पीसी सेठी, लक्ष्मी मेमोरियल, एसएनएस हॉस्पिटल, आर्थोस मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, मेडिस्टा हॉस्पिटल, मयूर अस्पताल, प्रमिला हॉस्पिटल, आरएन कपूर मेमोरियल हॉस्पिटल, स्कूल आई एक्सीलेंस, सेवाकुंज हॉस्पिटल, शुभदीप हॉस्पिटल और इंदौर सिटी हॉस्पिटल शामिल हैं।

नियमों को ठेंगा दिखा रहे: अवैध निर्माण में निगम के बिल्डिंग अफसर और फायर एनओसी में फायर आफिसर की मिलीभगत से निजी अस्पतालों में नियमों को ठेंगा दिखाकर अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। जबकि निगम से कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र लिए बिना और फायर एनओसी लिए बिना बिल्डिंग में कामकाज शुरू नहीं किया जा सकता है।

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